चर्चित फिल्म अभिनेता औऱ निर्देशक सतीश कौशिक ने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बच्चों के भी प्रभावित होने पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए अलग से व्यवस्था किए जाने की भी आवश्यकता पर जोर दिया है। सतीश कौशिक और उनकी बेटी दोनों हाल ही में कोरोना संक्रमण से उबरे हैं।
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बेटी संग सतीश कौशिक
- फोटो : Insatagram- @satishkaushik2178
सतीश कौशिक की आठ वर्षीया बेटी वंशिका को कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के बाद हाल ही में शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह एक महीने के इलाज के बाद जब से घर लौटी हैं, सतीश कौशिक ये सोचते रहते हैं कि बच्चों को कोरोना होना कितना जोखिम भरा है और कैसे वह इसकी चपेट में आ रहे हैं। सतीश कौशिक ने अभिभावकों से भी खास अपील की है कि वह अपने बच्चों का ख्याल रखें। गौरतलब है कि दूसरी लहर के दौरान कोरोना में जो म्यूटेशन हो रहे हैं, वे बच्चों के लिए काफी खतरनाक बताए जा रहे हैं।
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वंशिका कौशिक
- फोटो : Insatagram- @satishkaushik2178
सतीश कौशिक कहते हैं, “यह दूसरी लहर है और इस बार बच्चे भी संक्रमित हो रहे हैं। यह एक गंभीर मामला है जिससे हमारी सरकार को निपटना होगा। बच्चों के लिए उचित देखभाल केंद्र और अस्पतालों की व्यवस्था करने की आवश्यकता है। उन्हें बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सों की एक विशेष टीम शामिल करनी चाहिए जो बच्चों को पर्याप्त रूप से संभाल सकें।”
सतीश का कहना है कि अपनी बेटी के इलाज के दौरान उन्होंने जो अनुभव किया वह दर्दनाक था। वे कहते हैं, “जब मेरी बेटी वंशिका को अस्पताल के बिस्तर की ज़रूरत थी, तो मैं उसके लिए इसकी व्यवस्था करने में कामयाब रहा। लेकिन यह बेड उस अस्पताल में नहीं थी जो बच्चों का इलाज करता है या जहां कोविड-19 संक्रमित बच्चों के इलाज की सुविधाएं हों। बच्चों में इन दिनों मल्टी-सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम का पता चल रहा है और वंशिका को भी कई परीक्षणों से गुजरना पड़ा। जब स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की बात आती है तो हम अक्सर बच्चों के बारे में नहीं सोचते हैं।”
इस बारे में अपने अनुभवों से समाधान सुझाते हुए वह कहते हैं कि कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज के लिए प्रत्येक अस्पताल को तैयार करने की आवश्यकता है। हर कोविड अस्पताल में बच्चों के लिए एक वार्ड होना चाहिए और वहां माता-पिता के रुक सकने की भी व्यवस्था होनी चाहिए। सतीश कहते हैं, “यह एक डरावनी स्थिति है। यह समय की जरूरत है और हमें उसी के लिए सोचना और प्रावधान करना शुरू करना चाहिए।”