दिल्ली की प्रसिद्ध लवकुश रामलीला में इन दिनों सीता बनकर वाहवाही लूट रहीं फिल्म अभिनेत्री समीक्षा भटनागर की एक नई फिल्म ‘भ्रामक’ इन दिनों हिंदी फिल्म जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने वाली फिल्म ‘भ्रामक’ को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर जिन लोगों ने भी देखा, इसकी खूब सराहना की। समीक्षा इस फिल्म के साथ ही निर्माता भी बन गई हैं। डायरेक्टर मधुर भंडारकर की फिल्म ‘कैलेंडर गर्ल्स’ से हिंदी सिनेमा में डेब्यू करने वाली समीक्षा को अभिनेता सनी देओल और एक्टर बॉबी देओल की फिल्म ‘पोस्टर ब्वॉयज’ से खासी शोहरत मिली थी। टेलीविजन का वह बड़ा नाम रही हैं। ‘बालवीर’, ‘देवों के देव महादेव’, ‘कुमकुम भाग्य’ जैसे तमाम हिट धारावाहिकों में नजर आ चुकीं समीक्षा का रंगमंच से पुराना लगाव रहा है और मशहूर नाटक ‘रोशोमन ब्लूज’ में वह एक पत्रकार के किरदार में नजर आ चुकी हैं।
मेंटल हेल्थ पर बनी फिल्म ‘भ्रामक’ की ओटीटी पर धूम, अभिनेत्री से निर्माता बनीं समीक्षा ने कहा, शुक्रिया!
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दिल्ली की लवकुश रामलीला में सीता का किरदार करने को लेकर समीक्षा कहती हैं, ‘सीता की जीवनयात्रा भारतीय महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है। त्रेता युग में जो चुनौतियां उन्होंने झेलीं, कलयुग में भी वे बदस्तूर जारी हैं। जीवन उनके लिए अब भी कई बार बोझ सा तब बन जाता है जब उन्हें बार बार ‘अग्निपरीक्षाओं’ से गुजरना होता है। कई बार तो ये भी लगने लगता कि क्या महिलाएं पुरुषों जैसी ही इंसान नहीं हैं। सीता ने अपनी जीवन यात्रा के जरिए ये दिखाने की कोशिश कि एक महिला को अपना जीवन कैसे जीना चाहिए और कैसे उसे कभी भी सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।’
और, समीक्षा इन्हीं सिद्धांतो पर अपने निजी जीवन में भी कायम हैं। मुंबई फिल्म जगत मे काफी शोहरत कमा चुकीं समीक्षा का फिल्म निर्माता बनना इसी अगला कदम है। वह कहती हैं, ‘बतौर निर्माता मेरी ये पहली फिल्म है। फिल्म ‘भ्रामक’ एक ऐसी महिला की कहानी है जिसके पति का निधन हुए अरसा हो चुका है लेकिन वह इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पा रही। वह मानती है कि उसका पति अब भी उसके साथ ही रह रहा है। एक अजीब सी मानसिक स्थिति में रह रही इस महिला के किरदार के जरिये मैंने तमाम भावनात्मक पहलुओं को परदे पर जीने की कोशिश की है।’
फिल्म ‘भ्रामक’ को बीते हफ्ते ही ओटीटी पर रिलीज किया गया। और, विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर इसे मिले हिट्स को देखते हुए समीक्षा का इरादा इसे अब दूसरे डिजिटल माध्यमों पर भी रिलीज करने का है। वह कहती हैं, ‘फिल्म ‘भ्रामक’ मेरे लिए पैसे कमाने का माध्यम नहीं है। मैं इसके जरिये समाज को एक संदेश देना चाहती हूं। हमारे आसपास ना जाने कितने लोग ऐसे हैं जिनके पास बात करने वाला कोई नहीं है। अकेलापन सबसे बड़ी बीमारी है। ऐसे लोगों से बातें करके, उनके साथ थोड़ा वक्त बिताकर हम उनका अवसाद कम कर सकते हैं।’
दिल्ली की लवकुश रामलीला के अपने अनुभवों के बारे में पूछे जाने पर समीक्षा बताती हैं, ‘रंगमंच पर मैंने पहले भी काम किया है और ये केमरे के सामने अभिनय करने से बहुत अलग है। यहां रिहर्सल पर ही अदाकारी की पूरी धुरी टिकी रहती है क्योंकि रंगमंच पर रीटेक करने का मौका नहीं मिलता। सीता का किरदार ऐसा है जिसके लिए मैंने रात दिन तैयारी की है। वह अपने माता पिता की आदर्श बेटी बनीं, अपने पिता की आदर्श पत्नी बनीं और अपने जुड़वा बच्चों की आदर्श मां भी। ऐसा किरदार करना किसी भी कलाकार के लिए एक गौरव का क्षण होता है। मैं शुक्रगुजार हूं उन सब लोगों की जिन्होंने इस किरदार के लिए मुझे चुना और उन लोगों की भी जिन्होंने इस किरदार को करने के लिए मुझे अपने प्रोजेक्ट्स को थोड़ा थामकर मुझे इसकी मोहलत दी।’