आज भारतीय सिनेमा तेजी से पूरे विश्व में अपनी पहचान बना रहा है। एक तरफ जहां विदेशी कलाकार अब भारतीय फिल्मों में आने से कतराते नहीं हैं तो वहीं दूसरे ओर भारतीय कलाकर भी विदेशी फिल्मों में मुख्य किरदार निभाते नजर आ रहे हैं। ये सब तो आज की बातें हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिनेमा का इतिहास कैसे था। इस बारे में भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय संग्रहालय काफी कुछ बताता है। वैसे क्या आपको पता है कि भारत में सिनेमा का आगमन एक घटना के स्वरूप में हुआ। अगर नहीं पता तो कोई बात नहीं क्योंकि आपको ऐसे ही कई जानकारियां देने के लिए अमर उजाला लाया है एक खास सीरीज जिसमें आपको भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी।
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भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय के बाहर भारतीय सिनेमा के पितामह दादासाहेब फाल्के की मूर्ति लगी हुई है। गुलशन महल के गेट पर हमें मैप के माध्यम से अंदर महल के हिस्से में क्या क्या है इसकी जानकारी दी गई है। संग्रहालय के अंदर घुसते ही हमारे सामने सिनेमा का इतिहास नजर आता है। जिसके एक तरफ दुनिया में सिनेमा की उत्पत्ति है तो वहीं दूसरी तरफ भारत में सिनेमा का आगमन के इतिहास का वर्णन है।
संग्रहालय की शुरुआत में हमें सिनेमा से भी पहले के मनोरंजन के माध्यम देखने को मिलते हैं। यहां चलचित्र से लेकर जादुई लॉलटेन और उसका इतिहास देखने को मिलता है। हमें पता चलता है कि जब सिनेमा नहीं था उस समय भी रोचक तरीके से कहानियों को दिखाया जाता था। कहानियों को पर्दे पर देखने की लालसा ने ही आगे चलकर सिनेमा की नींव डाली। इसका श्रेय लुमियर ब्रदर्स को जाता है जिन्होंने विज्ञान की मदद से सिनेमा में ऐतिहासिक बदलाव लाया।
संग्रहालय में हमें इस बाते की भी जानकारी मिलती है कि भारत में सिनेमा का आगमन एक घटना के स्वरूप में हुआ। दरअसल सिनेमा की उत्पत्ति करने वाले लूमियर ब्रदर्स एक बार फ्रांस से ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे। तभी अचानक उनका शिप बंबई (अब मुंबई) के पास बंद पड़ गया था। जिसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए बंबई में ही रुकना पड़ा। उस समय वह विक्टोरिया भवन में रुके थे। तब उन्होंने अपनी फिल्म की स्क्रीनिंग वहां रखी। उस फिल्म को ऐसी प्रतिक्रिया मिली जिसके बाद उन्होंने भारत के कई शहरों में अपनी फिल्म की प्रदर्शनी की। इसके साथ ही शताब्दी का चमत्कार भारत पहुंच गया।
भारत ने हमेशा ही विज्ञान के आविष्कार के खुले मन से स्वागत किया है। लुमियर बद्रर्स के बाद भारत में भी धीरे- धीरे सिनेमा बढ़ता चला गया। तंबुओं से शुरू हुआ सिनेमा धीरे- धीरे महलों तक भी पहुंच गया और प्रमुख शहरों में सिनेमाघरों का निर्माण भी शुरू हो गया। संग्रहालय के पहले हिस्से ने ही हमें इतना मनमोहित कर दिया कि महल का हर एक कोना सिनेमा के एक अध्याय के रूप में नजर आने लगा।
फिलहाल इस स्पेशल रिपोर्ट के पहले एपिसोड में इतना ही, जल्दी ही आपके सामने पेश होगा भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय का दूसरा एपिसोड।