फिरोज खान का हिंदी सिनेमा में कोई गॉडफादर नहीं रहा। उन्होंने खुद को सुपरस्टार बनाने के लिए खुद ही फिल्में बनाई। बतौर डायरेक्टर पहली ही फिल्म ‘अपराध’ से एक ऐसा बेंचमार्क हिंदी सिनेमा में सेट किया कि लोग बस देखते रह गए।
Feroz Khan Birthday: इन तीन फिल्मों में छुपा है अफगानिस्तान के डीएनए वाले असली खान का तिलिस्म
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फॉर्मूला कार रेसिंग की जर्मनी में हुई शूटिंग दिखाने के बाद फिरोज खान ने अगली फिल्म ‘धर्मात्मा’ की शूटिंग अफगानिस्तान जाकर की और सिनेमा देखने वालों में हल्ला मचा दिया। और, बतौर निर्देशक अपनी तीसरी ही फिल्म ‘कुर्बानी’ में अपने सिनेमा के एक अलग स्टाइल का संसार रच दिया। संजय गांधी के निधन के बाद फिरोज ने इस फिल्म को उनकी याद में समर्पित किया और फिल्म की पहली रील में उनके लिए एक श्रद्धांजलि भी बाद में जोड़ी गई। आइए आपको बताते हैं उनकी तीन ऐसे ही बेहतरीन फिल्मों के बारे में।
काला सोना
फिरोज खान को तब तक लोग भारत का क्लिंट ईस्टवुड बुलाने लगे थे लेकिन 25 सितंबर 1939 को जुल्फिकार अली शाह खान के तौर पर जन्मे फिरोज खान को दर्शकों की नब्ज पकड़ने में अपने पूरे करियर महारत हासिल रही। साल 1980 में रिलीज हुई उनकी ‘चुनौती’ नहीं चली लेकिन उनकी अपनी बनाई फिल्म ‘कुर्बानी’ सुपर डुपर हिट रही। फिरोज खाना वाला ताना बाना बाद में फिर मिथुन चक्रवर्ती ने अपनाया और 1984 में आई फिल्म ‘जागीर’ में हिट भी रहे। बाद में फिल्म ‘वांटेड’ में भी मिथुन ने यही ‘काऊब्वॉय’ वाला रूप फिर से धरा। पर बात बनी नहीं।
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कुर्बानी
साल 1980 में रिलीज हुई हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा कमाई का रिकॉर्ड बनाने वाली कुर्बानी सबसे पहले अमिताभ बच्चन को ऑफर हुई थी। फिरोज खान की मंशा थी कि वह फिल्म कुर्बानी में अमर का रोल करें, ये रोल बाद में विनोद खन्ना ने किया। अमिताभ बच्चन के पास तब छह महीनों तक तारीखें नहीं थी और वह चाहते थे कि फिरोज खान इतना इंतजार करें उनके लिए। लेकिन, फिरोज खान का अंदाज ही निराला है। वह जब जो चाहते हैं, वही करते हैं। फिल्म कुर्बानी के लिए जो कुछ उन्होंने किया वह उन दिनों फिल्म इंडस्ट्री में पागलपन समझा जाता था। फिल्म में उन्होंने एक असली मर्सिडीज कार तहस नहस कर दी थी, ये वो समय था जब हिंदुस्तान में महंगी से महंगी गाड़ियां रखने वालों ने भी भारत की सड़कों पर मर्सिडीज नहीं देखी थी।
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जाबांज
भारतीय सिनेमा के काऊब्वॉय हीरो कहलाने वाले फिरोज खान की फिल्म ‘जांबाज़’ जिन हादसों और हालात से गुजरते हुए परदे पर पहुंची वह भी किसी दिलेरी से कम नहीं है। फिरोज खान ने इस फिल्म के तमाम नए रिश्ते बनाए, तमाम पुराने रिश्ते तोड़े और यहां तक कि अपने खून के रिश्तों में भी दरार डाल बैठे। फिरोज खान हिंदी सिनेमा के उन गिने चुने सितारों में से है जिन्होंने पहले राज कपूर, देवानंद और दिलीप कुमार की तिकड़ी के समय अपनी पहचान बनाने में कामयाबी पाई और फिर राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के समय में भी खूब शोहरत बटोरी। साल 1972 में फिल्म ‘अपराध’ से फिरोज खान निर्देशक बने और उनकी इसके बाद बनी अगली दोनों फिल्में ‘धर्मात्मा’ और ‘कुर्बानी’ भी सुपरहिट फिल्में रहीं। कुर्बानी ने फिरोज खान को इतनी दौलत दी कि उनके पास की तिजोरियां ये कमाई रखने के लिए कम पड़ गईं।
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