सुपरहिट फिल्म भूल भुलैया की सीक्वेल के हीरो कार्तिक आर्यन जब पैदा भी नहीं हुए थे, इस फिल्म के निर्देशक अनीस बज्मी बतौर लेखक अपनी पहली सुपरहिट फिल्म स्वर्ग की कामयाबी देख चुके थे। मशहूर शायर अब्दुल हमीद बज्मी के बेटे अनीस के निर्देशन में बनी फिल्म पागलपंती भी रिलीज को तैयार है। अपने 29 साल के फिल्मी सफरनामे पर अनीस बज्मी ने अमर उजाला से की ये एक्सक्लूसिव मुलाकात।
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नो एंट्री का सीक्वेल मैं लिख चुका हूं। फिल्म के निर्माता बोनी कपूर हैं तो बस उनका ही इंतजार है। उनके और सलमान भाई के बीच कुछ चल रहा है। अपनी तरफ से मैं सलमान को फिल्म की पटकथा सुना चुका है। उनको बहुत अच्छी लगी फिल्म। सलमान खान का अगर मैं दूसरा नाम बोलूं तो वो दिलखान हैं। उनका दिल है तो वह सब कुछ करेंगे। अगर दिल नहीं है तो मुगले आजम भी लिखकर ले आओ वह बोलेंगे कि बाद में देखते हैं। वह प्यार मोहब्बत वाले इंसान हैं। दूसरों की मदद करने वाले इंसान हैं। इस उम्र में भी उनके चेहरे पर एक तरह की मासूमियत झलकती है और ये इस तरह का तेज तब आता है जब इंसान अंदर से अच्छा होता है।
गुजरात से मुंबई के सफर के बारे में कुछ बताइए, बचपन में तो आपने तमाम शायरों की खिदमत की होगी?
लिखना मेरे खून में है। अपने वालिद के साथ मुंबई के वजीर होटल में मैंने उस दौर के तमाम बड़े शायरों को चाय पिलाई है, उनके लिए पान-सिगरेट लेकर आया हूं। उसी दौर में 11-12 साल की उम्र में लिखने का शौक पनपा। शुरू में शायरी की कोशिश की लेकिन जल्द ही समझ आ गया कि मैं इसके लिए नहीं बना हूं। एक बार और कोशिश की मैंने जब गीतकार समीर को मैंने अपनी एक फिल्म का सीन लिखने को कहा और मैंने उनके गीत का मुखड़ा लिखने की जिम्मेदारी ले ली। दो तीन दिन बाद हम दोनों मिले तो मैंने छूटते ही कहा कि भाई, ये बहुत मुश्किल है। तो समीर बोले, कि ज्यादा मुश्किल काम ये है जो आप करते हैं।
बतौर निर्देशक आपने पहली दो फिल्में अजय देवगन के साथ कीं। फिल्म प्यार तो होना ही था में अजय को रूमानी नायक बनाने का ख्याल कैसे आया, उन दिनों के तो वह एक्शन स्टार थे?
प्यार तो होना ही था, अजय की पूरी तरह से पहली रोमांटिक फिल्म थी। अजय के लिए जो पहली फिल्म मैंने बनाई, उस समय तक मैं उनको जानता नहीं था। निर्माता ने कहा कि फिल्म अनीस बज्मी निर्देशित करेंगे और अजय ने मना नहीं किया। ये बहुत बड़ा भरोसा जताया उन्होंने मुझ पर। अजय एक बेहतरीन अभिनेता हैं। पहली फिल्म नहीं चली तो मैं दूसरी फिल्म लेकर उनके पास गया। उन्होंने इस बार भी भरोसा जताया। फिल्म इस बार सुपरहिट रही। अजय को इस फिल्म से एक नई इमेज मिली और मुझे मिला भरोसे पर खरा उतरने का सुकून।
और, अजय से पहला निगेटिव किरदार भी आपने ही कराया?
मैं लगातार बदलाव में यकीन रखता हूं। निर्देशक का असली काम है समय के साथ खुद को बदलते रहना। लव स्टोरी के बाद मैंने रोमांटिक थ्रिलर बनाने का फैसला किया। अजय उससे पहले तमाम ग्रे शेड्स के किरदार ठुकरा चुके थे लेकिन दीवानगी उन्होंने की सिर्फ मुझ पर भरोसा करके। आज भी लोग इस फिल्म में अजय देवगन के अभिनय को उनकी बेहतरीन अदाकारी मानते हैं।