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Mohammed Rafi: जब मौत से पहले अपराधी ने जाहिर की थी रफी के इस गाने को सुनने की ख्वाहिश, जेल में ऐसे पूरी की गई थी आखिरी इच्छा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Thu, 24 Dec 2020 03:25 PM IST
मोहम्मद रफी आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज के जरिए वह हमेशा उनके चाहने वालों के दिलों में जिंदा रहेंगे। कहा जाता है कि पचास के दशक में जब भी संगीत की कोई महफिल होती थी उसमें मोहम्मद रफी को गाने के लिए बुलाया जाता था। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे सफल गायकों में से एक मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर 1924 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। मोहम्मद रफी के मशहूर के गानों के बारे में तो आप सभी जानते होंगे लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से ऐसे हैं जिसे जानकर आपको खुशी होगी।
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मोहम्मद रफी
- फोटो : ट्विटर
रफी साहब को पहला ब्रेक पंजाबी फिल्म 'गुलबलोच' में मिला था। नौशाद और हुस्नलाल भगतराम ने रफी की प्रतिभा को पहचाना और खय्याम ने फिल्म 'बीवी' में उनसे गीत गवाए। मोहम्मद रफी साहब के बारे में कहा जाता है जब एक स्टेज शो के दौरान बिजली जाने की वजह से उस जमाने के जाने माने गायक केएल सहगल ने गाना गाने से मना कर दिया, तो वहां मौजूद 13 साल के रफी ने स्टेज संभाला और गाना शुरू कर दिया और यहीं से खुली मोहम्मद रफी की किस्मत।
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मोहम्मद रफी
- फोटो : ट्विटर
संगीतकार नौशा मोहम्मद रफी के बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाते थे। एक बार एक अपराधी को फांसी दी जी रही थी। उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने कहा कि वो मरने से पहले रफी का बैजू बावरा फिल्म का गाना 'ऐ दुनिया के रखवाले' सुनना चाहता है। अपराधी की ख्वाहिश पूरी करने के लिए टेप रिकॉर्डर लाया गया और उसके लिए वह गाना बजाया गया।
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मोहम्मद रफी
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शायद आप नहीं जानते होंगे कि इस गाने के लिए मोहम्मद रफी ने 15 दिन तक रियाज किया था और रिकॉर्डिंग के बाद उनकी आवाज इस हद तक टूट गई थी कि कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि रफी शायद कभी अपनी आवाज वापस नहीं पा सकेंगे। इतना ही नहीं 'ओ दुनिया के रखवाले' गाने को गाते समय रफी के गले से खून तक आ गया था।
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मोहम्मद रफी
- फोटो : ट्विटर
बीबीसी के एक लेख के मुताबिक, खय्याम याद करते हैं, "1949 में मेरी उनके साथ पहली गजल रिकॉर्ड हुई जिसे वली साहब ने लिखा था। अकेले में वह घबराते तो होंगे, मिटाके वह मुझको पछताते तो होंगे। रफी साहब की आवाज के क्या कहने! जिस तरह मैंने चाहा उन्होंने उसे गाया। जब ये फिल्म रिलीज हुई तो ये गाना रेज ऑफ द नेशन हो गया।" बैजू-बावरा में प्लेबैक सिंगिंग करने के बाद रफी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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