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Raveena Tandon: रवीना टंडन ने बॉलीवुड के ऊपर चुना टॉलीवुड, हिंदी फिल्मों की असफलता पर दिया चौंकाने वाला बयान
रवीना टंडन फिल्मों में शानदार अभिनय के साथ ही अपने दमदार व्यक्तित्व के कारण भी फैंस के बीच खासा चर्चित हैं। अभिनेत्री कई अवसर पर हिंदी और साउथ फिल्मों के अंतर को समझाती नजर आई हैं। साथ ही सिनेमा में आए कुछ बदलावों को लेकर मुखर रही हैं। इसी कड़ी में अभिनेत्री ने वापस से साउथ और हिंदी फिल्म इंडस्ट्री पर चर्चा की है। साथ ही फिल्मों की सफलता और असफलताओं पर बड़ा बयान देती नजर आई हैं।
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रवीना टंडन
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिनेत्री रवीना टंडन का मानना है कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री इसलिए फला-फूला है क्योंकि वह अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति प्रतिबद्ध है। वहीं, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री हर चीज का 'पश्चिमीकरण' करने के अपने प्रयास के कारण विफल रहा है। एक नए इंटरव्यू में, रवीना ने साउथ में कमल हासन, चिरंजीवी और नागार्जुन जैसे सितारों के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा किया।
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रवीना टंडन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
राजश्री अनप्लग्ड से बात करते हुए, रवीना ने पहले से ही लोकप्रिय धारणा को मजबूत किया कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की तुलना में कहीं अधिक अनुशासित है। एक और बड़ा अंतर, जो उन्हें लगता है कि हिंदी फिल्मों के प्रदर्शन पर असर डाल रहा है, वह है अपनी जड़ों से जुड़े रहने में विफलता। रवीना ने कहा, 'साउथ इंडस्ट्री में मुझे सबसे ज्यादा मजा आया, वह यह कि वे अपनी जड़ों और संस्कृति से इतनी मजबूती से जुड़े हुए थे कि उनकी फिल्में सुपर-डुपर हिट होती थीं। वे बहुत अधिक संभ्रांतवादी फिल्में नहीं बनाते हैं।'
रवीना टंडन ने अपनी बात को जारी रखते हुए आगे कहा, 'मुझे लगता है कि यही काम करता है। हालांकि, मुंबई में वे पश्चिमी संस्कृति का पालन करते थे। उन्होंने मुंबई में उन फिल्मों की डीवीडी प्रतियां बनानी शुरू कर दीं, जो अच्छा व्यवसाय नहीं कर रही थीं। इसलिए, यह बहुत जरूरी था कि हम उससे जुड़े रहें जो हमारी जनता चाहती है। यह मैंने साउथ इंडस्ट्री से सीखा है।
रवीना टंडन ने वर्ष 1993 में 'बंगारू बुलोदु' के साथ तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में अपनी शुरुआत की, और तमिल फिल्म इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत 1994 में 'साधु' नामक फिल्म से हुई। वह हाल ही में सुपरहिट कन्नड़ फिल्म 'केजीएफ: चैप्टर 2' में नजर आई थीं। अभिनेत्री ने यह भी बताया कि कैसे साउथ में वह कुछ भी खाने के लिए स्वतंत्र थीं, क्योंकि वहां फिल्म निर्माताओं को उनके वजन बढ़ने से कोई आपत्ति नहीं थी। हालांकि, मुंबई लौटने के बाद उन्हें अपना अतिरिक्त वजन कम करना पड़ा।
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