मैं एक दिन शूटिंग खत्म कर घर लौटा तो सोनम मेरे पास आई और कहा- मैं फिल्मों में जाऊंगी। मुझे अभिनेत्री बनना है। मैं कुछ देर उसको देखता रहा, फिर पूछा कौन ले रहा है अपनी फिल्म में? तो वह झट से बोली संजय लीला भंसाली। बचपन की सोनम और आज की सोनम को देखता हूं, तो चेहरे पर हंसी आ जाती है। जब वह छोटी थी और मैं शूटिंग पर जाता था, तो दिमाग में यही घूमता रहता कहीं वो रो तो नहीं रही होगी अपनी मम्मी को परेशान तो नहीं कर रही होगी। जब घर लौटता, तो घंटों उसके साथ खेलता। थोड़ी बड़ी हुई, तो उसकी शरारतें भी बढ़ गईं। पूरे घर में भागती-फिरती और मुझे अपने पीछे दौड़ाती।
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वह मुझसे बिल्कुल नहीं डरती थी, लेकिन अपनी मम्मी सुनीता कपूर से बेहद डरती थी। अपनी मम्मी के सामने वह शांत रहती और मेरे सामने उसकी शरारतें शुरू हो जातीं। सोनम के बाद रिया हमारी दुनिया में आई। शुरू में तो सोनम रिया से ज्यादा नजदीक नहीं थी लेकिन चार-पांच साल की उम्र की होते-होते रिया से उसकी दोस्ती बढ़ गई। अब दोनों बहनें मिलकर शरारतें करतीं। जब मैं घर पर होता, तो दोनों मिलकर खूब धमा-चौकड़ी करतीं। सोनम ने कभी किसी चीज के लिए जिद नहीं की। वह बेहद सामान्य और आम बच्चों की तरह 'कहा मानने वाली लड़की' है।
जब उन्होंने स्कूल जाना शुरू किया, तो मैं दोनों को पचास-पचास रुपये पॉकेट मनी दिया करता था, बाद में पॉकेट मनी सौ रुपये कर दी। चॉकलेट और मिठाई उसे बहुत पसंद हैं। समोसा भी उसका पसंदीदा रहा है। मुंबई के विद्या मंदिर स्कूल में उसने पढ़ाई की। बहुत शरारती थी स्कूल में, लड़कों तक से भिड़ जाती थी। अर्जुन कपूर भी उसके साथ उसी स्कूल में था, तो वह सब स्कूल में गैंग टाइप बनाकर रहते थे। भाइयों का साथ मिला हुआ था, तो किसी से भी लड़ने-भिड़ने से पीछे नहीं हटती थी। उस जमाने में सेलफोन तो हुआ नहीं करते थे, न ही कंप्यूटर ज्यादा थे।
दोनों बहने घर के कंप्यूटर पर गेम खेलने के लिए हमेशा तैयार रहतीं। मैं सप्ताह में एक घंटे ही उन्हें कंप्यूटर पर खेलने देता था। शुरुआत में उसे अभिनय का कोई शौक नहीं था। सोनम को बचपन से ही फैशन का शौक रहा है। खूबसूरती तो उसे अपनी मां से ही मिली है। सोनम अपनी मां की तरह ही खूबसूरत है। फैशन का शौक भी उसे अपनी मम्मी से ही मिला। उसकी मां अपने जमाने की सुपर मॉडल थीं, तो सोनम के अंदर भी फैशन को लेकर कुछ ज्यादा ही लगाव था। वह बचपन से ही नए-नए फैशन ट्राई करती। दोनों बहनें ही फैशन के प्रति अपनी मम्मी पर गईं हैं। अभिनेत्री बनने का तो उसने सोचा ही नहीं था।
वह सामान्य बच्चों की तरह रहना, जीना चाहती थी। उसका बचपन सामान्य था। स्कूल टाइम में प्ले करती थी। इतना तो चलता है, क्योंकि अभिनय उसके खून में था। लेकिन फिर भी उसने कभी नहीं कहा कि उसे अभिनय के क्षेत्र में जाना है। जब उसकी नानी (हिंगोरानी भंबानी) घर आती थीं, तो वह एकदम खुश हो जाती थी। अपनी नानी के बेहद करीब रही है सोनम। आज जब वह बड़ी हो गई है, तो कुछ-कुछ अपनी नानी जैसी दिखती है। उम्र बढ़ने के साथ ही उसमें अभिनय के प्रति लगाव जागा। स्कूल खत्म होने के बाद उसने सिंगापुर के यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज ऑफ साउथ ईस्ट एशिया से थिएटर और कला की पढ़ाई की।

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