अपनी पहली ही फिल्म ‘तुम बिन' से रातों रात स्टार बने अभिनेता प्रियांशु चटर्जी की आवाज का जमाना कायल रहा है। हिंदी से लेकर बांग्ला और दूसरी भी तमाम भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुके प्रियांशु इन दिनों अपनी एक वेब सीरीज 'फायरफ्लाइज पार्थ और जुगनू' को लेकर चर्चा में हैं। इस वेब सीरीज में वह कैंसर के डॉक्टर और दो बच्चों के पिता बने हैं। ये वेब सीरीज बच्चों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। प्रियांशु से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।
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छोटे बच्चों के साथ काम करना कितना अलग अनुभव होता है?
उनके साथ काम करने के लिए बहुत एनर्जी चाहिए। शूटिंग के दौरान उनकी एनर्जी को मैच करना मुश्किल हो जाता है। बच्चों के साथ काम करने में कोई राजनीति नहीं होती है। न ही शूटिंग के दौरान उनके कोई नखरे होते हैं। वे सारी चीजें आराम से कर लेते हैं। उनको देख कर बहुत कुछ सीखने को भी मिलता है।
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सिनेमा में 25 साल के अपने सफर का पुनरावलोकन किस तरह करते हैं?
मेरी जर्नी बहुत ही खूबसूरत और रोमांचक रही है। इन 25 साल में बहुत उतार चढ़ाव आए लेकिन इन उतार चढ़ावों के बीच मेरा मन कभी अभिनय से नहीं घबराया। मुझे एक पल के लिए भी नहीं लगा कि इसे छोड़ कर कुछ और कर लूं। मुझे आज भी काम में उतना ही मजा आता है जितना मुझे 'तुम बिन' में काम करके आया था। इस मजे के लिए ही मैं काम करता हूं। और मेरे हिसाब से अभिनय एक ऐसा पेशा है जिसमें जीवन के अंत तक कोई निपुण नहीं हो सकता। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि इतनी अलग-अलग भाषाओं में और इतनी अलग अलग कहानियों का मैं हिस्सा बन पाया।
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अच्छा, आपने कब सोचा कि अभिनय करना है या हीरो बनना है?
दरअसल मैंने कभी ऐसा सोचा नहीं था। ये तो अपने आप हो गया। मैं तो सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) की पढ़ाई कर रहा था लेकिन मुझे फिल्मों में रुचि आने लगी थी। मैं कॉलेज के समय से ही दूरदर्शन पर समाचार पढ़ने लगा था तब मुझे एक घंटे के 500 रुपये मिलते थे। इसी दौरान मुझे टीवी सीरियल वालों ने देखा और पूछा कि आप यह रोल करेंगे, तो मैने हां कह दिया। मुझे लगा कि मुझे एक्टिंग की पढ़ाई करनी चाहिए। मैंने मुंबई के किशोर नमित कपूर कॉलेज से एक्टिंग की पढ़ाई की। इसी दौरान ऑडिशन देते रहता था और कुछ साल बाद फिल्म मिल गई।
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नहीं, नहीं! बिल्कुल भी नहीं।