नेटफ्लिक्स की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज ‘स्कूप’ की इन दिनों हर तरफ चर्चा है। फिल्म ‘मोनिका ओ माय डार्लिंग’ के बाद मैचबॉक्स शॉट्स प्रोडक्शन कंपनी की ये अगली प्रस्तुति एक सच्ची घटना से प्रेरित है। मुंबई की चर्चित क्राइम रिपोर्टर जिगना वोरा की किताब 'बिहाइंड द बार्स इन भायखला: माय डेज इन प्रिजन' पर आधारित इस वेब सीरीज का काल खंड साल 2010 के आगे का वह वक्त है, जब मुंबई पुलिस और आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों की आपसी प्रतिद्वंदिता के चलते मुंबई अंडरवर्ल्ड के दो चर्चित नामों दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन गिरोह की सक्रियता एकदम से बढ़ गई थी। और, इसी बीच एक नामी पत्रकार ज्योतिर्मय डे की दिन दहाड़े हत्या हो गई। वेब सीरीज ‘स्कूप’ देखने से पहले चलिए आपको बताते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम के असली किरदार कौन कौन से हैं:
Scoop Real Story: वेब सीरीज स्कूप की ये है असली कहानी, क्राइम रिपोर्टर जिगना वोरा के बारे में यहां जानें सबकुछ
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दिन दहाड़े पत्रकार की हत्या
11 जून 2011 के दिन मिड डे अखबार के 56 वर्षीय पत्रकार ज्योतिर्मय डे की मुंबई के पवई में हीरानंदानी गार्डन के पास गोली मार कर सरेआम हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज करके जांच पड़ताल शुरू की। अगले छह महीन में तमाम गिरफ्तारियां हुई। आखिरकार पुलिस पूछताछ में कथित रूप से पता चला कि हत्या की साजिश में एशियन एज अखबार की ब्यूरो चीफ जिगना वोरा का हाथ है। पुलिस के मुताबिक उसने ही गैंगस्टर छोटा राजन को इश हत्या के लिए उकसाया।
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जिनगा वोरा खुद बन गई हेडलाइन
अक्सर अखबार के पहले पन्ने पर आने के लिए खबरें तलाशने वाली जिगना वोरा को पुलिस ने 25 नवंबर 2011 को गिरफ्तार कर लिया गया। उस समय जिगना 37 साल की थीं और उन पर आरोप लगा कि वह ज्योतिर्मय डे के बारे में सारी जानकारियां गैंगस्टर छोटा राजन को देती रही हैं। पुलिस ने दावा किया कि जिगना ने ही ज्योतिर्मय डे का पता और गाड़ी का नंबर छोटा राजन से साझा किया था।
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गिरफ्तारी के बाद का घटनाक्रम
गिरफ्तारी के बाद साल 2012 में मुंबई पुलिस ने जिगना के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत कई और आरोप लगाए। पुलिस ने दावा किया कि जिंगना ने गैंगस्टर छोटा राजन को तीन बार फोन मिलाया था। जिगना पर ज्योतिर्मय डे के साथ पेशेवर प्रतिद्वंद्विता का आरोप लगा और पुलिस ने अदालत में कहा कि इसी कारण उसने छोटा राजन को उकसाने का काम किया। जिगना 27 जुलाई 2012 को जमानत मिलने के बाद जेल से रिहा हुईं। जिगना को जमानत मिलने के तीन साल बाद छोटा राजन की इंडोनेशिया में गिरफ्तारी हुई।
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साजिश या महज एक संयोग
जिगना को जमानत मिलने का मुख्य आधार रहा उनका एकल मां होना। उन पर उस समय एक छोटे बच्चे को संभालने की जिम्मेदारी थी। अपनी सफाई में जिगना का कहना था कि वह सिर्फ एक साक्षात्कार के लिए छोटा राजन को कॉल कर रही थी। जिगना की इस बात का मिड डे के तत्कालीन कार्यकारी संपादक सचिन कलबाग ने भी समर्थन किया। फिर ये पूरा मामला सीबीआई के पास गया। अदालत में जिगना के खिलाफ लगाए गए आरोप सबूतों के अभाव में साबित नहीं हो सके और जिगना को साल 2018 में इस केस से बरी कर दिया गया।
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