हंसिका मोटवानी ने बाल कलाकार के तौर पर साल 2000 में टीवी शो 'शाका लाका बूम बूम' से आगाज किया। इसके बाद वह 'किसी देश में निकला होगा चांद' और ऋतिक रोशन की फिल्म 'कोई मिल गया' में भी बाल कलाकार के तौर पर ही नजर आईं। लेकिन, हिमेश रेशमिया की फिल्म 'आप का सुरूर' में में हंसिका मोटवानी को हीरोइन के दौर पर देखकर लोग चौंक गए। असल में सिर्फ 16 साल की हंसिका इस फिल्म में वयस्क हो चुकी युवती जैसी दिख रही थीं। खोजबीन हुई तो पता चला कि उनकी मां ने हंसिका को जल्दी जवान दिखाने के लिए हॉमोर्नल इंजेक्शन का सहारा लिया। इस मुद्दे को लेकर तब बहुत बवाल हुआ था। बाद में हंसिका ने दक्षिण का रुख किया और वहां की बड़ी स्टार बनीं।
Hansika Motwani: हंसिका के हीरोइन बनने के झगड़े पर पिता ने छोड़ा घर, अल्लू अर्जुन की संगत से बनीं सुपरस्टार
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पिता ने हंसिका की मां को बहुत समझाया
हंसिका मोटवानी के पिता प्रदीप मोटवानी शुरू से हंसिका के एक्टिंग क्षेत्र में आने के खिलाफ थे। लेकिन उनकी मां ने उन्हें यह कर राजी कर लिया कि चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर ही तो काम कर रही है, उसे कहां हीरोइन बनाना है। लेकिन हंसिका के पास जैसे जैसे काम आता गया, कहते हैं कि उनकी मां महत्वाकांक्षी होती गई और उन्होंने तय कर लिया कि बेटी को हीरोइन बनाकर ही रहेंगी। उनको बेटी को हीरोइन बनाने की इतनी जल्दी थी कि उन्होंने इतना भी इन्तजार करना ठीक नहीं समझा कि कम से कम बेटी की उम्र तो हो जाए हीरोइन बनने की। पिता इसके बहुत खिलाफ थे लेकिन उनकी पत्नी ने उनकी न मानी तो न मानी।
जूही चावला ने दिया अभिनय का सुझाव
बॉलीवुड में अधिकतर देखा गया कि पिता बेटियों के फिल्मों में आने के खिलाफ ही रहे हैं। बेटियों को हीरोइन बनाने में मां की ही ज्यादा दिलचस्पी रहती है। हंसिका मोटवानी के साथ भी ऐसा ही हुआ है। एक बार जब हंसिका की मां जूही चावला से मिली तो जूही चावला ने ही हंसिका को फिल्मों में अभिनय करने का सुझाव दिया था। यहीं से हंसिका की मां को लगने लगा कि जब जूही चावला जैसी अभिनेत्री ऐसा सुझाव दे रही है, तो जरूर ही उनकी बेटी में ऐसी कोई बात होगी। हंसिका के बिजनेसमैन पिता प्रदीप मोटवानी बेटी को हीरोइन बनाने के फैसले से खफा थे। उन्होंने अपनी पत्नी को बहुत समझाया। विवाद इतना बढ़ा कि वह घर छोड़कर अलग रहने लगे।
हिंदी सिनेमा में नहीं मिली कामयाबी
हिमेश रेशमिया की फिल्म 'आप का सुरूर' के बाद हंसिका मोटवानी ने गोविंदा के साथ फिल्म 'मनी है तो हनी है' में काम किया। फिल्म का निर्देशन गणेश आचार्य ने किया था। मनोज बाजपेयी के साथ 2004 में फिल्म 'जागो' में बाल कलाकार के तौर पर नजर आईं हंसिका ने बाद में मनोज बाजपेयी के साथ फिल्म 'मनी है तो हनी है' में हीरोइन के तौर पर काम किया। हंसिका मोटवानी की दर्शकों के बीच जो बाल कलाकार की छवि बनी थी, वह उनके हीरोइन बनने में आड़े आ रही थी। वह हिंदी फिल्मों में सफल नहीं रहीं और साउथ सिनेमा की तरफ अपना रुख कर लिया।
साउथ सिनेमा में बजा नाम का डंका
साउथ सिनेमा के लिए हंसिका मोटवानी नया चेहरा थीं। 'आप का सुरूर' के समय ही हंसिका मोटवानी ने पुरी जगन्नाथ की तेलुगू फिल्म 'देसमुदुरु' साइन कर ली थी। साल भर लगातार सिनेमाघरों में चलती रही नौ करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने सिर्फ चार हफ्ते में 20 करोड़ कमा लिए थे। हंसिका मोटवानी को बेस्ट फीमेल डेब्यू के लिए साउथ फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। फिल्म के हीरो अल्लू अर्जुन उनके लिए लकी साबित हुए। साउथ की तकरीबन सारी भाषांओं अब तक हंसिका करीब 50 फिल्में कर चुकी हैं।