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Mukesh Death Anniversary: राज कपूर की आवाज कहे जाते थे मुकेश, दर्द भरे गीतों से छू लेते थे रूह
राज कपूर की आवाज कहे जाने वाले मुकेश आज भी संगीत प्रेमियों के दिल पर राज करते हैं। उनको हिंदी के क्लासिक गानों के लिए आज भी याद किया जाता है। मुकेश ने राज कपूर के लिए 'दोस्त-दोस्त न रहा', 'जीना यहां मरना यहां', 'कहता है जोकर', 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई', 'आवारा हूं' और 'मेरा जूता है जापानी' जैसे पॉपुलर गाने गाए हैं। मुकेश भारत ही नहीं बल्कि विदेश में भी काफी मशहूर रहे हैं। मुकेश को हिंदी सिनेमा में उनके अविस्मरणीय योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। आज मुकेश की पुण्यतिथि है। इस खास मौके पर उनके बारे में आपको रूबरू करते हैं।
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मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मुकेश पढ़ाई में तो ज्यादा अच्छे नहीं थे, इसी वजह से उन्होंने अपनी एसएससी की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उन्होंने पहली नौकरी दिल्ली के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में ज्वाइन की थी। हालांकि वह ये नौकरी केवल शौकिया तौर पर किया करते थे। उन्होंने वॉइस रिकॉर्डिंग्स में भी काफी प्रयोग किए थे। हालांकि यह बहुत कम लोग जानते हैं कि मुकेश ने कभी भी सिंगर बनने का सपना नहीं देखा था और उनके पिता जी जोरावर चंद माथुर तो बिल्कुल नहीं चाहते थे कि बेटा गायक बने।
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मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
एक बाद मुकेश अपने रिश्तेदार मोतीलाल की बहन की शादी में गाना गा रहे थे। मोतीलाल को मुकेश की आवाज बहुत पसंद आई तो वो उन्हें मुंबई लेकर आए और गाने की ट्रेनिंग दिलवाई। मुकेश ने 1941 में फिल्म 'निर्दोष' अदाकारी की, साथ ही इस फिल्म के गाने भी खुद ही गाए। इसके अलावा उन्होंने 'माशूका', 'आह', 'अनुराग' और 'दुल्हन' में भी बतौर अभिनेता काम किया था।
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मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
वहीं मुकेश ने अपने करियर में सबसे पहला गाना 'दिल ही बुझा हुआ हो तो' गाया था। फिल्म-उद्योग में उनका शुरुआती दौर काफी मुश्किलों भरा था, लेकिन एक दिन उनकी आवाज का जादू के.एल. सहगल पर चल गया। मुकेश का गाना सुनकर सहगल भी अचंभे में पड़ गए थे। 50 के दशक में मुकेश को शोमैन 'राज कपूर की आवाज' तक कहा जाने लगा था। मुकेश ने 40 साल के लंबे करियर में लगभग 200 से अधिक फिल्मों के लिए गीत गाए। मुकेश उस जमाने के हर सुपरस्टार की आवाज बने।
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मुकेश
- फोटो : सोशल मीडिया
मुकेश ने गाने तो हर तरीके के गाए, लेकिन उन्हें पहचान दर्द भरे गीतों से मिली। मुकेश फिल्मफेयर पुरस्कार पाने वाले पहले पुरुष गायक थे। मुकेश का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उस समय वह 'एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल' गाना गा रहे थे।
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