सआदत हसन मंटो को उर्दू जुबान के मशहूर अफसानानिगारों में शामिल किया जाता है। उनकी कहानियों की जितनी चर्चा होती है उतनी ही बात उनकी निजी जिंदगी की भी होती है। मंटो का जन्म 11 मई 1912 में अविभाजित हिंदुस्तान के लुधियाना हुआ था। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने 22 लघु कथा संग्रह, एक नॉवेल, पांच रेडियो नाटक संग्रह और रचनाओं के तीन संग्रह व व्यक्तिगत रेखाचित्र के तीन संग्रह प्रकाशित किए थे।मंटो अपने समय से आगे के कहानीकार थे। बेहद कम उम्र में ही उन्होंने कहानियां लिखनी शुरू कर दी थी। अक्सर उनकी कहानियों पर अश्लीलता के आरोप लगते, जिसकी वजह से उन्हें कई बार मुकदमों का भी सामना करना पड़ा था। हालांकि कई उन पर एक भी मामला साबित न हो सका। आइए आज आपको मंटो की उन कहानियों के बारे में बताते हैं, जिन पर ये मुकदमे चलाए गए थे।
Saadat Hasan Manto: समय से आगे की सोच थे मंटो, जो भी लिखा, हर किसी के सिर पर सवार हो गया
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मंटो पर पहला मुकदमा काली सलवार के लिए हुआ था। इस कहानी को लाहौर की अदब-ए-लतीफ पत्रिका ने 1942 में छापा था। कहानी पर अश्लीलता के आरोप लगे। अदालत ने दंड भी दिया, लेकिन बाद में सेशन कोर्ट ने कहानी को अश्लीलता के आरोप से मुक्त कर दिया।
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मंटो पर दूसरा मुकदमा दो साल बाद उनकी कहानी 'बू' के लिए चलाया गया। इस कहानी को भी अदब-ए-लतीफ पत्रिका ने अपने वार्षिक अंक में छापा था। इस कहानी पर भी अश्लीलता फैलाने के आरोप लगे। मंटो पर डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स की धारा 38 के तहत केस चलाया गया। हालांकि इस बार भी वह बरी हो गए।
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मंटो पर तीसरा मुकदमा उनकी कहानी 'धुआं' के दर्ज किया गया। इसे दिल्ली के साकी बुक डिपो की ओर से प्रकाशित किया गया था। कहानी पर अश्लीलता के आरोप लगने के बाद मंटो पर ताजीरात-ए-हिंद की धारा 292 के तहत केस चला। मंटो पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया गया। बाद में यह मामला सेशन कोर्ट पहुंचा और मंटो इन आरोपों से एक बार फिर बरी हो गए साथ ही उन्हें अपने 200 रुपये भी वापस मिल गए।
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मंटो पर पर चौथा मुकदमा 'ठंडा गोश्त' के लिए चला। पाकिस्तान जाने के बाद यह उनकी लिखी पहली कहानी थी। कहानी प्रकाशित होने के बाद इस अश्लीलता के आरोप लगे, जिसके बाद मंटो और पत्रिका के मुद्रक एवं प्रकाशक नसीर अहमद और संपादक आरिफ अहमद मतीन को गिरफ्तार कर लिया गया। मंटो की तीन महीने की सजा सुनाई गई,साथ ही उन पर 300 रुपये का जुर्माना भी लगा। हालांकि सेशन कोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई।
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