पिछले दो दशक से अपने अभिनय से हिंदी फिल्म दर्शको की तीन पीढ़ियों के चहेते सुपरस्टार बने हुए अभिनेता रंगनाथन माधवन अब डॉक्टर हो गए हैं। इन दिनों मशहूर अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंबी नारायणन की बायोपिक ‘रॉकेटरी’ के पोस्ट प्रोडक्शन में जुटे माधवन ने अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर कर ये मानद उपाधि हासिल की। ये उपाधि माधवन को डी वाई पाटिल एजूकेशन सोसाइटी ने बुधवार को कोल्हापुर में प्रदान की।
सामाजिक योगदान के लिए माधवन को मिला बड़ा सम्मान, महाराष्ट्र की दिग्गज शिक्षण संस्था ने दी मानद उपाधि
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अभिनेता आर माधवन ने बतौर हीरो हिंदी सिनेमा में साल 2001 की फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ से कदम रखा। फिल्म में उनकी हीरोइन रहीं दीया मिर्जा ने हाल ही में दूसरी शादी बिजनेसमैन वैभव रेखी से की है। माधवन की मणिरत्नम के निर्देशन में बनी तमिल फिल्म ‘अलायपायुथे’ इससे साल भर पहले रिलीज हुई। अपनी शुरूआती फिल्मों से ही दर्शकों पर असर छोड़ने वाले माधवन तब से लगातार हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम, अंग्रेजी में फिल्में करते रहे हैं। करियर की शुरूआत में ही माधवन ने कन्नड़ सिनेमा में भी काम किया। वह इकलौते ऐसे भारतीय अभिनेता हैं जिनकी लोकप्रियता पिछले दो दशक से लगातार सभी भारतीय भाषाओं की फिल्मों में बनी हुई है।
माधवन के इसी पैन इंडिया सुपरस्टार के स्टेटस को देखते हुए और सिनेमा व समाज के लिए उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र की शीर्ष शिक्षण संस्था डी वाई पाटिल एजूकेशन सोसाइटी ने बुधवार को अपने कैंपस में आयोजित एक समारोह में उन्हें डॉक्टर की मानद उपाधि प्रदान की। इस दौरान माधवन के इंजीनियरिंग के दिनों के भी तमाम मित्र उन्हें बधाई देने कोल्हापुर पहुंचे। माधवन ने स्नातक की पढ़ाई कोल्हापुर से की है और कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उन्हें भारत का सांस्कृतिक प्रतिनिधि बनकर कनाडा जाने का मौका मिला था। वहां वह साल भर स्कॉलरशिप पर रहे थे।
आर माधवन अनलॉक के बाद शूटिंग शुरू करने वाले ए लिस्टर सितारों में सबसे आगे रहे हैं। उनकी एक फिल्म ‘मारा’ इन दिनों प्राइम वीडियो पर धूम मचा रही है। ये एक ऐसी फिल्म मानी जा रही है जो आने वाले दिनों में भारतीय सिनेमा के लिए ट्रेंडसेटर बन सकती है। दिलचस्प बात ये है कि तमिल में बनी इस फिल्म को ओटीटी के उत्तर भारतीय ग्राहकों ने मूल भाषा के दर्शकों से ज्यादा बार देखा है। अंग्रेजी सब टाइटल्स के साथ रिलीज हुई ये फिल्म दूसरों के सुख के लिए अपने सुख को तिलांजलि देने की कहानी है। अलग अलग समय पर अपनों से बिछड़े दो बच्चे बड़े होकर कैसे दीवारों पर बनी पेटिंग्स के जरिए मिलते हैं, इसकी भी ये एक दिलचस्प कहानी है।
आर माधवन ने हाल ही में नेटफ्लिक्स की एक सीमित एपीसोड वाली सीरीज की शूटिंग खत्म की है और इन दिनों वह मुंबई में टी सीरीज की अगली फिल्म की शूटिंग में व्यस्त है। शूटिंग के बीच से समय निकालकर वह अपनी फिल्म ‘रॉकेटरी’ का पोस्ट प्रोडक्शन भी पूरा करने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि इस फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स उसी टीम ने तैयार किए हैं, जिसने स्टीवन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘अवतार’ के स्पेशल इफेक्ट्स तैयार किए हैं। इस फिल्म से माधवन फिल्म निर्देशक भी बन चुके हैं।