मशहूर गायक मोहम्मद रफी का गाया गाना 'तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे' उन पर बिल्कुल सटीक बैठता है। वाकई मोहम्मद रफी को कोई नहीं भुला सकता है। भारतीय सिनेमा के ऐसे दिग्गज गायक की आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी है। 24 दिसंबर 1924 को जन्में मोहम्मद रफी की जिंदगी से जुड़ी ये हैं खास बातें।
13 की उम्र में मोहम्मद रफी ने की थी चचेरी बहन से पहली शादी, इस वजह से नहीं लगने दी थी किसी को भनक
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रफी के गानों के दीवाने तो करोड़ों हैं लेकिन उनकी निजी जिंदगी के बारे में कम ही लोगों को पता है। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि मोहम्मद रफी ने दो शादियां की थीं। अपनी पहली शादी की बात उन्होंने सबसे छिपाकर रखी थी। इस शादी के बारे में बस दोनों के घरवाले जानते थे।
इसका खुलासा मोहम्मद रफी की बहू यास्मीन खालिद रफी ने की। यास्मीन ने अपनी किताब 'मोहम्मद रफी मेरे अब्बा..एक संस्मरण' में रफी की पहली शादी का जिक्र किया है। यास्मीन ने किताब में लिखा कि मोहम्मद रफी की पहली शादी 13 साल की उम्र में उनके चाचा की बेटी बशीरा बानो से उनके पैतृक गांव में हुई थी।
यह शादी ज्यादा दिन चली नहीं क्योंकि बशीरा ने रफी के साथ भारत आने से मना कर दिया। भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त दंगों में बशीरा के माता-पिता की मौत हो गई थी। इन दंगों से वो इतनी डर गईं कि उन्होंने भारत में रहने से इनकार कर दिया और लाहौर में ही रुक गईं जबकि रफी अपना करियर आगे बढ़ाने के लिए मुंबई में ही रहे। इस शादी से उनका एक बेटा सईद हुआ था।
1944 में 20 साल की उम्र में रफी की दूसरी शादी सिराजुद्दीन अहमद बारी और तालिमुन्निसा की बेटी बिलकिस के साथ हुई। रफी के घर में उनकी पहली पत्नी का जिक्र नहीं होता था क्योंकि उनकी दूसरी पत्नी बिलकिस बेगम उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। अगर कभी कोई इसकी चर्चा करता भी था तो बिलकिस बेगम और रफी के साले जहीर बारी इसे अफवाह कहकर बात को दबा देते थे। रफी की दूसरी शादी से उनके तीन बेटे खालिद, हामिद, शाहिद और तीन बेटियां परवीन अहमद, नसरीन अहमद, यास्मीन अहमद हुईं। रफी साहब के तीनों बेटों सईद, खालिद और हामिद की मौत हो चुकी है।
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