लकी अली...अगर आपके सामने अचानक कोई ये नाम ले तो आप इस शख्स को शायद पहचान ही नहीं पाएंगे। लकी अली ने जानबूझकर अपनी इस गुमनाम पहचान को विकसित किया है। कॉमेडियन महमूद अली के इस बेटे ने खानाबदोश बैरागी की तरह जीवन जीया। भले ही लोग इनके नाम से परचित न हों लेकिन उनकी खनकती आवाज और खूबसूरत गाने आपके कानों में जरूर पड़े होंगे।
लाइमलाइट से दूर रहकर महमूद के इस बेटे ने किया कमाल, पिता से इसलिए रिश्ते रहे खराब
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लकी अली का जन्म 19 सितंबर 1958 को मुंबई में हुआ था। कहा जाता है कि पिता महमूद के साथ उनके संबंध कुछ खास नहीं थे। फिल्मी परिवार के ताल्लुक रखने के बाद भी लकी ने कभी इस बात का घमंड नहीं किया। 60-70 के दशक में महमूद हिंदी सिनेमा की जान हुआ करते थे। व्यस्तता के चलते उनका समय परिवार के साथ कम और सेट पर ज्यादा बीता करता था।
एक बार, चार साल की उम्र में जब लकी अली पहली बार बोर्डिंग स्कूल से लौटे, तो महमूद और पूरा परिवार 10 महीने बाद उनको एयरपोर्ट पर लेने पहुंचा। उस दौरान अली ने अपने पिता को नहीं पहचाना, लेकिन उन्हें देखते ही कहा, 'अरे यह तो कॉमेडियन महमूद हैं।' अली देहरादून के एक बोर्डिंग स्कूल में अपने परिवार से दूर रहते थे।
साल 1996 में लकी ने अपनी पहली एलबम 'सुनो' रिलीज की। इस एलबम को लोगों ने बहुत पसंद किया और इसमें काम करने वाली अभिनेत्री मीघन से लकी ने पहली शादी रचाई। हालांकि दोनों का रिश्ता लंबा नहीं टिक सका। लकी ने दूसरी शादी इनाया से की। इनाया और लकी के भी दो बच्चे हुए। इनाया से तलाक के बाद लकी ने साल 2010 में 52 साल की उम्र में ब्रिटिश की ब्यूटी क्वीन केट एलिजाबेथ से शादी की। लेकिन तीसरी पत्नी से भी उनका तलाक हो गया।
लकी ने बचपन से ही फिल्मों में काम किया लेकिन उनकी रुचि संगीत में ज्यादा रही। संगीत की विशेष शैली और खनकती आवाज में लकी ने बहुत गाने दिए हालांकि लाइमलाइट से उन्होंने हमेशा दूरी बनाकर रखी। इक पल का जीना, अंजाना अंजानी, कभी ऐसा लगता है, ना तुम जानो न हम, आ भी जा जैसे खूबसूरत गाने गाकर लकी ने संगीत को नई दिशा दी।
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