टीवी इंडस्ट्री में 80-90 के दशक की मशहूर अदाकारा किटू गिडवानी दूरदर्शन के बेहद लोकप्रिय धारावाहिकों ‘शक्तिमान’ और ‘स्वाभिमान’ के लिए जानी जाती हैं। सिर्फ यही नहीं किटू ने ‘अर्थ’ जैसी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा है। अब वह एक बार फिर से सोनी टीवी के धारावाहिक में एक महारानी के किरदार से वापसी कर रही हैं। किटू से एक खास बातचीत।
Kitu Gidwani: मैं कहां गलत जगह पर आकर फंस गई हूं, किटू ने सुनाए अपने अवसाद के किस्से और बताया यूं हासिल की जीत
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धारावाहिक ‘हम रहें ना रहें हम’ में आप रानी के किरदार में हैं, क्या है ये कहानी?
ये एक राजघराने की कहानी है जिसमें मेरा किरदार रानी मां का हैं वह एक पारंपरिक महिला हैं। अपनी परंपराओं से बहुत ही जुड़ी हुई है और अपने बच्चों को भी वही संस्कार दिए हैं। उसने पूरे महल को और अपने बच्चों को अकेले पाला है और इसके लिए उसको सख्त भी रहना पड़ता है। तो जैसी वो हैं उसी तरह उन्होंने अपने बच्चों को भी तहजीब और खानदानी अंदाज सिखाया है।
इस किरदार को अपनाने के लिए और एक रानी की तरह महसूस करने का वो क्या प्रोसेस था?
मेहनत तो अभी जारी है। बहुत सारे शब्द हैं जो अभी भी जबान पर ठीक से नहीं आते हैं। कई बार मुझे शब्द बोलने के बाद उसका मतलब पूछना पड़ता है लेकिन मुझे सीखना बहुत पसंद है और मैं सीखने से कभी पीछे नहीं हटती हूं। और अगर कोई भाषा सीखना तो आपको इंसान के तौर पर और अमीर बनाता है तो मैं सिखने को लेकर उत्सुक रहती हूं। और यही प्रोसेस होता है मेरा काम में।
शो में जय, टीना और बाकी लोगों के साथ कैसा रिश्ता बना?
जब हम पहले दिन मिले तभी हमने एक वाइब शेयर की और वाइब मिल जाए तो बॉन्डिंग भी बन ही जाती है। हम एक साथ हसी- मजाक करते हैं, एक साथ खाते हैं और काम भी साथ ही करते हैं। भले ही मैं बड़ी हूं लेकिन कोई भी चीज अगर मुझे नहीं समझ में आई तो तो बेझिझक पूछ लेती फिर चाहे वो जय हो, टीना हो या कोई भी और ऐक्टर्स हों। ओवरऑल बहुत मजा आ रहा है साथ मिल कर काम करने में।
मुंबई से इतनी दूर उमरगांव में आकर शूटिंग करना कितना चैलेंजिंग होता है?
फिलहाल तो अच्छा लग रहा है। मैं कई बार अपनी मां को याद करती हूं, अपने दोस्तों और परिवार वालों को याद करती हूं लेकिन मुझे काम अच्छा लग रहा है तो वहां बैलेंस हो जाता है। मुझे लगता है मुंबई में डेली सोप करना मुश्किल है क्योंकि आपका आधा समय तो ट्रैफिक और ट्रैवलिंग में ही चला जाता है। तो मुझे वहां शूटिंग करने से बेहतर ये लगा क्योंकि यहां कम से कम आपको सोने का तो अच्छे से समय मिलता है।