गजल सम्राट जगजीत सिंह की सोमवार को आठ मार्च जयंती है। उनका जन्म आठ फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में जन्में जगजीत सिंह ने अपनी गायकी से सारी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी भी उनके मुरीद थे। बहरहाल, न जाने कितनी ही पीढ़िया हैं जो जगजीत सिंह के गाये गज़लों में सुकून पाती रही हैं। जगजीत सिंह ने 1961 में अपने करियर की शुरुआत ऑल इंडिया रेडियो में गाने से शुरू की थी।
जगजीत सिंह का अटल बिहारी बाजपेयी से रहा ये खास रिश्ता, बेटे की मौत के बाद संगीत से होना चाहते थे दूर
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जगजीत सिंह को संगीत उनके पिता सरदार अमर सिंह धमानी जो की एक सरकारी कर्मचारी थे उनसे विरासत में मिला। बाद में वह 24 साल की उम्र में 1965 में मुंबई आ गए थे और दो साल बाद ही 1967 में उनकी मुलाकात गज़ल गायिका चित्रा से हुई और 1969 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए।
वह 'चाहे छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी' हो या 'चिट्ठी न कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश, जहां तुम चले गये' जैसे सैकड़ों गजलों में रचे बसे हैं।
चित्रा और जगजीत सिंह का एक बेटा विवेक हुआ। 20 साल की उम्र में विवेक की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इस वजह से जगजीत और उनकी पत्नी काफी दुखी रहने लगे थे। जगजीत संगीत की दुनिया से दूर हो जाना चाहते थे। करीब एक साल तक उन्होंने कोई गाना नहीं गाया। धीरे-धीरे उन्होंने संगीत की दुनिया में फिर वापसी की। वहीं उनकी पत्नी ने बेटे की मौत से दुखी होकर अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी भी उनके बड़े मुरीद रहे। जगजीत इकलौते ऐसे गायक-संगीतकार हैं जिन्होंने अटल जी के शब्दों को संगीत भी दिया है और गाया भी। अटल जी एक जाने-माने कवि भी थे तो जगजीत सिंह ने उनकी कविताओं को संगीतबद्ध भी किया और अपनी रूहानी आवाज़ में गाया भी। भारत सरकार की तरफ से जगजीत सिंह को साल 2003 में 'पद्म भूषण' सम्मान से नवाजा गया था। साल 2011 में जगजीत सिंह को यूके में गुलाम अली के साथ परफॉर्म करना था लेकिन ब्रेन हैमरेज के कारण 23 सितंबर 2011 को उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। वो करीब 2 हफ्ते तक कोमा में रहे । उनकी हालत बिगड़ती चली गई और 10 अक्टूबर 2011 को जगजीत सिंह का निधन हो गया था।