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Interview: कोरियाई फिल्म का रीमेक है 'भारत', निर्देशक ने रीमेक बनाने पर किया बड़ा खुलासा
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sat, 08 Jun 2019 07:27 AM IST
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Ali Abbas Zafar, Bharat
- फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के एक फौजी परिवार से ताल्लुक रखने वाले अली अब्बास जफर दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से थिएटर सीखकर जब मुंबई पहुंचे तो उनको पता भी नहीं था कि तकदीर ने उनके लिए क्या सोच रखा है। वह बस मेहनत करते गए और अब वह सलमान खान के साथ फिल्म भारत से कामयाब फिल्मों की हैट्रिक लगाने के मुहाने पर हैं। अली अब्बास जफर से एक खास मुलाकात।
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Ali Abbas Zafar
- फोटो : file photo
तो भारत को आप एक देशभक्ति फिल्म मानते हैं?
जैसा कि आप जानते हैं मैं देहरादून से हूं। मेरे पिताजी सेना में थे। बाबा मेरे पुलिस में काम करते थे। मेरी परवरिश जिस परिवार में हुई वहां देशभक्ति हमें घुट्टी में मिलती है। लेकिन ये शोर मचाकर बताने वाली देशभक्ति नहीं है। देशभक्ति के बारे में मेरा ये मानना है कि जो भी जहां भी है, वहां रहते हुए वह ऐसा काम करे कि देश को उस पर नाज हो। हम बाहर जाते हैं तो पहचान पूछे जाने पर हम किसी को यह नहीं बताते कि हम हिंदू हैं या मुस्लिम। हम कहते हैं कि हम भारतीय हैं। बस यही मैं कहना चाहता हूं।
जैसा कि आप जानते हैं मैं देहरादून से हूं। मेरे पिताजी सेना में थे। बाबा मेरे पुलिस में काम करते थे। मेरी परवरिश जिस परिवार में हुई वहां देशभक्ति हमें घुट्टी में मिलती है। लेकिन ये शोर मचाकर बताने वाली देशभक्ति नहीं है। देशभक्ति के बारे में मेरा ये मानना है कि जो भी जहां भी है, वहां रहते हुए वह ऐसा काम करे कि देश को उस पर नाज हो। हम बाहर जाते हैं तो पहचान पूछे जाने पर हम किसी को यह नहीं बताते कि हम हिंदू हैं या मुस्लिम। हम कहते हैं कि हम भारतीय हैं। बस यही मैं कहना चाहता हूं।
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Ali Abbas Zafar
- फोटो : file photo
हिंदी सिनेमा में देशभक्ति फिल्में बनाने में मनोज कुमार अग्रणी रहे। फिल्मों में उनका नाम भी भारत ही होता था, तो उनसे कहीं कोई प्रेरणा?
मनोज कुमार की जो पहली फिल्म मैंने देखी, वह थी भगत सिंह। यह किरदार मेरा बहुत पसंदीदा किरदार रहा है। हिंदी सिनेमा में मनोज कुमार, यश चोपड़ा और ऋषिकेश मुखर्जी मेरे पसंदीदा फिल्ममेकर रहे हैं। देश के संस्कारों को लेकर इनकी फिल्मों का जो नजरिया रहा है, वह बहुत मजबूत है। मनोज कुमार की फिल्में जैसे उपकार या पूरब और पश्चिम, इनमें देशभक्ति जताने का नजरिया उस वक्त के हिसाब से ठीक था। अब समय नया है। अब हम बात को थोड़ा दूसरे तरीके से कहते हैं।
मनोज कुमार की जो पहली फिल्म मैंने देखी, वह थी भगत सिंह। यह किरदार मेरा बहुत पसंदीदा किरदार रहा है। हिंदी सिनेमा में मनोज कुमार, यश चोपड़ा और ऋषिकेश मुखर्जी मेरे पसंदीदा फिल्ममेकर रहे हैं। देश के संस्कारों को लेकर इनकी फिल्मों का जो नजरिया रहा है, वह बहुत मजबूत है। मनोज कुमार की फिल्में जैसे उपकार या पूरब और पश्चिम, इनमें देशभक्ति जताने का नजरिया उस वक्त के हिसाब से ठीक था। अब समय नया है। अब हम बात को थोड़ा दूसरे तरीके से कहते हैं।
Ali Abbas Zafar
- फोटो : file photo
आपकी फिल्म का भारत कैसा है?
सलमान खान ने भारत का जो किरदार किया है, वह अपने पिता के बताए उसूलों पर चल रहा है। वह सही भी होता है। गलत भी होता है। गिरता भी है। संभलता भी है। मेरी फिल्म का एक संवाद है, देश लोगों से बनता है और लोगों की पहचान उनके परिवार से होती है। हमारा पूरा देश एक परिवार ही तो है। आज देश में एक ऐसा आदमी जो अपने परिवार को सुखी रख सके, वही सबसे बड़ा हीरो है।
सलमान खान ने भारत का जो किरदार किया है, वह अपने पिता के बताए उसूलों पर चल रहा है। वह सही भी होता है। गलत भी होता है। गिरता भी है। संभलता भी है। मेरी फिल्म का एक संवाद है, देश लोगों से बनता है और लोगों की पहचान उनके परिवार से होती है। हमारा पूरा देश एक परिवार ही तो है। आज देश में एक ऐसा आदमी जो अपने परिवार को सुखी रख सके, वही सबसे बड़ा हीरो है।
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Ali Abbas Zafar
तो सलमान के साथ बतौर निर्देशक रिश्ते कैसे रहे?
उनके साथ जब पहली फिल्म सुल्तान बनाई तो शुरूआती दिक्कतें जरूर रहीं। हमें एक दूसरे को समझने में वक्त भी लगा। मैं अपनी फिल्में लिखता भी हूं और सुल्तान की स्क्रिप्ट उन्हें बहुत पसंद आई। फिर टाइगर जिंदा है के दौरान हमारे रिश्ते और सहज हुए। भारत बनाने का विचार सलमान का ही था, उन्होंने मुझे कोरियाई फिल्म ओड टू माई फादर देखने को दी। मैंने अपने करियर में कभी किसी फिल्म की रीमेक बनाने का सोचा तक नहीं था। लेकिन इस फिल्म ने मुझे हिला दिया। फिर हमने इसकी आज की जरूरतों और अपने देश के इतिहास के हिसाब से नई स्क्रिप्ट लिखी। एक साल की रिसर्च के बाद जब पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ तो वह समझ गए कि पिक्चर डायरेक्टर को समझ आ रही है।
उनके साथ जब पहली फिल्म सुल्तान बनाई तो शुरूआती दिक्कतें जरूर रहीं। हमें एक दूसरे को समझने में वक्त भी लगा। मैं अपनी फिल्में लिखता भी हूं और सुल्तान की स्क्रिप्ट उन्हें बहुत पसंद आई। फिर टाइगर जिंदा है के दौरान हमारे रिश्ते और सहज हुए। भारत बनाने का विचार सलमान का ही था, उन्होंने मुझे कोरियाई फिल्म ओड टू माई फादर देखने को दी। मैंने अपने करियर में कभी किसी फिल्म की रीमेक बनाने का सोचा तक नहीं था। लेकिन इस फिल्म ने मुझे हिला दिया। फिर हमने इसकी आज की जरूरतों और अपने देश के इतिहास के हिसाब से नई स्क्रिप्ट लिखी। एक साल की रिसर्च के बाद जब पहला ड्राफ्ट तैयार हुआ तो वह समझ गए कि पिक्चर डायरेक्टर को समझ आ रही है।