फिल्म 'गुड बॉय' के बाद नीना गुप्ता अब अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म 'ऊंचाई' में नजर आ रही हैं। 'गुड बॉय' में अमिताभ बच्चन की पत्नी बनीं नीना फिल्म 'ऊंचाई' में उनके दोस्त की पत्नी की भूमिका में हैं। वह कहती हैं, ‘अमिताभ बच्चन के साथ काम करने में हमेशा ही एक अलग ही आनंद की अनुभूति होती है।’ फिल्म ‘ऊंचाई’ को बॉक्स ऑफिस पर मिल रहे दर्शकों के प्यार के सिलसिले में ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में नीना गुप्ता ने अमिताभ बच्चन से पहली मुलाकात का किस्सा भी बताया और ये भी बताया कि फिल्म 'बधाई हो' की रिलीज के बाद उन्होंने नीना को क्या तोहफा भेजा था।
Uunchai Success Interview: बुजुर्गों को जरूर देखनी चाहिए ‘ऊंचाई’, नीना गुप्ता ने आसान शब्दों में समझाई बात
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बच्चों को उनके हिसाब से जीने दो
फिल्म 'ऊंचाई' दोस्ती और रिश्तों की अहमियत की बात करती है। नीना गुप्ता कहती हैं, 'हम बडे मायूस हो जाते हैं जब बच्चे हमारी बात नहीं सुनते और हम मान लेते हैं कि बच्चे हमें अनदेखा कर रहे हैं। मेरी बेटी मसाबा की शादी हो चुकी है, शादी से पहले उससे दिन भर फोन पर बात करने की आदत थी। लेकिन अब फोन पर हाथ जाता है तो अपने हाथ को रोकना पड़ता है। सोचती हूं, उसे अपना जीवन बनाने दो, शादी के बाद उसका अलग जीवन हो जाता है और हम लोग यह नहीं मानते हैं। हर मां बाप यही सोचते हैं कि शादी के बाद भी उनके बच्चे सिर्फ उनकी ही बात सुने लेकिन आप का लड़का जिस लड़की को ब्याह कर लाया है उसके प्रति भी उसकी कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। हर मां बाप अगर यह सोच लें तो कभी भी सास बहू के बीच झगड़े नहीं होंगे।'
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बुजुर्ग मां-बाप भी घर का हिस्सा
और बेटों की मां बाप के प्रति क्या जिम्मेदारी होती है? ये पूछने पर नीना गुप्ता कहती हैं, 'बेटों को भी अपने मां बाप का सम्मान करना चाहिए। उनकी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि मां बाप बुजुर्ग हो गए हैं तो घर के एक कोने मे पड़े रहें। वे क्या चाहते हैं, इस बात को समझे और उनको हमेशा खुश रखने की कोशिश करें, मेरी बेटी मसाबा मुझे हमेशा काम करने के लिए प्रोत्साहित करती रहती है। घर का कोई भी काम होता था तो वह कहती थी कि इसे मैं कर लूंगी आप अपने काम पर ध्यान दो। 'ऊंचाई' में युवाओ के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि यह मत सोचो कि मां बाप बुजुर्ग हो गए हैं तो उनको घर के एक कोने में पड़े रहने दो।'
मौका आए तो दोस्ती निभाने से मत चूको
फिल्म ‘ऊंचाई’ यही भी बताती है कि जीवन में दोस्त के लिए कभी कुछ करने का मौका मिले तो पीछे नहीं हटना चाहिए। इस बारे में बात चलने पर नीना गुप्ता कहती हैं, 'बहुत साल पहले की बात है जब मैं अंधेरी (पूर्व) के शेरे पंजाब कालोनी में एक छोटे से कमरे में रहती थी। उन्हीं दिनों मेरे एक दोस्त दीपक को कुछ समस्या हुई, उनके पास रहने की जगह नहीं थी तो मैंने उन्हें अपने घर में रख लिया। मुझे पता था कि लोग इस बारे में तरह तरह की बातें करेंगे। लेकिन मेरा मन साफ था, उसके प्रति मेरे मन में ऐसी कोई भावना नहीं थी। मेरा दोस्त है तो मैं अपनी दोस्त की मदद क्यों नहीं कर सकती क्योंकि जब आप मुसीबत में होते हैं तो कहने वाले आपकी मदद करने नहीं आते, दोस्त ही मदद करने आते हैं।'
अगर फैमिली नहीं तो पैसा बेकार है
नीना गुप्ता ने राजश्री प्रोडक्शंस की कौन सी फिल्म पहली बार देखी? ये पूछने पर वह फिल्म 'मैंने प्यार किया' का नाम लेती हैं। कहती हैं, 'राजश्री की फिल्मों में खास तौर पर हमने यही देखा कि उनकी ज्यादातर फिल्में पारिवारिक होती हैं, इस बार सूरज बड़जात्या ने थोड़ी सी हटकर फिल्म बनाई है। इस बार उनके मन ने जो कहा वैसी फिल्म बनाई, किरदार के भले ही कपड़े बदले हैं, लेकिन आत्मा वही ही है जैसा कि उनकी फिल्मों मे अक्सर होता है, जिसमे पारिवारिक मूल्यों की बात की गई है, मैं हमेशा यही बात बोलती हूं कि आप चाहे जितने भी बड़े क्यों ना हो जाओ, चाहे कितनी भी प्रसिद्धि मिल जाए, लेकिन अगर आप की फेमिली नहीं है तो आप बहुत ही दुखी इंसान हैं। क्योंकि दिन भर काम करने के बाद आपको वापस घर पर ही तो जाना है।'