बृहस्पतिवार सुबह पौने नौ बजे हमेशा के लिए आंखे मूंद लेने वाले ऋषि कपूर आखिरी सांस तक जिंदगी से मोहब्बत करते रहे। अस्पताल के बिस्तर पर पड़े-पड़े जब उनकी सांसें उखड़ रही थीं तो भी वह उनका किसी न किसी तरह मनोरंजन ही करने की कोशिश करते दिखे। परिवार की तरफ से जारी एक शोक संदेश में कहा गया है कि ऋषि कपूर दो साल तक दो अलग-अलग महाद्वीपों में चले इलाज के दौरान वह हमेशा खुश रहे और जिंदगी जीने की इच्छा हमेशा उनमें कायम रही। दोस्त, यार, परिवार, खाना-खिलाना और फिल्में, बस इन्हीं में उनका दिल बसता था और इस दौरान जो भी उनसे मिला, यह देखकर हैरान रहा कि कैसे उन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया। ऋषि के घरवालों ने यही इच्छा जताई कि लोग उन्हें मुस्कुराहट के साथ याद करें न कि आंसुओं के साथ। गुरुवार की सुबह हुए निधन के बाद जारी इस संदेश में यह भी कहा गया कि दुनिया इस समय बहुत ही मुश्किल और मुसीबत भरे समय से गुजर रही है। लोगों के आने-जाने और इकट्ठा होने पर तमाम तरह की बंदिशे हैं और ऋषि कपूर के घर वाले चाहते हैं कि लोग इस समय लागू कानून का सम्मान करें और उनकी अंतिम यात्रा में भीड़ न लगाएं।
अंतिम सांस तक लोगों को हंसाते रहे ऋषि कपूर, बीमारी को कभी नहीं होने दिया हावी
कव्वालियों की जान
हिंदी सिनेमा के उस दौर में ऋषि कपूर ने तमाम मेनकाओं को संन्यासिन बना दिया था। ट्रेन की छत पर चढ़कर गाना हो या फिर कव्वाली में महफिल लूट लेना, अकबर इलाहाबादी के किरदार में रच जाने वाले ऋषि ने हर बार कहा, हम किसी से कम नहीं।
आखिरी फिल्म 'शर्माजी नमकीन'
ऋषि कपूर कितने जिंदादिल इंसान रहे, इसकी बानगी उनके संदेशों से मिलती है। वह नहीं चाहते थे कि लोग उनकी लाचार-सी तस्वीर अखबारों में छपी देखें या फिर उनकी कोई ऐसी बात समाचारों में बाहर आए, जिससे लोग उन पर तरस खाते दिखें। उनके स्क्रीन वाले नाम से तो शायद ही कोई उन्हें बुलाता हो, सब उन्हें चिंटूजी ही कहकर बुलाते रहे। राज कपूर की फिल्म 'श्री 420' के गाने ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ में पहली बार दिखे चिंटू की आखिरी फिल्म 'शर्माजी नमकीन' की कुछ ही दिन की शूटिंग बाकी थी। दीपिका पादुकोण के साथ वह हॉलीवुड फिल्म 'इंटर्न' की रीमेक पर भी काम करने के लिए हां कर चुके थे। गौरतलब यह भी है कि 30 अप्रैल को ही ऋषि कपूर के अभिनय की दूसरी पारी की फिल्म 'दामिनी' भी रिलीज हुई थी।
मुझे क्यों अस्पताल भेजने लगे लोग?
ऋषि कपूर की हालत इस साल जनवरी से ज्यादा बिगड़नी शुरू हुई। लोगों ने उनकी सेहत पर कयास लगाने शुरू किए और तब भी उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबरें आई थीं। इस बारे में मैंने उन्हें संदेश कर सेहत की जानकारी लेनी चाही तो उनका कहना था, “बहुत शुक्रिया, लेकिन मुझे क्यों अस्पताल भेजने लगे लोग? ख्याल रखने के लिए फिर से धन्यवाद। सादर...।” फरवरी महीने में भी वह दिल्ली में थे, जब पहली बार उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई।
ऋषि कपूर: वे किसी से कम नहीं !
