छोटे शहरों, कस्बों और गांवों से मुंबई जैसे महानगर में फिल्म जगत में अपना मुकाम तलाशने आए लोगों के सपोर्ट ग्रुप ‘अपना अड्डा विद पंकज शुक्ल’ के दिसंबर माह के मासिक समागम में मुख्य अतिथि फिल्म निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और कहा कि अगर मेरे जैसा व्यक्ति संघर्ष से हार न मानकर एक 400 करोड़ी फिल्म (द केरल स्टोरी) बना सकता है तो मुझे लगता है कि इस शहर में लगातार मेहनत करते रहने वाला कोई भी शख्स कामयाब हो सकता है।
Apna Adda: घर का किराया देने तक के नहीं थे पैसे, मैं 400 करोड़ी फिल्म बना सकता हूं तो कोई भी कामयाब हो सकता है
फिल्म जगत में अपना मुकाम तलाशने आए लोगों के सपोर्ट ग्रुप ‘अपना अड्डा विद पंकज शुक्ल’ के दिसंबर माह के मासिक समागम में मुख्य अतिथि फिल्म निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया।
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फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की रिलीज के समय के तनाव का जिक्र करते हुए सुदीप्तो ने कहा कि रिलीज के एक दिन पहले तक हमें पता ही नहीं था कि हमारी फिल्म रिलीज होगी भी या नहीं। दर्जनों मुकदमे हो चुके थे। फिल्म की रिलीज की तैयारियों से ज्यादा समय हमें मुकदमों की सुनवाई में बिताना पड़ रहा था रिलीज के दिन सुबह 9 बजे सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि ये फिल्म रिलीज होनी ही चाहिए और तब जाकर हमारी सबकी मेहनत दर्शकों तक पहुंची और इसे दुनिया भर में बेइंतेहा प्यार मिला।
अपना अड्डा विद पंकज शुक्ल’ की सराहना करते हुए सुदीप्तो सेन ने कहा, “मुझे इतना लंबा समय मुंबई में काम करते हुए हो चुका है लेकिन ऐसे किसी दूसरे सपोर्ट ग्रुप के बारे में मुझे अब तक जानकारी नहीं है। ये प्रयास न सिर्फ बहुत सराहनीय है बल्कि अनुकरणीय है। मैंने खुद को कभी स्ट्रगलर नहीं माना और इस सपोर्ट ग्रुप में भी किसी को स्ट्रगलर नहीं माना जाता है बल्कि एक साथी की तरह सबका सम्मान किया जाता है। मैंने तो ऐसे दिन भी देखे हैं जब मेरा दोस्त मेरे कमरे में बाहर से ताला लगाकर चला जाता था ताकि मैं रात को सुकून से सो सकूं और मकान मालिक बाहर से ताला लगा देखकर किराया मांगने रात में भीतर न चला आए। हम सबका संघर्ष ऐसा ही है और जब मैं वहां से निकलकर इस शहर में एक 400 करोड़ी फिल्म बना सकता हूं तो आप सब भी कामयाब जरूर होंगे।” इस दौरान सुदीप्तो सेन ने कई उभरते कलाकारों को देखते ही पहचान लिया और कहा कि उन्होंने इन लोगों का काम कहीं न कहीं देखा है। ‘सैक्रेड गेम्स’ व अन्य कई सीरीज में काम कर चुके चेतन शर्मा की उन्होंने बार बार तारीफ की।
अभिनेता व निर्देशक अमरेंद्र शर्मा की म्यूजिकल शॉर्ट फिल्म ‘रसप्रिया’ को सुदीप्तो ने बेहतरीन फिल्म बताया। आलोक पांडे की सीरीज ‘बॉम्बे मेरी जान’ की इस मौके पर चर्चा हुई। रमा शर्मा ने अपने काम के बारे में बताया तो ‘केरल स्टोरी’ के निर्देशक काफी उत्सुक दिखे। संगीतकार मुकुल पुरी के संगीत की भी सुदीप्तो ने तारीफ की और इस मौके पर मुकुल ने अपना लोकप्रिय गीत पानी भी गिटार बजाते हुए गाकर सुनाया। अपनी प्रस्तुतियां देकर वाहवाही लूटने वालों में अपराजिता वर्मा, सचिन विद्रोही, इंकलाब त्रिपाठी, शिवकांत लखनपाल, राजशेखर साहनी और विराग धूलिया भी शामिल रहे।
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‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक व वरिष्ठ फिल्म समीक्षक पंकज शुक्ल के मुताबिक, “अपना अड्डा एक कोशिश है उन हुनरमंदों को तलाशने, पहचानने और उनके बारे में दुनिया को बताने की, जो अपना खेत, गांव, गलियारा छोड़ यहां मुंबई की बस्तियों में रहकर कैमरे के सामने दमकने की कोशिशें कर रहे हैं। कुछ चमक भी चुके हैं और दूसरों को रोशनी का सही स्रोत बताने में उनकी मदद कर रहे हैं। 'अपना अड्डा' वैसे तो हर शनिवार को नए लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलने मिलाने के साप्ताहिक कार्यक्रम के रूप में ही शुरू हुआ, लेकिन महीने में एक बार इसे अनौपचारिक गेट टुगेदर का रूप मिले बीती शाम एक साल पूरा हो गया।”
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