बॉलीवुड से राजनीति में कई सितारे आए। कुछ के हाथ सफलता लगी तो कुछ तमाम कोशिशों के बाद भी नई पारी में पैर नहीं जमा सके। ऐसा नहीं है कि फिल्मी सितारों ने राजनीति का रुख अभी किया। कई साल पहले से बड़े पर्दे पर अपनी एक्टिंग का दम दिखा चुके स्टार्स ने राजनीतिक का दामना थाम चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले आए एग्जिट पोल ने राजनीतिक पार्टियों के बीच तहलका मचा दिया है। एग्जिट पोल के मुताबिक भाजपा को बढ़त मिल रही है वहीं बाकी पार्टियां पिछड़ती हुई दिखीं। जानिए ऐसे कौन से स्टार्स हैं जो राजनीति में हिट और फ्लॉप रहे।
ये 8 सितारे भी राजनीति में दांव पर लगा चुके हैं किस्मत, कुछ हुए हिट तो कुछ फ्लॉप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
80 के दशक में ही एक ऐसी राजनीतिक घटना हुई, जिसने फिल्मी दुनिया को भी प्रभावित किया। वो थी अक्टूबर, 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या। दिसंबर 1984 में चुनाव होने थे। राजीव गांधी ने अपने दोस्त और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन और सुनील दत्त से चुनाव लड़ने के लिए कहा था। सुनील दत्त 1984 में चुनाव जीत गए और सांसद बनने के बाद 2005 में मरते दम तक कांग्रेस में ही रहे। सुनील दत्त उन चंद हिंदी फिल्मी सितारों में से थे जो केंद्र में मंत्री भी बने और बतौर राजनेता उनकी बहुत इज्जत थी। फिलहाल सुनील दत्त अब इस दुनिया में नहीं है हालांकि राजनीति में उनका सफर हिट रहा।
1984 में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन का इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा से चुनाव लड़ना उस समय की सबसे बड़ी खबर थी। राजनीति ने ऐसी करवट ली कि बोफोर्स घोटाले में नाम आने के बाद सांसद अमिताभ का राजनीति से मोह भंग हो गया और उन्होंने राजनीति छोड़ दी। साथ ही उनकी गांधी परिवार से दूरी भी बढ़ने लगी। बिग बी का राजनीति करियर फ्लॉप रहा।
1991 के चुनाव के समय अमिताभ फिल्मों और राजनीति दोनों से दूर हो चुके थे। उस समय राजीव गांधी ने राजेश खन्ना से नई दिल्ली में लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ लड़ने के लिए आग्रह किया। ये महज संयोग था कि कभी राजेश खन्ना और अमिताभ एक तरह से प्रतिदंद्वी ही थे और बच्चन के बाद कांग्रेस से राजेश खन्ना चुनाव लड़ रहे थे। 1991 के चुनाव में राजेश खन्ना आडवाणी से सिर्फ 1,589 वोटों से हारे थे। जब 1992 में उपचुनाव हुआ तो राजेश खन्ना फिर नई दिल्ली से लड़े। राजेश खन्ना ने जल्दी ही राजनीति छोड़ दी और उनकी यह पारी फ्लॉप रही।
पंजाबी परिवार से आने वाले विनोद खन्ना ने 1998 में गुरदासपुर, पंजाब से एक बाहरी होने के बावजूद लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 का चुनाव छोड़ दिया जाए तो अपनी दुनिया को अलविदा कहने तक वे वहां से सांसद रहे। साथ ही विदेश राज्य मंत्री भी बने। उनके रहते इलाके में कई ब्रिज बने और उन्हें 'सरदार ऑफ ब्रिज' भी कहा जाने लगा। जब विनोद खन्ना 1999 में भाजपा से चुनाव लड़ रहे थे तो उन्होंने हेमा मालिनी से उनके लिए प्रचार करने के लिए कहा। हेमा का राजनीति से कोई नाता नहीं था। उन्होंने शुरुआती उलझन के बाद विनोद खन्ना के लिए प्रचार किया था। विनोद खन्ना सुनील दत्त की तरह की राजनीति में मजबूत पकड़ थी।