सत्ता और व्यवस्था के भ्रष्ट होने की बातें अक्सर होती हैं लेकिन क्या आम आदमी भी भ्रष्ट हो चुका है और उसकी मुश्किलें, कराह और न्याय की दुहाई दिखावा भर हैं? क्या वह उसी सत्ता और व्यवस्था का अक्स है जिस पर तोहमतें लगाता है। इंडी-सिनेमा की धारा में बनी कुलदीप पटवालः आई डिट नॉट डू इट देखें तो आप यही मानेंगे कि आम आदमी बहती गंगा में हाथ धोने में पीछे नहीं है। पवित्रता उसका ढोंग है।
Movie Review: कलाकारों की शानदार एक्टिंग देखनी है तो जरूर देखिए, 'कुलदीप पटवालः आई डिट नॉट डू इट'
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सत्ता और व्यवस्था के भ्रष्ट होने की बातें अक्सर होती हैं लेकिन क्या आम आदमी भी भ्रष्ट हो चुका है और उसकी मुश्किलें, कराह और न्याय की दुहाई दिखावा भर हैं? क्या वह उसी सत्ता और व्यवस्था का अक्स है जिस पर तोहमतें लगाता है। इंडी-सिनेमा की धारा में बनी कुलदीप पटवालः आई डिट नॉट डू इट देखें तो आप यही मानेंगे कि आम आदमी बहती गंगा में हाथ धोने में पीछे नहीं है। पवित्रता उसका ढोंग है।
फिल्म देखते हुए लगता है कि निर्माता-निर्देशक रेमी कोहली आम आदमी को अन्याय के विरुद्ध न्याय दिलाने का खेल दिखा रहे हैं लेकिन जल्द ही यह एक दूसरे तमाशे बदल जाता है जब पीड़ित दिखने वाला ही षड्यंत्र में शामिल नजर आता है।
फिल्म की कहानी कुलदीप पटवाल (दीपक डोबरियाल) पर राज्य के युवा मुख्यमंत्री (प्रवीण डबास) की हत्या के आरोप से शुरू होती है। जिस जनसभा में मुख्यमंत्री को गोली लगी, वह उसी दिशा आई थी जहां कुलदीप खड़ा था। गोली चलने के बाद लोग दो दिशाओं में भागे- एक मंच की तरफ मुख्यमंत्री को बचाने, दूसरे मैदान छोड़कर अपनी जान बचाने। केवल कुलदीप अपनी जगह खड़ा रहा और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। वैसे हकीकत यह है कि किसी ने कुलदीप को गोली चलाते नहीं देखा! क्या कुलदीप आरोप से बरी हो पाएगा या उसे सजा मिलेगी?
फिल्म का दायरा रोचक है लेकिन कहानी का ट्रीटमेंट और निर्देशन खराब है। बार-बार फिल्म बरसों आगे बढ़ती और महीनों पीछे होती रहती है। जिसका हिसाब रखना किसी के लिए भी कठिन होता है। फिल्म किसने हत्या की और क्यों की टाइप के सवालों को छूती हुई थोड़ा रहस्य पैदा करने की कोशिश करती है परंतु औंधे मुंह गिरती है।
तमाम कच्ची-पक्की बातों के बीच पता चलता है कि आम जनता का भला चाहने वाले मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश में हर कोई कमोबेश शामिल है। फिल्म के ज्यादातर कलाकारों का काम अपने किरदारों से न्याय करने वाला है लेकिन गुलशन दहिया अलग चमक छोड़ने में कामयाब हुए हैं। 'शैतान', 'हेट स्टोरी' और 'हंटर' जैसी फिल्मों में वह पहले भी प्रभावित कर चुके हैं।