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अपने बेटे का बनाया हुआ गाना 'दम मारो दम' सुनकर स्टूडियो से चले गए थे एसडी बर्मन

Sat, 01 Oct 2016 10:35 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 01 Oct 2016 10:35 AM IST
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special story of sd burman birthday
sd burman

सचिन देव बर्मन, संगीत की दुनिया में एक ऐसा नाम जिसने अपने सुरों से एक नए युग की शुरुआत की। आज एसडी बर्मन का जन्मदिन है। उनके नगमों और संगीत को चाहकर भी नहीं भुलाया जा सकता है। आज उनके चाहने वालों के लिए उनके संगीत के सफर के साथ हम लाए हैं कुछ अनसुने किस्से। ये किस्से सुन आप जान पाएंगे कि कितने अद्भुत थे एसडी बर्मन। 

अपने बेटे का बनाया हुआ गाना 'दम मारो दम' सुनकर स्टूडियो से चले गए थे एसडी बर्मन

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एसडी बर्मन को अलग-आलग राज्य के संगीत प्रेमी अलग-अलग नामों से पुकारते थे। कोलकाता के लिए वो "सचिन कारता" तो मुंबई के लिए "बर्मन दा" थे। इसी तरह बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल के रेडियो श्रोताओं में "शोचिन देब बोर्मोन" के नाम से जाने जाते थे। वहीं सिने जगत के लिए "एस.डी" थे। एसडी बर्मन त्रिपुरा के राजा नबद्वीप चंद्र देव बर्मन के बेटे थे।

अपने बेटे का बनाया हुआ गाना 'दम मारो दम' सुनकर स्टूडियो से चले गए थे एसडी बर्मन

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सचिन 9 भाई-बहनों में से एक थे। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा अपने पिता व सितार-वादक नबद्वीप चंद्र देव बर्मन से ली। इसके आगे का संगीत उन्होंने उस्ताद बादल खान और भीष्मदेव चट्टोपाध्याय से सीखा। यहीं से उनकी शास्त्रीय संगीत की जड़ें पक्की हो गईं। अपने पिता की मौत के बाद वो घर से निकल गए और जंगलों में घूमते रहे। उन्होंने घूम-घूमकर बंगाल व आसपास के लोक संगीत की जानकारी ली।

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1930 में एसडी बर्मन ने कोलकाता में "सुर मंदिर" नाम से अपने संगीत विद्यालय की स्थापना की। अब लोग उन्होंने गायक के रूप में पहचानने लगे थे और वो फेमस हो गए। उन्होंने राज कुमार निर्शोने के लिये 1940 में एक बंगाली फिल्म में संगीत भी दिया।  उनकी एक स्टूडेंट थी मीरा दास गुप्ता, जिन्हें वो संगीत की तालीम देते थे। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे। दोनों ही बहुत अच्छे परिवार से थे। 

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इस वजह से दोनों के प्यार को किसी ने स्वीकार नहीं किया। दोनों के परिवारवाले एक-दूसरे को छोड़ने के लिए दबाव बनाने लगे। लेकिन एसडी ने ऐसा करने से मना कर दिया और मीरा से शादी कर ली। 1939 में राहुल देव बर्मन का जन्म हुआ। शादी के बाद एसडी मुंबई आ गए थे। लेकिन मुंबई में काम आसान नहीं था। वहां उन्हें पहचान मिलने में वक्त लगा।

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