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बहुत छोटी उम्र में दुनिया छोड़ गईं थीं ये अभिनेत्री, आखिरी इच्छा थी-मर जाऊं तो दुल्हन बना देना
Wed, 16 Oct 2019 06:24 PM IST
विजय जैन
बीबीसी हिंदी
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Published by: विजय जैन
Updated Wed, 16 Oct 2019 06:24 PM IST
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SMITA PATIL
- फोटो : Self
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अपने सशक्त अभिनय से पहचान बनाने वाली स्मिता पाटिल का जन्म 17 अक्टूबर 1956 में हुआ था। भले ही स्मिता पाटिल का फिल्मी सफर सिर्फ 10 साल का रहा है लेकिन काम ऐसा कि आज भी वो चर्चा में रहता है। लेकिन वो ना सिर्फ फिल्मों, बल्कि राज बब्बर से अपने सम्बन्धों की वजह से भी चर्चा में रही। सिर्फ 31 साल की उम्र में उनकी अचानक मौत आज भी रहस्यमयी है।
स्मिता पाटिल
- फोटो : File Pic
मुस्कान पर रख दिया नाम स्मिता
असल में जन्म के समय उनके चेहरे पर मुस्कराहट देख कर उनकी मां विद्या ताई पाटिल ने उनका नाम स्मिता रख दिया। यह मुस्कान आगे चलकर भी उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पहलू बना।
स्मिता पाटिल अपने गंभीर अभिनय के लिए जानी जाती हैं, लेकिन बहुत काम लोग जानते है कि फिल्मी परदे पर सहज और गंभीर दिखने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में बहुत शरारती थीं।
स्मिता पाटिल की जीवनी लिखने वाली मैथिलि राव बताती हैं, 'वो निजी जिन्दगी में बहुत साधारण थीं। उनके अंदर ऐसी कोई चाहत नही थीं कि वो कोई बहुत बडी स्टार बनें। जिन्दगी के प्रति गंभीर होने के साथ साथ वो बहुत शरारती थीं, बहुत मस्ती करती थीं, उन्हें गाडी चलाने का बहुत शौक था। यही कारण है कि 14 -15 साल की उम्र में ही उन्होंने चुपके से ड्राइविंग सीख ली।'
स्मिता पाटिल ने अपने छोटे फिल्मी सफर में ऐसी फिल्में की जो भारतीय फिल्मों के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं। उनकी छाप छोडने वाली फिल्मों में जहां भूमिका, मंथन, मिर्च मसाला, अर्थ, मंडी और निशांत जैसी कलात्मक फिल्में शामिल हैं, तो दूसरी तरफ नमक हलाल और शक्ति जैसी व्यावसायिक फिल्में भी कतार में है।
असल में जन्म के समय उनके चेहरे पर मुस्कराहट देख कर उनकी मां विद्या ताई पाटिल ने उनका नाम स्मिता रख दिया। यह मुस्कान आगे चलकर भी उनके व्यक्तित्व का सबसे आकर्षक पहलू बना।
स्मिता पाटिल अपने गंभीर अभिनय के लिए जानी जाती हैं, लेकिन बहुत काम लोग जानते है कि फिल्मी परदे पर सहज और गंभीर दिखने वाली स्मिता पाटिल असल जिंदगी में बहुत शरारती थीं।
स्मिता पाटिल की जीवनी लिखने वाली मैथिलि राव बताती हैं, 'वो निजी जिन्दगी में बहुत साधारण थीं। उनके अंदर ऐसी कोई चाहत नही थीं कि वो कोई बहुत बडी स्टार बनें। जिन्दगी के प्रति गंभीर होने के साथ साथ वो बहुत शरारती थीं, बहुत मस्ती करती थीं, उन्हें गाडी चलाने का बहुत शौक था। यही कारण है कि 14 -15 साल की उम्र में ही उन्होंने चुपके से ड्राइविंग सीख ली।'
स्मिता पाटिल ने अपने छोटे फिल्मी सफर में ऐसी फिल्में की जो भारतीय फिल्मों के इतिहास में मील का पत्थर बन गईं। उनकी छाप छोडने वाली फिल्मों में जहां भूमिका, मंथन, मिर्च मसाला, अर्थ, मंडी और निशांत जैसी कलात्मक फिल्में शामिल हैं, तो दूसरी तरफ नमक हलाल और शक्ति जैसी व्यावसायिक फिल्में भी कतार में है।
स्मिता पाटिल
फिल्मों से पहले मराठी में पढ़ती थी समाचार
फिल्मों में आने से पहले स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढा करती थीं। समाचार पढने से पहले उनके लिए साडी पहनना जरूरी होता था और स्मिता को जीन्स पहनना अच्छा लगता था तो स्मिता अक्सर न्यूज पढने से पहले जीन्स के ऊपर ही साडी लपेट लिया करती थीं। स्मिता के फिल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की डिप्लोमा फिल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने 'चरणदास चोर' से अपनी मौजूदगी दर्ज की। इसके निर्देशक थे श्याम बेनेगल।
वो बताते हैं, 'मैं अपनी फिल्म निशांत के लिए एक नए चेहरे की तलाश में था। मेरे एक साउंड रिकार्डिस्ट हुआ करते थे हितेन्दर घोष वो स्मिता पाटिल के दोस्त थे। हितेन्दर घोष ने मुझे बताया क मेरी एक दोस्त है स्मिता पाटिल। मैं उसके परिवार को जानता हूं।'
'वो पुणे से हैं लेकिन फिलहाल बॉम्बे में हैं और अपने पिता के साथ आयीं हैं। उनके पिता उस समय महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री थे। जब मैं स्मिता से मिला तो मैंने तय किया कि फिल्म निशांत में स्मिता को कास्ट करने से पहले मैं स्मिता का एक छोटा सा ऑडिशन लेना चाहता हूं और मैंने स्मिता को अपनी बाल फिल्म 'चरणदास चोर' में प्रिंसेस के रोल के लिए चुना।
फिल्मों में आने से पहले स्मिता पाटिल बॉम्बे दूरदर्शन में मराठी में समाचार पढा करती थीं। समाचार पढने से पहले उनके लिए साडी पहनना जरूरी होता था और स्मिता को जीन्स पहनना अच्छा लगता था तो स्मिता अक्सर न्यूज पढने से पहले जीन्स के ऊपर ही साडी लपेट लिया करती थीं। स्मिता के फिल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की डिप्लोमा फिल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने 'चरणदास चोर' से अपनी मौजूदगी दर्ज की। इसके निर्देशक थे श्याम बेनेगल।
वो बताते हैं, 'मैं अपनी फिल्म निशांत के लिए एक नए चेहरे की तलाश में था। मेरे एक साउंड रिकार्डिस्ट हुआ करते थे हितेन्दर घोष वो स्मिता पाटिल के दोस्त थे। हितेन्दर घोष ने मुझे बताया क मेरी एक दोस्त है स्मिता पाटिल। मैं उसके परिवार को जानता हूं।'
'वो पुणे से हैं लेकिन फिलहाल बॉम्बे में हैं और अपने पिता के साथ आयीं हैं। उनके पिता उस समय महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री थे। जब मैं स्मिता से मिला तो मैंने तय किया कि फिल्म निशांत में स्मिता को कास्ट करने से पहले मैं स्मिता का एक छोटा सा ऑडिशन लेना चाहता हूं और मैंने स्मिता को अपनी बाल फिल्म 'चरणदास चोर' में प्रिंसेस के रोल के लिए चुना।
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स्मिता पाटिल
- फोटो : fridaymoviezblog
जब गर्मी के बावजूद स्मिता ने किया काम
वो बताते हैं, जब हम छत्तीसगढ में शूटिंग कर रहे थे तब मैंने पाया कि ये लडकी तो बहुत टैलेंटेड और इसमें भरपूर आत्मविश्वास है। तभी मैंने तय किया कि स्मिता ही मेरी फिल्म निशांत में काम करेंगी।' साल 1977 स्मिता पाटिल के लिए एक अहम पडाव साबित हुआ इसी साल उनकी फिल्म भूमिका आई इस फिल्म के लिए स्मिता पाटिल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भूमिका से स्मिता पाटिल का जो सफर शुरू हुआ वो चक्र, निशांत, आक्रोश, गिद्ध, मिर्च मसाला जैसी फिल्मों तक जारी रहा। 1981 में आई फिल्म चक्र के लिए उन्हें एक बार फिर से नेशनल आवर्ड मिला। फिल्म मिर्च मसाला उनके निधन के बाद रिलीज हुई, लेकिन इस फिल्म में निभाये गए सोन बाई के किरदार को उनके बेहतरीन काम में से एक माना जाता है। इसी फिल्म ने निर्देशक केतन मेहता को अन्तरराष्ट्रीय ख्याति दिलवाई।
केतन मेहता बताते हैं, 'मिर्च मसाला मेरी तीसरी फिल्म थी और जब मुझे पता चला की मेरी स्क्रिप्ट नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन से एप्रूव्ड हो गई है तो मैं लोकेशन देखने गुजरात गया। उस फिल्म में मिर्च का एक अहम रोल है।जब मैंने वहां जाकर देखा की मिर्च का सीजन शुरू हो चुका है और ये सीजन दो महीने बाद खत्म हो जाएगा तो मैं भाग कर बॉम्बे आया और स्मिता से मिला और ये सारी बातें उन्हें बताईं और कहा कि अगर हम चूके तो अगले साल तक के लिए करना होगा।
स्मिता ने किसी भी तरह और फिल्मों की डेट आगे बढा दी और इस फिल्म की शूटिंग शुरू की।' 'सीन कुछ ऐसे थे कि एक मिर्च फैक्ट्री के अंदर कुछ औरतें काम करती हैं, गर्मी का मौसम था। धूप और गर्मी के बावजूद स्मिता ने बहुत ही स्पिरिट के साथ काम किया और यूनिट के दूसरे लोगों को भी प्रोत्साहित किया।'
वो बताते हैं, जब हम छत्तीसगढ में शूटिंग कर रहे थे तब मैंने पाया कि ये लडकी तो बहुत टैलेंटेड और इसमें भरपूर आत्मविश्वास है। तभी मैंने तय किया कि स्मिता ही मेरी फिल्म निशांत में काम करेंगी।' साल 1977 स्मिता पाटिल के लिए एक अहम पडाव साबित हुआ इसी साल उनकी फिल्म भूमिका आई इस फिल्म के लिए स्मिता पाटिल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भूमिका से स्मिता पाटिल का जो सफर शुरू हुआ वो चक्र, निशांत, आक्रोश, गिद्ध, मिर्च मसाला जैसी फिल्मों तक जारी रहा। 1981 में आई फिल्म चक्र के लिए उन्हें एक बार फिर से नेशनल आवर्ड मिला। फिल्म मिर्च मसाला उनके निधन के बाद रिलीज हुई, लेकिन इस फिल्म में निभाये गए सोन बाई के किरदार को उनके बेहतरीन काम में से एक माना जाता है। इसी फिल्म ने निर्देशक केतन मेहता को अन्तरराष्ट्रीय ख्याति दिलवाई।
केतन मेहता बताते हैं, 'मिर्च मसाला मेरी तीसरी फिल्म थी और जब मुझे पता चला की मेरी स्क्रिप्ट नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन से एप्रूव्ड हो गई है तो मैं लोकेशन देखने गुजरात गया। उस फिल्म में मिर्च का एक अहम रोल है।जब मैंने वहां जाकर देखा की मिर्च का सीजन शुरू हो चुका है और ये सीजन दो महीने बाद खत्म हो जाएगा तो मैं भाग कर बॉम्बे आया और स्मिता से मिला और ये सारी बातें उन्हें बताईं और कहा कि अगर हम चूके तो अगले साल तक के लिए करना होगा।
स्मिता ने किसी भी तरह और फिल्मों की डेट आगे बढा दी और इस फिल्म की शूटिंग शुरू की।' 'सीन कुछ ऐसे थे कि एक मिर्च फैक्ट्री के अंदर कुछ औरतें काम करती हैं, गर्मी का मौसम था। धूप और गर्मी के बावजूद स्मिता ने बहुत ही स्पिरिट के साथ काम किया और यूनिट के दूसरे लोगों को भी प्रोत्साहित किया।'
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Raj Babbar and Smita Patil
- फोटो : file photo
राज बब्बर की शादी तुड़वाने का लगा आरोप
स्मिता पाटिल को जहां उनके किरदारों के लिए सराहा गया वहीं दूसरी तरफ एक्टर और पॉलिटिशियन राज बब्बर से जुडे उनके सम्बन्ध को लेकर उनकी आलोचना भी की गई। उनके बारे में लोगों ने कहा कि उन्होंने राज बब्बर और नादिरा बब्बर की शादी तुडवा दी।
मैथिलि राव इस पर कहती हैं, 'स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के खिलाफ थीं। वो कहती थीं कि महिलाओं के अधिकार के लिए लडने वाली स्मिता किसी और का घर कैसे तोड सकती है। स्मिता के लिए उनकी मां रोल मॉडल थीं। उनकी जिन्दगी में मां फैसला बहुत मायने रखता था।
स्मिता पाटिल को जहां उनके किरदारों के लिए सराहा गया वहीं दूसरी तरफ एक्टर और पॉलिटिशियन राज बब्बर से जुडे उनके सम्बन्ध को लेकर उनकी आलोचना भी की गई। उनके बारे में लोगों ने कहा कि उन्होंने राज बब्बर और नादिरा बब्बर की शादी तुडवा दी।
मैथिलि राव इस पर कहती हैं, 'स्मिता पाटिल की मां स्मिता और राज बब्बर के रिश्ते के खिलाफ थीं। वो कहती थीं कि महिलाओं के अधिकार के लिए लडने वाली स्मिता किसी और का घर कैसे तोड सकती है। स्मिता के लिए उनकी मां रोल मॉडल थीं। उनकी जिन्दगी में मां फैसला बहुत मायने रखता था।