जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक पिछले काफी समय से सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ लीड रोल में नजर आने वाले हैं। अब हाल ही में जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक पंजाब 95 का पहला लुक जारी किया गया, जिसमें दिलजीत दोसांझ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभा रहे हैं। इस लुक का अनावरण रोनी स्क्रूवाला के प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी मूवीज ने सोमवार, 24 जुलाई की रात को किया। इस दौरान यह भी बताया गया कि फिल्म का प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2023 में होगा।
Punjab 95: जारी हुआ 'पंजाब 95' का फर्स्ट लुक, TIFF 2023 में होगा जसवंत सिंह खालरा की बायोपिक का प्रीमियर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिलजीत दोसांझ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर फर्स्ट लुक साझा करते हुए लिखा, 'वाहेगुरुजी का खालसा वाहेगुरुजी की फतेह! टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में वर्ल्ड प्रीमियर। पेश है पंजाब '95 का फर्स्ट लुक, मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा जी के जीवन पर आधारित एक बेहतरीन कहानी।'
इसे भी पढ़ें- Merry Christmas: कटरीना-विजय की फिल्म 'मेरी क्रिसमस' के ओटीटी राइट्स बिके! जानें कितने में पक्की हुई डील
बता दें कि कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहान द्वारा निर्देशित, पंजाब 95 में अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की भी मुख्य भूमिकाओं में हैं, जिन्हें हाल ही में वेब सीरीज कोहरा में उनके अभिनय के लिए काफी सराहना मिली थी। बता दें कि शुरुआत में इस फिल्म का नाम घल्लूघारा था, यह फिल्म तभी से चर्चा में आ गई थी। बता दें कि फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट देने में छह महीने से ज्यादा का समय लगाया था और ए सर्टिफिटकेट के साथ 21 कट लगाए थे। जिसके बाद निर्माता सीबीएफसी के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट चले गए थे।
जसवन्त सिंह खालरा एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे जिन्होंने पुलिस द्वारा हजारों अज्ञात लोगों के अपहरण, हत्या और दाह संस्कार के सबूत खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 1980 के दशक के मध्य से 1990 के मध्य तक उग्रवाद के दौरान पंजाब में 25,000 अवैध दाह संस्कारों के संबंध में खालरा की जांच के बाद दुनिया भर में बहुत विरोध प्रदर्शनों हुआ था।
इसके बाद सीबीआई इस नतीजे पर पहुंची कि पंजाब पुलिस ने तरनतारन जिले में 2097 लोगों का गैरकानूनी तरीके से अंतिम संस्कार किया था। फिर खलरा गायब हो गए। शुरुआत में तो पंजाब पुलिस ने उनकी मौत को आत्महत्या माना लेकिन बाद में, खलरा के अपहरण और हत्या के लिए पंजाब पुलिस के छह अधिकारियों को दोषी ठहराया गया और सात साल की कैद की सजा सुनाई गई।