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‘नृत्य सम्रागिनी’ कहलाती थीं सितारा देवी, इस वजह से ठुकरा दिया था पद्म भूषण पुरस्कार
एंटरनेटमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: shrilata biswas
Updated Sun, 08 Nov 2020 08:57 AM IST
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सितारा देवी
- फोटो : instagram/historypic
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मशहूर कथक नृत्यांगना सितारा देवी का जन्म आठ नवंबर 1920 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम धनलक्ष्मी था। उन्हें प्यार से लोग धन्नो बुलाते थे। सितारा देवी की कामयाबी के पीछे एक लंबा संघर्ष रहा। उनके जन्म दिवस के मौके पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्सों से रूबरू कराते हैं।
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सितारा देवी
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16 साल की उम्र में ही सितारा देवी को 'नृत्य सम्रागिनी' का खिताब मिल गया था। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें यह नाम दिया था। सितारा देवी के पिता सुखदेव महाराज भी एक कथक डांसर थे। साथ ही वे संस्कृत भाषा के भी बड़े विद्वान माने जाते थे। सुखदेव महाराज ने ही अपनी बेटी को नृत्य सिखाया। हालांकि समाज में इस वजह से उनकी काफी आलोचना भी हुई।
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सितारा देवी
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कम उम्र से ही नृत्य की शिक्षा लेने वालीं सितारा देवी ने महज 10 साल की उम्र में सोलो परफॉर्मेंस दिया। जब वह मुंबई पहुंचीं तो उन्होंने आतिया बेगम पैलेस में कथक की प्रस्तुति दी थी। इस कार्यक्रम में रवींद्रनाथ टैगोर, सरोजनी नायडू और पारसी परोपकारी सर कोवाजसी जहांगीर जैसे दिग्गज शामिल थे। सितारा देवी ने हिंदी सिनेमा में भी नृत्य किया। उनकी मुख्य फिल्मों में 'औरत का दिल', 'नगीना', 'रोटी' और ‘वतन’ हैं।
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सितारा देवी
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कला और नृत्य में सितारा देवी के योगदान को देखते हुए 1969 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, 1973 में पद्मश्री, 1995 में कालीदास सम्मान मिला। उन्होंने पद्म भूषण पुरस्कार लेने से मना कर दिया था और कहा था कि 'यह सम्मान नहीं अपमान है। क्या सरकार को कत्थक में मेरे योगदान के बारे में पता है?' सितारा देवी ने कहा था कि वे भारत रत्न से कम कोई पुरस्कार नहीं लेंगी।
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सितारा देवी
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सितारा देवी ने बॉलीवुड अभिनेत्रियों मधुबाला, रेखा, माला सिन्हा और काजोल को कत्थक सिखाया। भारत के अलावा सितारा देवी ने विदेश में भी अपने नृत्य का जादू बिखेरा। सितारा देवी की तीन शादियां हुईं। तीसरी शादी से उनको एक बेटा हुआ जिसका नाम रंजीत बरोट है। 25 दिसंबर 2014 को लंबी बीमारी के बाद मुंबई में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
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