मशहूर सिंगर मोहित चौहान आज यानी 11 मार्च को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। मोहित आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने बॉलीवुड में खूब नाम कमाया है। उनका जन्म सन् 1966 में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई दिल्ली से की और बाकी पढ़ाई हिमाचल से पूरी की। खास बात यह है कि फिल्मों के गानों में अपने आवाज का जादू चलाने वाले मोहित ने संगीत की कोई ट्रेंनिग नहीं ली है। उन्हें गिटार और बांसुरी बजाने अच्छे से आती है।
Mohit Chauhan: बिना ट्रेनिंग दुनिया पर चलाया आवाज का जादू, जानें हिमाचल का छोरा कैसे बना सिनेमा का 'सिरमौर'
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अपनी आवाज से सबको दीवाना बना लेने वाले मोहित सिंगर नहीं, बल्कि एक्टर बनना चाहते थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें एक्टर बनना था सिंगर नहीं। उन्होंने आगे कहा कि, जिसके लिए उन्होंने थिएटर किया और वह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) का भी हिस्सा रहे। एफटीआईआई में भी जाने की सोची, लेकिन वहां एक्टिंग न होने की वजह से उन्होंने अपना यह फैसला बदल दिया। उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके समय पर एफटीआईआई में एक्टिंग का कोर्स हुआ होता तो आज वह एक एक्टर होते।
मोहित ने 90 के दशक के दौरान अपने दोस्तों के साथ मिलकर एक बैंड बनाया, जिसका नाम उन्होंने सिल्क रूट रखा था। उनके इस बैंड ने डूबा-डूबा गाना गाया था, जिसे लोग आज भी काफी पसंद करते हैं, लेकिन उनका यह बैंड साल 2000 में बंद हो गया। इसके बाद से मोहित अपनी पहचान बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने साल 2005 में आई फिल्म 'मैं, मेरी पत्नी और वो' से बॉलीवुड में कदम रखा था, लेकिन उन्हें पहचान 'रंग दे बसंती' से मिली थी।
इसके बाद उनकी मुलाकात मशहूर सिंगर ए आर रहमान से एक अवॉर्ड शो के समय हुई थी। इसके बाद पांच के लंबे इंतजार के बाद उन्हें ए आर रहमान के गाने ' रंग दे बसंती' गाने का मौका मिला। इस गाने के बाद तो मानों उनकी किस्मत ही खुल गई। उनका यह गाना लोगों को काफी पसंद आया था। इसके बाद वह लोगों के दिलों पर राज करने लगे और एक से बढ़कर बेहतरीन गाने गाए।
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