विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' ने बॉक्स ऑफिस पर खूब कमाई की थी। जब ये फिल्म रिलीज हुई थी तो उस दौरान इसकी कहानी को लेकर खूब विवाद हुआ था। कहा जा रहा था कि इस फिल्म में सिर्फ एक पक्ष दिखाया गया है। हालांकि इन सबके बावजूद इस फिल्म ने खूब कमाई की थी। अब एकबार फिर 'द कश्मीर फाइल्स' को लेकर विवाद गर्मा गया है। दरअसल इस्राइल के फिल्मकार नादव लापिड ने अपने एक बयान में विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को 'वल्गर' कहा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। तो चलिए आपको बताते हैं कि जब ये फिल्म रिलीज हुई तो इसको लेकर कौन-कौन से देशों की क्या प्रतिक्रिया थी।
The Kashmir Files: पाकिस्तान से ब्रिटेन तक, 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म पर विदेशों में कैसा था रिएक्शन
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पाकिस्तान
जब किसी फिल्म की कहानी कश्मीर से जुड़ी हो तो वहां अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का नाम आना लाजमी है। जब द कश्मीर फाइल्स रिलीज हुई तो अलग-अलग देशों से मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। पाकिस्तान में भी दर्शकों की तरफ से इस फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। कुछ लोगों ने कहा कि कश्मीर के लोगों को जैसे जीना है, वैसे छोड़ देना चाहिए। तो वहीं कुछ लोगों का कहना था कि पूरी दुनिया में मुसलमानों की छवि खराब करने के लिए ऐसी फिल्में बनाई जा रही हैं।
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सिंगापुर
कोरोना महामारी के बाद द कश्मीर फाइल्स ने सिनेमाघरों में ताबड़तोड़ कमाई की थी। लेकिन सिंगापुर में इस फिल्म को बैन कर दिया गया था। इस फिल्म को लेकर सिंगापुर के अधिकारियों ने कहा था कि फिल्म 'सिंगापुर के फिल्म वर्गीकरण दिशानिर्देशों से परे' है। हालांकि बाद में वहां इस फिल्म के सेंसर को मंजूरी मिल गई थी।
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अमेरिका
द कश्मीर फाइल्स को अमेरिका में पसंद किया गया था जानकारी के मुताबिक फिल्म निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री को अमेरिका के राज्य रोड आइलैंड ने फिल्म के निर्माण के लिए विवेक रंजन अग्निहोत्री को सम्मानित भी किया था। साथ ही फिल्म देखने के बाद अमेरिका के राज्य ने 32 साल बाद आधिकारिक तौर पर माना है कि कश्मीर में कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ था।
न्यूजीलैंड
इस फिल्म का विरोध करने वालों की लिस्ट में न्यूजीलैंड का भी नाम शामिल है। न्यूजीलैंड के पूर्व उप प्रधानमंत्री विंस्टन पीटर्स ने फिल्म बोर्ड पर निशाना साधाते हुए फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'इस फिल्म को सेंसर करना न्यूजीलैंड में 15 मार्च के अत्याचारों की जानकारी या छवियों को सेंसर करने के समान है, या उस मामले के लिए 9/11 पर हमले की सभी छवियों को सार्वजनिक ज्ञान से हटा देना है'।
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