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जब इरफान खान ने कहा था, 'सबसे बड़ा रिस्क है सपने देखना और उन पर यकीन करना', ऑस्कर में किया गया याद

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपाली श्रीवास्तव Updated Mon, 26 Apr 2021 01:53 PM IST
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Irrfan Khan Once Said The Biggest Risk Is To Dream And Believe In Them Memoriam Section Pays Tribute To Him
इरफान खान

अकेडमी अवॉर्ड्स यानी 93वीं ऑस्कर अवॉर्ड्स के समारोह के दौरान दिवंगत कलाकारों के लिए एक खास सेगमेंट रखा गया, जिसका नाम 'मेमोरियम सेग्मेंट' था। इसमें दिवंगत अभिनेता इरफान खान समेत कई सितारों को याद किया गया और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इरफान खान ने हॉलीवुड में 'लाइफ ऑफ पाय', 'जुरासिक वर्ल्ड', 'इनफर्नो' और कई अन्य फिल्में की हैं।

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इरफान खान

इरफान खान एक ऐसे अभिनेता थे, जो अपनी आंखों से भी अभिनय करते थे। उनके अंदर मानवता का अलग चित्रण था और वो बेहद संवेदनशील थे। इरफान खान जब भी बोलते थे तो अपने दिल से बोलते थे। वो कभी भी कुछ पढ़कर या सोचकर नहीं बोला करते थे। ऐसे ही साल 2014 में ‘आईफा’ के मंच पर इरफान खान ने एक स्पीच दी थी, जिसमें उन्होंने अपने और अपने परिवार के बारे में काफी कुछ कहा था। आज हम आपको वही बताने जा रहे हैं।

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इरफान खान, बाबिल खान
इरफान खान ने कहा था कि, 'रिस्क क्या है...मेरे लिए रिस्क का मतलब सपने देखना है और उनमें पूरा यकीन करना है। मैं जिस परिवार से हूं उसमें कोई क्रिएटिव बैकग्राउंड नहीं था, ना ही मेरा परिवार व्यापारी था। मैं पशोपेश में था। इसी माहौल में मैंने कुछ फिल्में देखी और प्रभावित हो गया। एक्टर बनने का सपना देख लिया। ये मेरे जीवन का सबसे बड़ी रिस्क था। ग्रेजुएशन हो चुका था और मेरे करीबी लोग कह रहे थे कि थिएटर करो लेकिन एक नौकरी भी होना चाहिए। मैंने उनकी बात नहीं मानी। मैं सिर्फ अपने सपने में कूदना चाहता था और मैं सपनों के पीछे हो लिया।'
 
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इरफान खान

इरफान ने आगे कहा था कि, 'जिंदगी में कुछ ऐसे मौके भी आते हैं जब आपको कदम पीछे हटाने होते हैं, उनके लिए भी हमेशा तैयार रहना चाहिए। यहां रिस्क के मायने बदल जाते हैं। एक वक्त था जब मैं क्रिकेट खेलता था। मेरा सेलेक्शन सीके नायडू टूर्नामेंट के लिए हुआ था। 26 साथी चुने गए थे जिन्हें एक कैम्प में जाना था। उस कैम्प में जाने के लिए मैं एक मामूली रकम का इंतजाम नहीं कर पाया। यह वो लम्हा था जब मैंने विचार शुरू किया कि मुझे खेल जारी रखना चाहिए या नहीं। मैंने फैसला लिया कि खेल छोड़ देना चाहिए क्योंकि मुझे इसमें किसी ना किसी सहयोग की जरूरत होगी। मैं नहीं जानता था कि आगे क्या करूंगा फिर भी मैंने क्रिकेट को छोड़ दिया।'

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इरफान खान
एक्टर ने आगे कहा था कि, 'जिंदगी आपको सिखाती है। किसी की राय से थोड़ा-बहुत समझ सकते हैं लेकिन सीख नहीं सकते। तमाम किताबें है, तमाम तरह के जानकार हैं जो आपके जीवन को पटरी पर ला सकते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है। आप जो खुद-ब-खुद सीखते हैं वो उससे बड़ी सीख किसी और से नहीं पा सकते। मैंने खुद देखा कि मेरे पिता ने मौत को कितनी आसानी से लिया, इससे ही मैं मौत के अपने डर को हटा पाया। जिस दिन वो नहीं रहे, उस दिन सुबह से वो बड़े आराम से थे, मुझे वो पूरा दिन याद है। लोग उन्हें कह रहे थे कि अस्पताल चलें, लेकिन हालातों के कारण उन्होंने अस्पताल जाना नहीं चुना था। उन्होंने चुन लिया था कि अब इसे जारी रखने का मतलब नहीं है, इसलिए दुनिया से विदा होना बेहतर है। मुझे मौत का डर बचपन से रहा, मैंं सोचता था कि कैसे ये सब छूटेगा, जिंदगी की उलझनें, वगैरह। लेकिन जितनी आसानी से मेरे पिता ने फैसला लिया, उससे मैंने मौत को आसानी से लेना सीखा। मौत का डर मुझसे कुछ तरह दूर हुआ।'
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