{"_id":"5ac5aa0a4f1c1bd7618b58be","slug":"naseeruddin-shah-s-daughter-heeba-shah-says-gets-relaxed-by-theater","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"नसीरुद्दीन शाह की बेटी ने दिया बड़ा बयान, कहा- फिल्मों के लिए रंगमंच नहीं छोड़ता सच्चा कलाकार","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
नसीरुद्दीन शाह की बेटी ने दिया बड़ा बयान, कहा- फिल्मों के लिए रंगमंच नहीं छोड़ता सच्चा कलाकार
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Thu, 05 Apr 2018 11:53 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मशहूर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और अभिनेत्री रत्ना पाठक की बेटी हीबा शाह का मानना है कि सच्चा कलाकार फिल्मों के लिए रंगमंच नहीं छोड़ सकता। थिएटर करके सुकून मिलता है। जो फिल्मों में करना है, थिएटर उसे सहज ही सिखा देता है। गोरखपुर के वनटांगिया गांवों में फिल्माई जा रही फिल्म 'सक्षम' की शूटिंग के सिलसिले में वह एक अप्रैल से शहर में हैं।
फाइल फोटो
बुधवार को उनसे मुलाकात हुई तो परिवार से लेकर फिल्म, रंगमंच और समाज पर उन्होंने खुलकर बातें कीं। हीबा शाह ने पिता नसीरुद्दीन शाह की तुलना में मां रत्ना पाठक को व्यवस्थित बताया। बोलीं, दोनों से अलग-अलग चीजें सीखने को मिलीं। पिता ने सिखाया, जो करना है अपने आप करो। इससे स्वतंत्रता का भाव पैदा हुआ।
फाइल फोटो
कुछ करने के बाद गर्व का एहसास हुआ कि जो किया अपने बूते किया। बताया कि मां ने व्यवस्थित जीवन जीना सिखाया तो पिता ने अभिनय का पैशन (पसंदीदा शौक) जगाया। हीबा बोलीं, अभिनय में हर रोज कुछ नया सीखने को मिलता है। यही तो मजा है कलाकारी में। फिल्मों और रंगमंच की तुलना पर कहा कि थिएटर में शुद्धता है। रंगमंच में सुकून है तो फिल्मों में शोर।
विज्ञापन
विज्ञापन
फाइल फोटो
मार्डन लगे वनटांगिया गांव
हीबा शाह बोलीं, वह देश के कई पिछड़े गांवों को देख चुकी हैं। इनकी तुलना में वनटांगिया गांव मार्डन लगे। उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि यहां आकर पता चला कि इन गांवों में बिजली अभी-अभी आई है। सरकार ने इन गांवों को जिस तरह विकास से जोड़ा है, वह काबिल-ए-तारीफ है।
हीबा शाह बोलीं, वह देश के कई पिछड़े गांवों को देख चुकी हैं। इनकी तुलना में वनटांगिया गांव मार्डन लगे। उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि यहां आकर पता चला कि इन गांवों में बिजली अभी-अभी आई है। सरकार ने इन गांवों को जिस तरह विकास से जोड़ा है, वह काबिल-ए-तारीफ है।
विज्ञापन
फाइल फोटो
लैंगिक समानता ने प्रभावित किया
वनटांगिया गांव से लेकर गोरखपुर शहर तक हीबा शाह को लड़कियों की निडर आवाजाही और लड़कों के साथ खेलना प्रभावित कर गया। उन्होंने कहा कि यह देखकर काफी अच्छा लगा। यहां अन्य शहरों की तुलना में लैंगिक समानता का भाव लोगों में ज्यादा है।
वनटांगिया गांव से लेकर गोरखपुर शहर तक हीबा शाह को लड़कियों की निडर आवाजाही और लड़कों के साथ खेलना प्रभावित कर गया। उन्होंने कहा कि यह देखकर काफी अच्छा लगा। यहां अन्य शहरों की तुलना में लैंगिक समानता का भाव लोगों में ज्यादा है।