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आरक्षण को हर किसी के लिए नुकसानदायक मानते हैं इमरान हाशमी, शिक्षा मंत्री होते तो क्या बदलाव करते?
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Wed, 16 Jan 2019 09:21 AM IST
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cheat india
- फोटो : file photo
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केंद्र सरकार का आर्थिक आधार पर सामान्य जाति के लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का मसला हिंदी सिनेमा तक पहुंच चुका है। सितारे मानते हैं कि आरक्षण व्यवस्था ने देश की शिक्षा व्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है। स्कूल-कॉलेजों से शुरू होने वाला आरक्षण ही है जो आगे चलकर सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। देखिए, क्या कहते हैं इमरान हाशमी इस खास मुलाकात में।
Emraan Hashmi
- फोटो : social media
कहां खामी है हमारी शिक्षा व्यवस्था में?
जब भी मैं परीक्षाओं की सोचता हूं तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि हमारा एजुकेशन सिस्टम खराब है और इसकी हालत बहुत बुरी है। सब जगह छात्रों को सिर्फ रट्टा मारना सिखाया जाता है। सिर्फ किताबी ज्ञान पर ज़्यादा गौर किया जाता है। कोई और किसी तरह की वोकेशनल ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यह सभी को पता है, पर कोई इस पर बात नहीं करना चाहता। दूसरी तरफ एजूकेशन माफिया है जो उन बच्चों को पैसे लेकर पास करा देता हैं जो पास होने के लायक ही नहीं है और इस रेस में होनहार बच्चे पीछे छूट जाते हैं।
जब भी मैं परीक्षाओं की सोचता हूं तो सबसे पहला ख्याल यही आता है कि हमारा एजुकेशन सिस्टम खराब है और इसकी हालत बहुत बुरी है। सब जगह छात्रों को सिर्फ रट्टा मारना सिखाया जाता है। सिर्फ किताबी ज्ञान पर ज़्यादा गौर किया जाता है। कोई और किसी तरह की वोकेशनल ट्रेनिंग नहीं दी जाती। यह सभी को पता है, पर कोई इस पर बात नहीं करना चाहता। दूसरी तरफ एजूकेशन माफिया है जो उन बच्चों को पैसे लेकर पास करा देता हैं जो पास होने के लायक ही नहीं है और इस रेस में होनहार बच्चे पीछे छूट जाते हैं।
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अगर आपको शिक्षा मंत्री बना दिया जाए तो क्या बदलना चाहेंगे?
हमें और प्रशिक्षित अध्यापकों की ज़रूरत है। इसी के साथ साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव आना चाहिए। रट्टा मारने वाला सिस्टम तो जड़ से खत्म होना चाहिए। हज़ारों विश्वविद्यालय हैं जिनमे हज़ारों बच्चे पढ़ते हैं, उनमें ऐसे बहुत हैं जो अभी भी बेरोज़गार हैं। और सबसे ज़्यादा, आरक्षण प्रणाली की दिक्कत है। मैं उनको नहीं कह रहा जो गरीब हैं पर आरक्षण की वजह से 60 प्रतिशत सीटें चली गई हैं और जो तथाकथित सामान्य लोग हैं उनके लिए सिर्फ 40 प्रतिशत सीटें बची हैं। इनमें से भी पैसे वालों को ज़्यादा मिलती हैं, यह बहुत गलत हैं।
हमें और प्रशिक्षित अध्यापकों की ज़रूरत है। इसी के साथ साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव आना चाहिए। रट्टा मारने वाला सिस्टम तो जड़ से खत्म होना चाहिए। हज़ारों विश्वविद्यालय हैं जिनमे हज़ारों बच्चे पढ़ते हैं, उनमें ऐसे बहुत हैं जो अभी भी बेरोज़गार हैं। और सबसे ज़्यादा, आरक्षण प्रणाली की दिक्कत है। मैं उनको नहीं कह रहा जो गरीब हैं पर आरक्षण की वजह से 60 प्रतिशत सीटें चली गई हैं और जो तथाकथित सामान्य लोग हैं उनके लिए सिर्फ 40 प्रतिशत सीटें बची हैं। इनमें से भी पैसे वालों को ज़्यादा मिलती हैं, यह बहुत गलत हैं।
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तो कैसा रहा चीट इंडिया के किरदार को अदा करना?
हां यह काफी अलग है, और अपने आप में ही एक अनोखा अनुभव था इस किरदार को करना। एक यूपी का लड़का है जो दिखने में बहुत सीधा है और बहुत प्यारी प्यारी बातें करता है, पर वह इस चीटिंग माफिया का हेड है, तो यह काफी किरदार आज तक के निभाए गय किरदारों में सबसे अनोखा था।
हां यह काफी अलग है, और अपने आप में ही एक अनोखा अनुभव था इस किरदार को करना। एक यूपी का लड़का है जो दिखने में बहुत सीधा है और बहुत प्यारी प्यारी बातें करता है, पर वह इस चीटिंग माफिया का हेड है, तो यह काफी किरदार आज तक के निभाए गय किरदारों में सबसे अनोखा था।
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emraan hashmi
- फोटो : instagram
फिल्म का नाम और रिलीज़ की तारीख दोनों ही बदल गए?
तारीख बदलना काफी अच्छा रहा क्योंकि इससे तो हमें फायदा ही हुआ है। अब हमें एक सोलो रिलीज़ मिल रही है। बस ऐसा ना हो कि लोग 25 तारीख ही याद रखें। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि तारीख की बदले जाने की खबर सबको मिल जाए। पर हां आखिरी मिनट पर नाम में बदलाव करना बहुत भारी पड़ा।
तारीख बदलना काफी अच्छा रहा क्योंकि इससे तो हमें फायदा ही हुआ है। अब हमें एक सोलो रिलीज़ मिल रही है। बस ऐसा ना हो कि लोग 25 तारीख ही याद रखें। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि तारीख की बदले जाने की खबर सबको मिल जाए। पर हां आखिरी मिनट पर नाम में बदलाव करना बहुत भारी पड़ा।