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Ketan Anand Interview: कांग्रेस ने इसलिए लगाई देव आनंद पर पाबंदी, शेखर कपूर की फिल्म ‘पानी’ के डीएनए का खुलासा

Wed, 13 Dec 2023 09:40 AM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Wed, 13 Dec 2023 09:40 AM IST
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Ketan Anand Exclusive Interview with Amar Ujala Neecha Nagar Kishore Kumar Dev Anand Series Haqeeqat sequel
केतन आनंद - फोटो : अमर उजाला

चेतन आनंद, विजय आनंद और देव आनंद। तीनों भाइयों ने हिंदी सिनेमा का ऐसे नगीने दिए हैं, जिनकी चर्चा आज भी होती है। चेतन आनंद के बेटे केतन कहते हैं कि इन फिल्मों में से देव साहब की किसी भी फिल्म का रीमेक नहीं बन सकता। और न ही बनाना चाहिए। केतन आनंद फिर से सक्रिय हो रहे हैं। कैमरे के सामने और कैमरे के पीछे लंबा समय बिता चुके केतन आनंद की मंशा अपने चाचा देव आनंद के जीवन पर एक वेब सीरीज बनाने की भी है। इसके अलावा वह अपने पिता चेतन आनंद की कालजयी फिल्म ‘हकीकत’ का सीक्वल भी बनाना चाहते हैं। केतन आनंद से से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।

Ketan Anand Exclusive Interview with Amar Ujala Neecha Nagar Kishore Kumar Dev Anand Series Haqeeqat sequel
केतन आनंद, विजय आनंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्मी पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के लिए इंडस्ट्री में करियर बनाना कितना सहज होता है और आगे किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

एक तरह से इतने बड़े परिवार में पैदा होना वरदान होता है। लेकिन वरदान  के साथ उसकी परछाई भी आती है। हम लोगों को उस परछाई को पार करके अपनी रोशनी चमकानी पड़ती है। जब तक  परिवार के लोग जिंदा हैं तब तक आप उनके उजाले में रहते हैं। लेकिन उसके बाद अपना रास्ता बनाना बहुत बड़ी बात हो जाती है। मैंने विजय आनंद जी के लिए फिल्म 'हम रहे ना रहे हम' की थी। फिल्म अच्छी बनी थी, लेकिन रिलीज ठीक से नहीं हो पाई। परिवार से अलग एक फिल्म 'शर्त' बनाई थी वहां से मेरी अलग पहचान बनी। फिर गुलशन कुमार जी के लिए 'आजा मेरी जान' बनाई जिसमें उन्होंने अपने भाई किशन कुमार को लांच किया। उसके बाद मैंने पिताजी के साथ मिलकर धारावाहिक 'परमवीर चक्र' बनाया। इस धारावाहिक में हमारा पूरा परिवार शामिल था। सात एपिसोड का निर्देशन मैंने, सात एपिसोड का निर्देशन डैडी और एक एपिसोड का निर्देशन विजय आनंद साहब ने किया था। मेरे छोटे भाई विवेक आनंद इस धारावाहिक के कैमरामैन थे। दूरदर्शन पर यह सीरियल खूब चला।

Ketan Anand Exclusive Interview with Amar Ujala Neecha Nagar Kishore Kumar Dev Anand Series Haqeeqat sequel
देव आनंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आप अभिनय में भी सक्रिय रहे हैं, कब लगा अभिनय नहीं बल्कि कमरे के पीछे रहकर सिनेमा की विरासत को आगे बढ़ाना है?

हमारी पूरी फैमिली में यह बात रही है कि कुछ अलग करना है। देव साहब हर तरह की फिल्में करते थे। मुझे तो शुरू से ही निर्देशक ही बनना था। देव साहब की फिल्म 'तेरे मेरे सपने' में सहायक तौर पर जुड़ा। देव साहब ने पुछा कि क्या बनना चाहते हो, मैंने कहा कि मुझे तो डायरेक्टर बनना है। देव साहब  बोले कि अगर डायरेक्टर बनाना है तो यह पता होना चाहिए कि कैमरे के सामने क्या होता है, मेरे साथ एक्टिंग करो। उन्होंने मुझे 'हरे रामा हरे कृष्णा'  में एक छोटा सा रोल दिया। मैंने सभी काम किए। देव साहब से अभिनय की बारीकी और निर्देशन, गोल्डी साहब के साथ एडिटिंग, डैडी से पोस्ट प्रोडक्शन सीखा।  प्रोफेशनल तौर पर 'हीर रांझा' मेरी पहली फिल्म थी जिसमे एसोसिएट प्रोड्यूसर और असिस्टेंट डायरेक्टर था। उसमें मैंने प्रोडक्शन का भी काम किया और निर्देशन भी सीखा।

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Ketan Anand Exclusive Interview with Amar Ujala Neecha Nagar Kishore Kumar Dev Anand Series Haqeeqat sequel
देव आनंद, विजय आनंद, चेतन आनंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बचपन में आपको कब लगा कि आपका परिवार फिल्मों में सक्रिय है और देव आनंद साहब बहुत बड़े सुपरस्टार हैं?

मेरे लिए यह कह पाना बहुत मुश्किल है। देव साहब तो हमारे चाचा थे। वह मुझे प्यार से घुसा गाय कहकर बुलाते थे। जब मैं बड़ा हुआ और उनकी फिल्म 'तेरे मेरे सपने' में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया तब मुझे अहसास हुआ कि मेरे चाचा बहुत बाद स्टार हैं। जिस तरह से लोग उनसे मिलते थे, लोगो का उनके प्रति दीवानगी देखकर मुझे पता चला कि मेरे चाचा बहुत बड़े स्टार हैं। पहली बार शूटिंग के दौरान उनकी ऊर्जा देखकर तो उसने काफी प्रभवित हुआ। 

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Ketan Anand Exclusive Interview with Amar Ujala Neecha Nagar Kishore Kumar Dev Anand Series Haqeeqat sequel
देव आनंद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहली फिल्म देव आनंद साहब की कौन सी देखी?

याद नहीं आ रहा, क्योंकि हम सिनेमा देखते ही रहते थे। लेकिन यह कभी अहसास ही नहीं होता था कि हमारे चाचा इतने बड़े स्टार हैं। हमें ऐसा महसूस होता था कि चाचा बहुत अच्छे आदमी हैं हमेशा खुश रहते हैं और हमारे साथ खेलते रहते हैं। जब उनके साथ काम करना शुरू किया तब समझ में आया कि उनके अंदर काम के प्रति कितनी ऊर्जा है। आज मुझे 55 साल इंडस्ट्री में हो गए। देव साहब जैसी एनर्जी किसी के अंदर नहीं देखी। अंतिम समय तक उनके अंदर वहीं एनर्जी बरकरार रही।

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