बॉलीवुड की पॉप क्वीन कही जाने वाली ऊषा उत्थुप का सात नवंबर को जन्मदिन है। सात नवंबर 1947 को ऊषा उत्थुप ने मुंबई में जन्म लिया था। भारी आवाज के चलते ऊषा उत्थुप को क्लास से बाहर निकाल दिया जाता था लेकिन उसी भारी आवाज ने ऊषा जी को पहचान दिलाई। शनिवार यानि सात नवंबर को ऊषा उत्थुप अपने जीवन के 73 साल पूरे कर लेंगी। इन 73 सालों में उनके जीवन में क्या उतार-चढ़ाव आए और कैसे उन्होंने इस मुकाम को छुआ आइए जानते हैं...
Birthday Special: नौ साल की उम्र में दी पहली परफॉर्मेंस, बड़ी हुईं तो नाइट क्लब में गाया और डार्लिंग से हुईं मशहूर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नाइट क्लब में गाना गाकर करियर किया शुरू
ऊषा ने अपने करियर की शुरुआत होटलों में गाना गाकर की थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई के टॉक ऑफ द टाउन और कोलकाता के ट्रिनकस जैसे नाइट क्लब में गायक के तौर पर भूमिका निभाई। ऊषा का फिल्मी करियर किसी फिल्म की तरह ही शुरू हुआ था। ऊषा दिल्ली की एक पार्टी में गाना गा रही थीं, तभी शशि कपूर की नजर उन पर पड़ी।
शशि कपूर ने उनकी आवाज से प्रभावित होकर उन्हें फिल्मों में गाना गाने का ऑफर दिया। हरे रामा हरे कृष्णा गाने से ऊषा उत्थुप ने फिल्म में अपना डेब्यू किया। इसके बाद ऊषा उत्थुप ने आशा भोसले के साथ चर्चित गाना गया, जिसका नाम था दम मारो दम। इस गाने की इंग्लिश पंक्तियां ऊषा उत्थुप ने गाईं थी और इसके बाद से उन्हें बॉलीवुड ने नोटिस करना शुरू कर दिया था।
कांजीवरम साड़ी और गोल बिंदी लगाने का शौक
ऊषा उत्थुप को कांजीवरम की साड़ी और माथे पर बड़ी गोल बिंदी लगाने का बहुत शौक है। उन्होंने कई सालों तक इस ट्रेंड को बरकरार रखा हालांकि बॉलीवुड में मुकाम हासिल करने के बाद उन्होंने अपने लुक में थोड़े बहुत बदलाव किए थे लेकिन अपने पुराने अंदाज को नहीं छोड़ा।
ऊषा उत्थुप का कहना है कि उन्हें लाइव परफॉर्मेंस में ज्यादा मजा आता है। मुंबई में पैदा हुई ऊषा उत्थुप तमिल ब्राह्मण परिवार से हैं। भारी आवाज होने की वजह से ऊषा को कई बार मौके नहीं मिले लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज इस मुकाम पर पहुंची हैं कि उन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं।
देसी और विदेशी भाषाओं में गायन
ऊषा सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी में ही नहीं बल्कि 16 भारतीय भाषाओं में गाना गाना जानती हैं। इनमें गुजराती, मराठी, कोंकणी, डोगरी, खासी, सिंधी और ओडिया शामिल हैं। इसके अलावा वो विदेशी भाषाओं में भी गाना गा लेती हैं, इसमें स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन, सिन्हाला और रूसी भाषा शामिल हैं।
बचपन से ही ऊषा संगीत के माहौल में रही हैं, इसलिए उन्हें संगीत की गंभीर समझ है। साल 1969 में चेन्नई में महज नौ साल की उम्र में उन्होंने पहली स्टेज परफॉर्मेंस दी थी। फिलहाल ऊषा अपने परिवार के साथ कोलकाता में रहती हैं। उनके परिवार में उनके पति जॉनी उत्थुप, उनके बेटे सनी और बेटी अंजलि हैं।
ऊषा की आरडी बर्मन और बप्पी लहरी के साथ अच्छी जुगलबंदी रही। ऊषा ने अपने सबसे ज्यादा गाने इन्हीं के साथ गाए हैं। इसके अलावा विशाल भारद्वाज की फिल्म सात खून माफ में रेखा भारद्वाज के साथ गाए गाने 'डार्लिंग' में उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। दुनिया के हर बड़े शहर में उत्थुप ने अपनी प्रस्तुति दी है।