अमर उजाला संवाद - जम्मू कश्मीर के तहत 'मनोरंजन जगत की नई दिशाएं' विषय पर हुए सत्र में अभिनेता विकी कौशल शामिल हुए। पत्रकार नगमा ने उनसे चर्चा की। विकी कौशल ने कहा कि जम्मू में पहली बार आया हूं। कश्मीर में कई बार शूटिंग की है, लेकिन यहां पहली बार आया हूं। खुशी है कि यहां आकर इतना प्यार मिल रहा है।
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आपकी फिल्म 'सैम बहादुर' की कहानी और गानों में देश प्रेम झलक रहा है। क्या कहेंगे इस बारे में?
विकी कौशल: 'सैम बहादुर' को एक बात बाकी फिल्मों से अलग करती है, वह है इसकी प्रामाणिकता। मेघना गुलजार ने इस पर बहुत मेहनत की है। इस फिल्म के गाने 'बढ़ते चलो' में सारे 'वॉर-क्राय' हैं। गुलजार साहब ने ये गाना लिखा है। फ्रेम में जो फौजी नजर आते हैं, वो सभी असली फौजी हैं, सिर्फ मैं वहां रियल फौजी नहीं था। डायरेक्टर जैसे ही कट बोलता था, तब मैं फौजियों से कहता था कि साहब कुछ हो जाएं तो बता दें।
फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ जैसी शख्सियत को बड़े परदे पर निभाना कैसा अनुभव रहा?
विकी कौशल: मुझे मेरे माता-पिता से उनके बारे में पता चला था। मेरा गांव पंजाब के होशियारपुर में है। माता-पिता ने 1971 की जंग नजदीक से देखी थी। उन्होंने मुझे सैम सर के बारे में बताया था। उनकी जिंदगी के पहलू मुझे भी नहीं पता थे। जब यह रोल मिला, तब खुशी थी कि बड़ा मौका मिल रहा है, लेकिन उसके बाद जिम्मेदारी का एहसास हुआ कि उन्होंने जो विरासत पीछे छोड़ी है, वह महत्वपूर्ण है। 40 साल उन्होंने यूनिफॉर्म पहनी, जंग लड़ी। वे कैसे बात करते थे, कैसे चलते थे। उनके परिवार के लोगों से मुलाकात हुई। बहुत रिसर्च हुई।
आर्मी के साथ कैसे ट्रेनिंग हुई?
विकी कौशल: उरी फिल्म के वक्त हमारी ट्रेनिंग सातवीं सिख रेजिमेंट के साथ हुई थी। चार दिनों के लिए मराठा रेजिमेंट के साथ वक्त बिताया था, तौर-तरीके समझे थे। फिजिकल तैयारी से ज्यादा इस फिल्म के लिए रिसर्च पर मेहनत हुई। हर रैंक को सैम सर ने कवर किया था, तो हर रैंक की क्या ड्यूटी होती है, वह समझा। बतौर नागरिक सबसे बड़ा अवॉर्ड यह होता है कि आर्मी आपको अपना मान ले। मैं खुशकिस्मत हूं कि फौज ने मुझे स्वीकार किया। चाहे उरी हो या सैम बहादुर हो, मुझे रियल हीरोज के साथ बातचीत का मौका मिला है। मैं जब भी उनसे बात करता हूं, बहुत प्रेरित होता हूं। उनके तौर-तरीके, शिष्टाचार बहुत अच्छा लगता है। उम्मीद है कि मैं आर्मी का 'ब्लू आइड बॉय' हूं।
1971 की जंग ने कई लोगों की जिंदगियां बदली थीं। इस फिल्म के दौरान क्या तजुर्बे आए?
विकी कौशल: जंग के जो भी हिस्से रहे, उन्हें सैम सर के नजरिए से देखने की कोशिश इस फिल्म में की गई है। 1971 की जंग में वे आर्मी चीफ थे, तब बतौर रणनीतिकार उनकी क्या सोच थी, यह पता चला। एक बार इंदिरा जी ने उनसे कहा था कि जंग शुरू कीजिए, तब उन्होंने डेढ़ महीने मांगे थे और 13 दिन में वह जंग जीतकर दिखाई और पाकिस्तान के 90 हजार से ज्यादा सैनिकों को बंदी बनाया गया। ये वही कर सकते थे। मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे इन चीजों को समझने का मौका मिल पाया।