अपनी मूल भाषा तमिल में गणेश चतुर्थी के दिन और हिंदी में अनंत चतुर्दशी के दिन रिलीज हुई अभिनेता विशाल और एस जे सूर्या अभिनीत फिल्म ‘मार्क एंटनी’ को सेंसर सर्टिफिकेट दिए जाने के एवज में कथित रूप से लाखों रुपये की रिश्वत लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया। फिल्म निर्माताओं की सबसे बड़ी संस्था इम्पा (इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन) और फिल्म निर्देशकों की संस्था इफ्टडा (इंडियन फिल्म एंड टीवी डायरेक्टर्स एसोसिएशन) ने शुक्रवार को इस मामले की गहराई से जांच कराए जाने की मांग की है।
Mark Antony Bribe Case: रिश्वत मामले में सेंसर बोर्ड के खिलाफ मोर्चा, प्रसून जोशी को इम्पा और इफ्टडा के पत्र
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फिल्म ‘मार्क एंटनी’ जब 15 सितंबर को तमिल में रिलीज हुई थी, तभी से इस फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर गहमागहमी चलती रही है। फिल्म को सोशल मीडिया पर हिंदी भाषी राज्यों से भी अच्छी प्रतिक्रिया मिलने पर इसे अनंत चतुर्दशी के दिन हिंदी में भी रिलीज करने का इसके निर्माताओं ने फैसला लिया। जानकारी के मुताबिक फिल्म के निर्माताओं की तरफ से फिल्म की डबिंग कराने के बाद इसके लिए जरूरी सभी कागजात और आवेदन पत्र केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में समय रहते जमा कर दिए गए थे।
किसी भी फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट दिए जाने के लिए निर्माता को एक तयशुदा राशि के साथ फिल्म की कॉपी, इसके पोस्टर और प्रचार सामग्री के साथ फिल्म की पूरी स्क्रीन स्क्रिप्ट (जैसा परदे पर दिख रहा है) जमा करानी होती है। इसके बाद बोर्ड के सदस्यों में से बनी समिति इसे देखती है और फिल्म की सामग्री के अनुसार इसे यू, ए या यूए सर्टिफिकेट जारी करने की संस्तुति करती है। फिल्म के मुख्य कलाकार विशाल ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर ये आरोप लगाया कि इस फिल्म का हिंदी संस्करण तय तारीख पर तब जाकर रिलीज हो सका जब इसके लिए रिश्वत देकर सेंसर सर्टिफिकेट हासिल किया जा सका।
विशाल ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय पर आरोप लगाया कि फिल्म ‘मार्क एंटनी’ के हिंदी संस्करण को सेंसर सर्टिफिकेट देने के लिए दो बार में रिश्वत ली गई। पहली बार फिल्म की स्क्रीनिंग कराने के लिए और बाद में सर्टिफिकेट जारी करने के लिए। विशाल का ये वीडियो गुरुवार को दिन भर वायरल होता रहा लेकिन इस पर अभी तक सेंसर बोर्ड के मुंबई कार्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रवींद्र भाकर की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हां, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपनी तरफ से इसकी जांच शुरू कर दी है।
सेंसर बोर्ड के मुंबई कार्यालय पर आरोप पहले भी लगते रहे हैं औऱ इसके सीईओ के अपने पूर्व कार्यस्थल पर काम करते रहे ठेकेदारों को भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के आयोजनों का ठेका देने पर भी विवाद खड़ा हो चुका है। इसी के बाद उनका कार्य सिर्फ सेंसर बोर्ड तक सीमित कर दिया गया था। अब ताजा विवाद के बाद उन पर अंगुलियां फिर उठ रही हैं। इस बारे में इम्पा ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को पत्र लिखकर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दे दी है।