इरफान के जिस्म को दुनिया छोड़े साल भर हो आया। उनकी रूहानी मौजूदगी अब भी मुंबई की उन तमाम सड़कों, गलियों और अड्डों पर महसूस होती है, जहां लोगों ने उनके साथ अच्छा वक्त भी गुजारा है। इरफान के साथ जिसने कुछ वक्त भी गुजारा है, वह उनको ताउम्र भूल नहीं सकता। और, जिन्होंने इरफान के साथ फिल्में बनाई हैं, उनको तो वह जिंदगी का हिस्सा कल थे, आज हैं, और हमेशा रहेंगे। यहां अपने चहीते अभिनेता इरफान को याद कर रहे हैं निर्देशक मीरा नायर, ओम राउत, तिग्मांशु धूलिया और अनुराग बासु।
Irrfan की यादें: तिग्मांशु, अनुराग और मीरा नायर ने खोला एहसासों का पिटारा, ओम राउत को भी याद आया बचपन
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मीरा नायर, निर्देशक
चर्चित निर्देशक मीरा नायर ने अपनी पहली फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ में झुग्गियों में रहने वाले बच्चों की ट्रेनिंग के लिए अभिनेता इरफान खान की सेवाएं ली थीं और बहुत बाद में उनके साथ फिल्म ‘नेमसेक’ भी बनाई। ये पूछे जाने पर कि जब उनको ‘ए सूटेबल ब्वॉय’ निर्देशित करने की जिम्मेदारी मिलती दिखाई दी थी तो उनके मन में इरफान के लिए इस सीरीज के कौन से किरदार का ख्याल आया? मीरा नायर कहती हैं, ‘मैंने इरफान के लिए नवाब साब वाला किरदार सोचा था। और, उनकी सेहत के हिसाब से ही मैंने इसमें बदलाव भी किए थे ताकि वह चाहें तो इसे आसानी से कैमरे के सामने निभा सकें। लेकिन, ये हो न सका।’
ओम राउत, निर्देशक
फिल्म ‘करामाती कोट के लिए अजय कार्तिक सर ने बोला कि आ जाओ फिल्म करते हैं लीड रोल है। तब मुझे लीड रोल वगैरह तो समझ आता नहीं था लेकिन मुझे सिनेमा समझना था तो मैं पहुंच गया। वहां इरफान खान मिले। इरफान खान होने का मतलब क्या होता है ये उनका काम देखकर समझ आया। मेरे और उनके साथ में सीन नहीं थे। उनका भी काम बहुत ज्यादा नहीं था लेकिन लाइव ट्रैफिक में जिस तरह उन्होंने फिल्म में वह सड़क पार करने का सीन किया है, वह उनका अपनी कला पर नियंत्रण और खुद पर भरोसा दिखाता है। इरफान बहुत ही सहज और सरल इंसान शुरू से रहे हैं।
तिग्मांशु धूलिया, निर्देशक
इरफान मैं मैंने कभी कोई बदलाव नहीं देखा जैसा कि स्टार बनने के बाद लोगों में हो जाता है। वो वैसा ही था जैसा पहले था। बहुत कम होता है हम लोगों में, जो बाहर के लोग हैं यहां पर, उनमें कि कामयाबी मिले और फिर भी पैर जमीन पर हों। इरफान के पैर हमेशा जमीन पर ही रहे। ‘बैंडिट क्वीन’ बनने के बाद बहुत सारे लोग दिल्ली से और तमाम दूसरे शहरों से बंबई आ गए और मैंने बहुतों को देखा है जमीन छोड़ते हुए। इरफान के वही शौक रहे जैसे पतंग उड़ाना। शूटिंग में देर हो रही हो तो उसे पतंग पकड़ा दो, वह पूरा दिन उड़ाता रहेगा। कहीं किसी गांव वाले ने रोटी बना दी तो उसको वही खाना है।
अनुराग बासु, निर्देशक
मैंने उनके साथ टीवी में कुछ बेहतरीन काम किया है। हालांकि लोगों को सिर्फ यही पता है कि हमने सिर्फ फिल्म 'लाइफ इन अ मेट्रो' में ही काम किया है। उन्होंने यहां से लेकर हॉलीवुड में अपना स्थान खुद बनाया है। कोई भी उनका वह स्थान वापस नहीं ले सकता। हम इरफान के साथ 'लाइफ इन अ मेट्रो' के सीक्वल को लेकर बातचीत कर रहे थे। हम उनका इंतजार कर रहे थे और फिल्म की शुरूआत के लिए रुके हुए थे। हमने फिल्म के विषय को लेकर बातचीत भी कर ली थी और उन्हें किरदार पसंद भी आया था। यह उनकी डायग्नोसिस होने से एक महीने पहले की बात है।