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क्या सच में संजय दत्त की बायोपिक से अपना रोल हटाने के लिए माधुरी ने किया था फोन, खुद किया खुलासा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 26 May 2018 09:40 AM IST
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Madhuri Dixit
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कभी धक धक गर्ल कही जाने वाली माधुरी दीक्षित गुजरे दशक में फिल्मों में कम दिखीं पर उनका क्रेज बरकरार है। 35 बरस के करिअर में वह पहली बार मराठी फिल्म 'बकेट लिस्ट' कर रही हैं जिसमें गृहिणी बनी हैं। इसके बाद माधुरी बॉलीवुड फिल्म 'टोटल धमाल' और 'कलंक' में दिखेंगी। निजी जिंदगी के साथ परदे पर गृहिणी की भूमिका और फिल्मों को लेकर माधुरी दीक्षित ने रवि बुले से विशेष बात की।
Bucket List
आपकी फिल्म में 'बकेट लिस्ट' का मतलब है वे अधूरी इच्छाएं जिन्हें पूरा करने की कामना शेष हो। स्टारडम की जिस ऊंचाई पर आप हैं क्या वहां कोई बकेट लिस्ट बाकी होती है?
हां होती है ना! जिंदगी में इच्छाएं,आकांक्षाएं कभी पूरी नहीं होतीं। यह जरूर है कि स्टारडम छूने के बाद कोई बहुत बड़ी इच्छा कि चांद पर जाना है जैसी नहीं बची। लेकिन छोटी-छोटी इच्छाएं होती हैं। हर इंसान में इच्छाएं बाकी होनी चाहिए क्योंकि इनके होने पर एक उत्सुकता बनी रहती है। इन्हें पूरा करने लिए आप संघर्ष करते हैं। जब इच्छा पूरी होती तो उससे जिंदगी में खुशी मिलती है।
हां होती है ना! जिंदगी में इच्छाएं,आकांक्षाएं कभी पूरी नहीं होतीं। यह जरूर है कि स्टारडम छूने के बाद कोई बहुत बड़ी इच्छा कि चांद पर जाना है जैसी नहीं बची। लेकिन छोटी-छोटी इच्छाएं होती हैं। हर इंसान में इच्छाएं बाकी होनी चाहिए क्योंकि इनके होने पर एक उत्सुकता बनी रहती है। इन्हें पूरा करने लिए आप संघर्ष करते हैं। जब इच्छा पूरी होती तो उससे जिंदगी में खुशी मिलती है।
madhuri dixit
आपकी कौन सी इच्छा अभी बाकी है?
मेरी एक बहुत बड़ी इच्छा थी मराठी फिल्म करने की वो 'बकेट लिस्ट' के साथ पूरी हो गई। मुझे फिल्म प्रोड्यूसर बनना था तो मैं मराठी फिल्म बना रही हूं जिसका नाम है '15 अगस्त'। वैसे मेरी लिस्ट बढ़ती जाती है। बदलती जाती है। इससे जिंदगी में स्पार्क बना रहता है।
मेरी एक बहुत बड़ी इच्छा थी मराठी फिल्म करने की वो 'बकेट लिस्ट' के साथ पूरी हो गई। मुझे फिल्म प्रोड्यूसर बनना था तो मैं मराठी फिल्म बना रही हूं जिसका नाम है '15 अगस्त'। वैसे मेरी लिस्ट बढ़ती जाती है। बदलती जाती है। इससे जिंदगी में स्पार्क बना रहता है।
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anil madhuri
आपने निजी जिंदगी में भी गृहिणी के रूप में एक लंबा अर्सा गुजारा। गृहिणी की भूमिका में वे कौन सी बातें हैं जो आम तौर पर घर के अन्य लोग या पुरुष नहीं समझ पाते?
सबसे पहले तो यही कि गृहिणी की भी इच्छाएं हैं। उसका भी व्यक्तित्व है, निजता है। गृहिणी को लोग हल्के ढंग से लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि इसका तो कुछ नहीं है सब हमारे लिए तो करती है। इसकी कोई इच्छा नहीं। नखरे तो सिर्फ हमारे हैं वह तो बेचारी गाय है। जब वह अपनी जिद दिखाती है और कुछ करने की ठानती है तभी उसके लिए चीजें बदलती हैं। उसका सम्मान बढ़ता है।
सबसे पहले तो यही कि गृहिणी की भी इच्छाएं हैं। उसका भी व्यक्तित्व है, निजता है। गृहिणी को लोग हल्के ढंग से लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि इसका तो कुछ नहीं है सब हमारे लिए तो करती है। इसकी कोई इच्छा नहीं। नखरे तो सिर्फ हमारे हैं वह तो बेचारी गाय है। जब वह अपनी जिद दिखाती है और कुछ करने की ठानती है तभी उसके लिए चीजें बदलती हैं। उसका सम्मान बढ़ता है।
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माधुरी दीक्षित
लंबे समय तक आप अमेरिका में रहीं और भारत लौटने के बाद फिल्मों में कम टीवी पर ज्यादा दिखीं। क्या वजह रही?
फिल्में तो मैंने की हैं 'आ जा नचले', 2007 में 'डेढ़ इश्किया' और 'गुलाब गैंग'। टीवी पर क्या होता है कि जब किसी शो पर आ जाते हैं तो उसके सीजन बनने लगते हैं इससे वहां आप निरंतर साल दर साल दिखने लगते हैं। ऐसा नहीं था कि मुझे टीवी ही करना था और फिल्में नहीं करनी थी। जैसा मुझे सुविधाजनक लगता गया मैं करती गईं।
फिल्में तो मैंने की हैं 'आ जा नचले', 2007 में 'डेढ़ इश्किया' और 'गुलाब गैंग'। टीवी पर क्या होता है कि जब किसी शो पर आ जाते हैं तो उसके सीजन बनने लगते हैं इससे वहां आप निरंतर साल दर साल दिखने लगते हैं। ऐसा नहीं था कि मुझे टीवी ही करना था और फिल्में नहीं करनी थी। जैसा मुझे सुविधाजनक लगता गया मैं करती गईं।