निर्देशक की ऐसी इमेज से डर गईं थीं सांड की आंख की हीरोइनें, इंटरव्यू में तुषार ने खोला राज
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आप खुद लेखक हैं तो आपने सांड की आंख की कहानी क्यों नहीं लिखी?
मैंने उत्तर प्रदेश की इन दो दादियां की कहानी पर पांच साल पहले काम शुरू किया था,। फिर मैं जाने माने लेखक संजय मासूम से मिला जिन्होंने मुझे बल्ली से मिलवाया और दादियों से भी। फिर हम जौहरी गांव आए। सही बताऊं तो मुझे खुदपर यकीन नहीं था कि यह कहानी मैं लिख पाऊंगा या नहीं। फिर मेरी मुलाकात जगदीप से हुई जिन्होंने फिल्म के संवाद लिखे हैं। आज सभी इन संवाद की तारीफ कर रहे हैं।
तापसी और भूमि को निर्देशित करना कैसा रहा?
नखरे तो मेरे ही थे पर मेरी टीम बहुत ही अच्छी है। दोनों ने मुझ पर विश्वास किया और मेरी सोच का बहुत साथ भी दिया। शुरूआत में वह भी थोड़ा डरे हुए थे क्यों सभी मुझे फिल्म मस्ती फिल्म और कई वैसी ही फिल्मों के लेखक के नाम से जानते हैं। उसकी वजह से मैने इस छवि को काफी वक्त तक झेला है। अनुराग कश्यप और मेरी पत्नी सभी घबराए हुए थे। पर फिल्म के सेट पर दो तीन दिन बाद सभी ने मुझमें विश्वास करना शुरू कर दिया।
फिल्म की कहानी में कहां तक सच्चाई दिखाई गई है?
हमने ज्यादा से ज्यादा सच्चाई दिखाने की कोशिश की है। जो तथ्य हैं उन्हें नहीं बदला है। हां कहानी को थोड़ा अच्छा जताने के लिए थोड़ा ड्रामा तो डाला ही है। बहुत ही छोटे स्तर पर कहानी में बदलाव किए गए हैं। लेकिन इन दो दादियों के सफर को 70 से 80 प्रतिशत तक वैसे ही बताया है। हिन्दी फिल्म है तो थोड़ा बहुत ड्रामा तो डालना ही पड़ता है। कुछ नए किरदारों को भी डाला है। पांच साल की तपस्या का फल है मेरी ये फिल्म। बहुत कुछ सिखाया पढ़ाया है इस फिल्म ने मुझे।