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‘महाभारत’ बनाने वाले बी आर चोपड़ा की जिंदगी की ये है असली महाभारत, जीते तो बने ये 10 शानदार शाहकार

Wed, 22 Apr 2020 12:46 AM IST
Mishra Mishra अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: Mishra Mishra Updated Wed, 22 Apr 2020 12:46 AM IST
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mahabharat director Baldev Raj Chopra birthday special know his top ten bollywood films
BR Chopra - फोटो : Social Media

बी आर चोपड़ा का पूरा नाम है बलदेव राज चोपड़ा। 22 अप्रैल 1914 को जन्मे बी आर चोपड़ा ने अपने छोटे भाई यश चोपड़ा और बेटे रवि चोपड़ा को भी फिल्मों के गुर सिखाए। फिल्म 'अफसाना' से अपने फिल्मी अफसाने की शुरूआत करने वाले बी आर चोपड़ा की आखिरी फिल्म रही 'भूतनाथ'। भारत सरकार ने उन्हें 1998 में सिनेमा के सबसे बड़े राष्ट्रीय सम्मान दादा साहेब फाल्के से सम्मानित किया। यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति देते हैं। पत्रकारिता से शुरूआत करने वाले बी आर चोपड़ा का बचपन लाहौर में बीता। उनकी कथा थोड़े में समेट पाना मुश्किल है, फिर भी कोशिश करते हैं उनके करियर के 10 अहम पड़ावों की जानकारी आपको देने की।

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नया दौर - फोटो : Social Media

नया दौर (1957)
1957 में रिलीज हुई ये एक क्लासिक फिल्म है। ब्लैक एंड व्हाइट में बनी इस फिल्म को बाद में बी आर फिल्म्स ने रंगीन करके भी रिलीज किया। औद्योगीकरण के असर पर बनी इस फिल्म में दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला, अजीत और जीवन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए।  फिल्म की कहानी एक तांगे वाले की कहानी है जो मोटर गाड़ी आ जाने के बाद खुद को असहाय मानने लगता है। और, फिर एक दिन मशीन को हराने का फैसला कर लेता है।

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साधना - फोटो : Social Media

साधना (1958)
यह फिल्म 1958 में रिलीज हुई थी जो वेश्वावृत्ति के संवेदनशील विषय और उनके पुनर्वास पर आधारित है। 50 के दशक में इस तरह के विषय पर एक फिल्म बनाना एक साहसी कदम था। बी आर चोपड़ा की इस फिल्म की समीक्षकों ने काफी तारीख की। साधना में एक वेश्या के तौर पर वैजयंतीमाला और प्रोफेसर की भूमिका में सुनील दत्त नजर आए। यह फिल्म समाज के विचारों पर भी सवालिया निशान खड़े करती है।  इस फिल्म को बीआर चोपड़ा की श्रेष्ठ फिल्मों में एक माना जाता है।

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कानून - फोटो : Social Media

कानून (1960)
कानून हिंदी सिनेमा जगत की पहली फिल्म बनी जो बिना किसी गाने की बनी थ्रिलर फिल्म थी। फिल्म में राजेन्द्र कुमार और अशोक कुमार मुख्य किरदारों में नजर आए। फिल्म की कहानी एक कत्ल के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के तेज तर्रार डायलॉग्स आज भी लोगों के जुबान पर है। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया। वहीं दिग्गज अभिनेता नाना पलसीकर को सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार हासिल हुआ।

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गुमराह - फोटो : Social Media

गुमराह (1963)
बी आर चोपड़ा के कमाल की यह एक और थ्रिलर फिल्म थी। फिल्म में सुनील दत्त और अशोक कुमार मुख्य भूमिका में नजर आए। बीआर चोपड़ा ने फिल्म के विषय और कहानी को फिल्माते समय इस बात का खास ख्याल रखा कि यह फिल्म किसी भी तरह से महिलाओं पर दोषारोपण करती हुई न दिखे। इस फिल्म को उस दौर से आगे की फिल्म करार दी गई थी। इस फिल्म में एक बेहतरीन गाना भी है जिसे साहिर लुधियानवी ने लिखा था वहीं इस गाने को महेन्द्र कपूर ने गाया था। गाने के बोल थे 'चलो एक बार फिर से'।

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