साल भर से कुछ ही महीने ज्यादा की रही होंगी रीवा अरोड़ा जब उन्होंने नामचीन निर्देशक इम्तियाज अली और उनसे भी ज्यादा नामचीन अभिनेता रणबीर कपूर के साथ फिल्म ‘रॉकस्टार’ से हिंदी सिनेमा में अपना डेब्यू किया। रीवा ने एक्टिंग सीधे फिल्मों की शूटिंग लोकेशन पर ही सीखी है, उनका कोई कोच नहीं है। वह जो कुछ कैमरे के सामने करती हैं, वह उनका नैसर्गिक अभिनय ही है। वह कहती हैं, ‘मैं शुरू से एक्टर ही बनना चाहती थी। मुझे अच्छा लगा कि लोगो ने मेरे अभिनय को नोटिस किया और अब मुझे लोग मेरे नाम से पहचानने लगे हैं।’
Kaali Khuhi: शहरों के लाड में पली बच्ची पहुंचीं गांव, हाथ में रस्सी, पीछे पीछे भैंस और फिर हुआ ये...
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दिल्ली में पैदा हुईं रीवा अरोड़ा को इसके बाद बड़ी शोहरत मिली धारावाहिक ‘पापा मेरे हीरो हीरालाल’ से। मां निशा अरोड़ा ने वकालत के अपने पेशे से समय निकाला और रीवा को उन सब जगहों पर लेकर गईं, जहां उनकी प्रतिभा को पहचाना जा सकता था। जल्द ही रीवा को बच्चों के उत्पादों की मॉडलिंग के ऑफर मिलने लगे। तमाम टीवी कमर्शियल फिल्मों और प्रिंट के विज्ञापनों में रीवा दिख चुकी हैं और इसमें उनका बड़ा नाम भी है। बीते शुक्रवार को ओटीटी पर रिलीज हुई फिल्म ‘काली खुही’ में रीवा के काम की भी चर्चा इन दिनों हो रही है।
हॉरर फिल्मों में बच्चों की मौजूदगी को हिंदी सिनेमा में निर्माता निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने ही अच्छे से पर्दे पर प्रस्तुत किया। फिल्म ‘काली खुही’ से फिल्म निर्देशन में उतरी टेरी समुंद्रा ने अपनी पहली ही फिल्म में हॉरर का ये समीकरण बनाया है। लेकिन रीवा को असल जिंदगी में किसी से डर नहीं लगता। वह कहती हैं, ‘मैं किसी से नहीं डरती। हां, अकेली होती हूं तो थोड़ा डर लगता है। मुझे अकेले रहना अच्छा नहीं लगता। बाकी मैं किसी से भी मुकाबला कर सकती हूं।’
रीवा के बारे में उनकी साथी कलाकार शबाना आजमी बताती हैं कि वह अकेले में आलिया भट्ट की फिल्में खूब देखती हैं। लेकिन खुद रीवा को इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहना ठीक नहीं लगता। उनकी पसंदीदा स्टार के बारे में वह बहुत नपा तुला जवाब देती हैं, ‘मुझे सबकी एक्टिंग अच्छी लगती है। मैं सब हीरोइनों की फिल्म देखती हूं।’ किसी एक हीरोइन का नाम लेने के लिए कहने पर भी वह इससे बचती हैं।
शहरी माहौल में पली बढ़ी रीवा को फिल्म ‘काली खुही’ की शूटिंग के दौरान हुए अनुभव अब तक नहीं भूले हैं। बारिश में भीगते हुए शूटिंग करना, भैंस को पुचकारना और गांव में यहां वहां भागना ये सब उनके लिए आसान नहीं रहा। लेकिन सबसे कठिन सीन फिल्म का रहा उनका क्लाइमेक्स में भैंस की रस्सी पकड़कर चलना। रीवा कहती हैं, ‘लास्ट वाले सीन में जब मुझे भैंस को लेकर चलना पड़ रहा था तो बहुत डर लग रहा था। जैसे ही सीन कट हुआ तो मैं रस्सी वहीं छोड़कर फ्रेम से रॉकेट की तरह निकल गई।’
रीवा अरोड़ा के इस इंटरव्यू का वीडियो आप यहां देख सकते हैं:
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