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पढ़िए संजीव कुमार की अनसुनी कहानी, फिल्मालय स्टूडियो की यादों की जुबानी
Wed, 06 Nov 2019 09:13 AM IST
भावना शर्मा
अमित कुमार सिंह , मुंबई
अमित कुमार सिंह , मुंबई
Published by: भावना शर्मा
Updated Wed, 06 Nov 2019 09:13 AM IST
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Sanjeev Kumar
- फोटो : amar ujala mumbai
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अपनी संजीदा अदाकारी से हिंदी सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार का पूरा करियर सभी के लिये एक मिसाल है। गुजराती परिवार में जन्मे संजीव ने रंगमंच से अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत की। फिल्म जगत में उन्हें पहला मौका मशहूर फिल्मकार एस. मुखर्जी ने दिया था। 1960 में फिल्मालय स्टूडियो के बैनर तले रिलीज हुई फिल्म हम हिंदुस्तानी में संजीव एक पुलिस अफसर के किरदार में नजर आये।
filmalaya studio
- फोटो : amar ujala
फिल्म में अभिनेता का किरदार तो मात्र दो मिनट का था हालांकि इसके बाद संजीव ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। संजीव कुमार अपने काम को लेकर जितने संजीदा थे, निजी जिंदगी में वह उतने ही जिंदादिल भी रहे। दिग्गज कलाकार के व्यक्तित्व को जानने के लिये अमर उजाला, संजीव कुमार को पहला मौका देने वाले फिल्मालय स्टूडियो पहुंचा जहां अभिनेता के काम के गवाह रहे 80 वर्षीय आबिद ने संजीव कुमार से जुड़ी दिलचस्प बाते बताईं।
amitabh bachchan and sanjeev kumar
- फोटो : file photo
फिल्मालय में सीखी एक्टिंग की बारीकियां
गुजरे जमाने में एस. मुखर्जी के सेकेट्ररी और मौजूदा फिल्मालय स्टूडियो के कानूनी सलाहकार 80 वर्षीय आबिद के पास वैसे तो फिल्मालय स्टूडियो से जुड़े दर्जनों कलाकार के ढेरों किस्से हैं लेकिन संजीव कुमार को लेकर उन्होंने अमर उजाला को कुछ खास बातें बताईं। आबिद ने बताया, 'संजीव कुमार एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह एक्टिंग की दुनिया में किसी मजबूरी या पैसों की किल्लत के कारण नहीं बल्कि अपने रुझान के कारण आए।'
गुजरे जमाने में एस. मुखर्जी के सेकेट्ररी और मौजूदा फिल्मालय स्टूडियो के कानूनी सलाहकार 80 वर्षीय आबिद के पास वैसे तो फिल्मालय स्टूडियो से जुड़े दर्जनों कलाकार के ढेरों किस्से हैं लेकिन संजीव कुमार को लेकर उन्होंने अमर उजाला को कुछ खास बातें बताईं। आबिद ने बताया, 'संजीव कुमार एक संपन्न परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह एक्टिंग की दुनिया में किसी मजबूरी या पैसों की किल्लत के कारण नहीं बल्कि अपने रुझान के कारण आए।'
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sanjeev kumar
'उन्होंने पहले इप्टा और इंडियन नेशनल थियेटर में रंगमंच सीखा जिसके बाद वह फिल्मालय एक्टिंग स्कूल का हिस्सा बन गये। यहां उन्होंने करीब दो साल तक नि:शुल्क, अदाकारी की बारीकियां सीखी। साल 1960 में उन्हें फिल्मालय के ही बैनर तले बनी फिल्म हम हिंदुस्तानी से पहली बार हिंदी फिल्म जगत में कदम रखने का मौका मिला।'
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filmalaya
- फोटो : amar ujala
मुखर्जी परिवार के करीबी थे संजीव
आबिद ने आगे बताया, 'संजीव कुमार, एस. मुखर्जी साहब की काफी इज्जत करते थे। मुखर्जी परिवार के लिए वह घर के बच्चे की तरह थे। फिल्मालय में प्रशिक्षण और पहली फिल्म के बाद उन्होंने जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अपने एक्टिंग से उस जमाने के सुपरस्टार्स को भी टक्कर देते थे।' आबिद ने संजीव कुमार के व्यवहार को लेकर बताया, 'वह एक शानदार इंसान थे। हर किसी से खुशी से मिलते थे। उन्होंने कभी लोगों में भेदभाव भी नहीं किया। शूट के दौरान भी जब वह स्टूडियो आते तो वह सेट पर मौजूद स्टार्स से लेकर स्पॉटबॉय तक से खुलकर मिलते।'
आबिद ने आगे बताया, 'संजीव कुमार, एस. मुखर्जी साहब की काफी इज्जत करते थे। मुखर्जी परिवार के लिए वह घर के बच्चे की तरह थे। फिल्मालय में प्रशिक्षण और पहली फिल्म के बाद उन्होंने जिंदगी में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह अपने एक्टिंग से उस जमाने के सुपरस्टार्स को भी टक्कर देते थे।' आबिद ने संजीव कुमार के व्यवहार को लेकर बताया, 'वह एक शानदार इंसान थे। हर किसी से खुशी से मिलते थे। उन्होंने कभी लोगों में भेदभाव भी नहीं किया। शूट के दौरान भी जब वह स्टूडियो आते तो वह सेट पर मौजूद स्टार्स से लेकर स्पॉटबॉय तक से खुलकर मिलते।'