वक्त के साथ भारतीय सिनेमा की तस्वीर भी अब काफी हद तक बदल चुकी है। पहले के समय में केवल नायकों को खास ध्यान में रखकर फिल्में बनाई जाती थीं, लेकिन 21वीं सदी में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं पर आधारित फिल्में भी बननी शुरू हो चुकी हैं। जॉन अब्राहम और शरवरी वाघ की फिल्म वेदा भी नारी सशक्तिकरण पर आधारित है। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर जारी किया गया था, जिसे देखकर दर्शकों की उत्सुकता काफी ज्यादा बढ़ चुकी है। यह फिल्म स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इस फिल्म की रिलीज से पहले आइए कुछ ऐसी फिल्मों के बारे में आपको बताते हैं, जिनमें महिलाओं की कहानी को बखूबी पर्दे पर पेश करने की कोशिश की गई है।
Vedaa: 'थप्पड़' से लेकर 'पंगा' तक, 'वेदा' से पहले पर्दे पर नजर आ चुके हैं सशक्त महिलाओं के किरदार
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मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में रानी मुखर्जी मुख्य भूमिका में नजर आई थीं। फिल्म में उन्होंने एक ऐसी मां की भूमिका निभाई थी जो अपने बच्चों की कस्टडी के लिए तमाम मुश्किलों से लड़ती है। यह फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित थी, जिसमें रानी ने अपने अभिनय से चार चांद लगा दिए थे।
तापसी पन्नू ने अपने अभिनय करियर में कई शानदार फिल्मों में काम किया है। थप्पड़ भी उन्हीं फिल्मों में से एक है। सामाजिक दबाव के सामने अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ने वाली महिला अमृता सबरवाल की भूमिका में वह काफी ज्यादा प्रभावशाली नजर आई थीं। यह फिल्म रिश्तों और सामाजिक अपेक्षाओं की जटिलताओं को दर्शाती है। अनुभव सिन्हा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में तापसी के अभिनय की लोगों ने जमकर तारीफ की थी।
कंगना रणौत बॉलीवुड की सबसे शानदार अभिनेत्रियों में से एक हैं। फिल्म पंगा में उन्होंने एक राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी खिलाड़ी की प्रेरक यात्रा को जीवंत किया था। फिल्म में परिवार के समर्थन और दृढ़ता के महत्व पर जोर दिया गया था। इस फिल्म में कंगना के किरदार को सभी उम्र के दर्शकों ने पसंद किया था।
जान्हवी कपूर बॉलीवुड की उभरती हुईं अदाकारा हैं। फिल्म दर फिल्म उनके अभिनय में गजब का सुधार नजर आ रहा है। फिल्म गुंजन सक्सेना - द कारगिल गर्ल में उन्होंने शानदार अदाकारी दिखाई थी। यह फिल्म वायुसेना की पायलट गुंजन सक्सेना के वास्तविक जीवन पर आधारित थी। फिल्म में जान्हवी के किरदार के माध्यम से दर्शकों को बाधाओं से पार पाकर और सामाजिक अपेक्षाओं की परवाह किए बिना अपने जुनून का पीछा करने के महत्व प्रकाश डालने की कोशिश की गई है।
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