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गुरु दत्त ने बदल दी थी जॉनी वॉकर की किस्मत, फिल्मों में आने से पहले करते थे मजदूरी
Sun, 11 Nov 2018 07:47 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 11 Nov 2018 07:47 AM IST
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Johnny Walker
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50 और 60 के दशक के एक्टर जॉनी वॉकर ने हिंदी सिनेमा में कई ऐसे किरदारों को पर्दे पर निभाया जो आज भी दर्शकों को गुदगुदाते हैं। जॉनी वॉकर का जन्म 11 नवंबर 1926 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके जन्मदिन के मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें।
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जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन था। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जॉनी वॉकर का बचपन बेहद कठिनाइयों के बीच बीता। जॉनी वॉकर के पिता इंदौर में एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे। घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए जॉनी वॉकर भी अपने पिता के काम में हाथ बंटाते थे। फैक्ट्री के बंद होने के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया।
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10 भाई-बहनों में जॉनी वॉकर दूसरे नंबर पर थे। पिता की मदद के लिए जॉनी वॉकर उनकी मदद के लिए आगे आए। काफी कोशिशों के बाद जॉनी वॉकर को उनके पिता के जानने वाले पुलिस इंस्पेक्टर की सिफारिश पर बस कंडक्टर की नौकरी मिल गई, जिसके बदले में उन्हें 26 रुपये हर महीने मिलते थे।
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जॉनी वॉकर कमाने लगे थे इसके साथ ही वो मुंबई भी घूमते थे। एक दिन उनकी मुलाकात डायरेक्टर के. आसिफ के सचिव रफीक से हुई। जॉनी वॉकर के कई बार गुजारिश के बाद फिल्म आखिरी पैमाने में एक छोटा सा रोल मिला। उस रोल के लिए जॉनी वॉकर को 80 रुपये मिले। इसी दौरान बलराज साहनी की नजर उन पर पड़ी।
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बलराज साहनी ने जॉनी वॉकर को गुरु दत्त से मिलने की सलाह दी। गुरु दत्त के सामने उन्होंने शराबी की एक्टिंग की, जिसे देखकर गुरु दत्त को लगा कि उन्होंने वाकई शराब पी रखी है। गुरु दत्त पहले तो बहुत नाराज हुए कि उन्होंने शराब पी रखी है लेकिन बाद में जब उन्हें पता चला तो जॉनी को गले लगा लिया। गुरु दत्त ने ही उन्हें एक लोकप्रिय व्हिस्की ब्रांड के नाम पर यह नाम दिया था। जबकि असल जिंदगी में वो बिल्कुल भी शराब नहीं पीते थे।
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