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'सत्यम शिवम सुन्दरम' के लिए वक्त नहीं दे पा रहे थे शशि कपूर, गुस्साए राज कपूर ने ऐसे चखाया था मजा
Sun, 18 Mar 2018 07:53 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 18 Mar 2018 07:53 AM IST
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सुंदर चेहरा, दमदार एक्टिंग और आकर्षक पर्सनैलिटी और दिलकश अंदाज से बॉलीवुड में खुद को रोमांटिक हीरो के तौर पर स्थापित करने वाले शशि कपूर का आज जन्मदिन है। 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में जन्मे शशि कपूर का आज 80वां जन्मदिन है। ये ऐसा पहला मौका होगा जब जन्मदिन के मौके पर वो हमारे बीच नहीं होंगे। दरअसल पिछले साल 4 दिसंबर 2017 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में लिवर फेल होने की वजह से उनकी मौत हो गई थी। इस खास दिन उनसे जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा अगली स्लाइड में जानिए
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बचपन से ही अपने पिता और भाईयों राज कपूर और शम्मी कपूर को अभिनय करते हुए देखकर उनका भी रुझान फिल्मों की ओर हो गया था। दरअसल, उनका व्यक्तित्व अपने दोनों भाइयों राज कपूर और शम्मी कपूर से अधिक आकर्षक तथा सुंदर रहा है। उनकी ओर जब कभी देखो वह हंसते-मुस्कुराते मिलते थे।
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शशि कपूर ने अपने सिने कॅरियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की। चालीस के दशक में उन्होने कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इनमें 1948 में प्रदर्शित फिल्म 'आग' और 1951 में प्रदर्शित फिल्म 'आवारा' शामिल हैं जिसमें उन्होंने अभिनेता राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई। अभिनेता के रूप में सिने करियर की शुरुआत 1961 में यश चोपड़ा की फिल्म 'धर्मपुत्र' से की। यह फिल्म आजादी के पहले की दशा पर आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास पर आधारित थी।
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70 के दशक में आते-आते शशि कपूर बॉलीवुड का पसंदीदा चेहरा बन चुके थे। उनके पास लगभग 150 फिल्मों के अनुबंध थे। वह एक दिन में तीन या चार फिल्मों की शूटिंग में पहुंच जाते थे। यह देख उनके बड़े भैया राज कपूर उन्हें टैक्सी बुलाने लगे थे कि जब बुलाओ तक आ जाती है और मीटर डाउन रहता है।
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ऐसी तल्ख टिप्पणी का एक कारण यह भी था कि शशि फिल्म 'सत्यम शिवम सुन्दरम' फिल्म तक के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे। शशि की व्यस्तता पर फिल्मकार मृणाल सेन भी एक टिप्पणी की थी कि शशि एक फिल्म में तौलिया लपेटकर बाथरूम में प्रवेश करते हैं और दूसरी फिल्म में पेंट के बटन लगाते बाहर निकलते हैं। आखिर यह आर्टिस्ट का कैसा रूप है?
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