कब किस फिल्म में कौन सा किरदार लोगों के जेहन में अटककर रह जाए, अच्छे से अच्छे निर्देशकों को भी इसका पता नहीं होता। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘यारियां 2’ के साथ भी ऐसा ही हुआ है। इस फिल्म में लाडली का लीड किरदार करने वाली अभिनेत्री दिव्या खोसला कुमार का अभिनय इन दिनों हिंदी फिल्म जगत के कलाकारों और कथाकारों के बीच चर्चा का विषय है और दिलचस्प ये है कि कथा लेखक अब इस किरदार का संदर्भ बिंदु के रूप में भी प्रयोग कर रहे हैं।
Divya Khosla Laadli: बड़े परदे की लाडली बनते ही बदली दिव्या खोसला की इमेज, हिंदी फिल्म जगत का बनीं नया संदर्भ
फिल्म ‘यारियां 2’ शुरू तो दो भाइयों और उनकी लाडली बहन की कहानी के रूप में होती है लेकिन इंटरवल के बाद ये फिल्म एक लाडली बिटिया के एक लाडली बीवी में तब्दील हो जाने की कहानी बन जाती है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिनेमाघरों में बिना किसी खास प्रचार प्रसार के रिलीज हुई राधिका राव और विनय सप्रू निर्देशित फिल्म ‘यारियां 2’ में दिव्या खोसला ने एक ऐसी बेटी का किरदार निभाया है जो अपनी मां के कहने पर एक ऐसे युवक से शादी कर लेती है जो अभी तक अपने पिछले प्रेम को भुला नहीं पाया है। फिल्म शुरू तो दो भाइयों और उनकी लाडली बहन की कहानी के रूप में होती है लेकिन इंटरवल के बाद ये फिल्म एक लाडली बिटिया के एक लाडली बीवी में तब्दील हो जाने की कहानी बन जाती है।
मुंबई पुलिस के एक्शन के बाद वाहेगुरू की शरण में पहुंचीं उर्फी
फिल्म कथा और पटकथा लेखक अमर नाथ झा कहते हैं, ‘फिल्म ‘यारियां 2’ की जो मूल कहानी है वह एक बेटी के बहू बनने और उसके बाद अपने पति की खुशी के लिए बिल्कुल अनदेखा और अनसुना प्रयत्न करने की कहानी है। इस फिल्म का प्रचार अगर इस एक लाइन को आगे रखकर किया गया होता और फिल्म के पोस्टर व ट्रेलर में भी यही भावना उभरकर सामने आई होती तो पारिवारिक दर्शकों के लिए ये फिल्म एक बड़ी फिल्म बन सकती थी। दिव्या खोसला कुमार ने इस फिल्म में जो अभिनय किया है, वह उनकी समकालीन तमाम अभिनेत्रियों से कहीं बेहतर है।’
Sam Bahadur: हर शॉट से पहले पत्नी कटरीना को कॉल करते थे विक्की कौशल, बताया किरदार के लिए ऐसे की तैयारी
इस फिल्म में दिव्या के किरदार लाडली की सामाजिक पृष्ठभूमि और सामाजिक सोच को बदलने के लिए पड़ सकने वाले प्रभाव को भी अमर नजरअंदाज नहीं करते हैं। वह कहते हैं, ‘दिव्या खोसला कुमार ने इस किरदार के जरिये सामाजिक सोच को बदलने का वाकई बड़ा काम किया है। आश्चर्य इस बात का है कि इस धागे की तरफ अधिकतर फिल्म समीक्षकों का भी ध्यान गया नहीं। ये एक तरह से भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही मित्रता के सूत्र ‘तत् सुखे त्वम्’ का जीता जागता उदाहरण है। दक्षिण में भी फिल्म की ये कहानी ‘बैंगलोर डेज’ के नाम से बन चुकी है और वहां ये हिट भी रही। दर्शकों के शैक्षिक स्तर का भी किसी फिल्म की सफलता-विफलता पर असर पड़ता है, ये बात भी इस फिल्म के परिणामों से जाहिर होती है।’
दिव्या खोसला कुमार इस बारे में चर्चा चलने पर कहती हैं, ‘फिल्म ‘यारियां 2’ में मेरे चरित्र को लेकर मुझे बहुत सारे संदेश मिले और अधिकतर संदेश लाडली के किरदार के प्रयत्नों की प्रशंसा से ही जुड़े हैं। मैं अपने निर्देशकों राधिका राव और विनय सप्रू की बहुत आभारी हैं कि उन्होंने इस किरदार की आत्मा को जीवंत रूप में फिल्म में प्रस्तुत करने में बहुत मेहनत की। मैं निर्देशक की अभिनेत्री हूं और आगे भी इस तरह के किरदार मिलने की आशा करती हूं।’
Swara Bhasker: दिवाली पार्टी में शामिल होने को लेकर लालायित हैं स्वरा भास्कर, इस कारण नहीं हो पाईं शामिल