अभिनय की दुनिया का एक जाना पहचाना नाम हैं, सुप्रिया पाठक। मां दीना पाठक से सुप्रिया को अभिनय घुट्टी में मिला। बहन रत्ना पाठक भी अभिनेत्री हैं। पति पंकज कपूर की अदाकारी पर तो दुनिया मोहित है। सुप्रिया इन दिनों एक नई मिसाल बना रही हैं और वह है उम्र के इस पड़ाव पर उनका पहला ऑडियो नाटक रिकॉर्ड करना। रंगमंच की चर्चा चलने पर वह अब भी चहकर उठती हैं। रंगमंच, सिनेमा और टेलीविजन से होते हुए आवाज की दुनिया तक आईं सुप्रिया पाठक ने अपने डिजिटल डेब्यू पर ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल से ये एक्सक्लूसिव बातचीत एक वीडियो इंटरव्यू में की है। ये इंटरव्यू शनिवार शाम 7 बजे और रविवार दोपहर 2 बजे अमर उजाला के फेसबुक और यूट्यूब पेज पर प्रसारित होगा। पेश हैं उसके कुछ संपादित अंश।
Today@7PM: सुप्रिया पाठक ने एक्सक्लूसिव वीडियो इंटरव्यू में की राजेश खन्ना और रेडियो की बातें
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60 साल की उम्र में आवाज की दुनिया में डेब्यू कर रही हैं आप, नई तकनीक के भी अपने नए ही आनंद हैं, क्या कहती हैं इस बारे में?
जी हां, बिल्कुल सही कह रहे हैं आप। बहुत रोमांच सा महसूस कर रही हूं। इस उम्र में आकर जब आपको बिल्कुल ही कुछ नया करने का मौका मिलता है तो एक नई शुरुआत के अपने ही मजे होते हैं। एफएम से भी लोग ऊब रहे हैं। वहां हर चीज का बहुत दोहराव है। रेडियो हमारे बचपन की यादों से जुड़ा है। हमारे लिए तो यही एक माध्यम था मनोरंजन का। कलाकारों के लिए आय का साधन भी था। मैंने भी तब कोशिश की थी लेकिन आकाशवाणी ने तब मेरी आवाज ही नकार दी। बाद में, मैंने ‘कलयुग’ से फिल्मी करियर शुरू किया तो उसके बाद मुझे आकाशवाणी से बुलावा आया लेकिन तब मैंने मना कर दिया था।
आपने ‘कलयुग’ का जिक्र किया तो मुझे जेनिफर केंडल (शशि कपूर की पत्नी) याद आईं, उन्होंने ही तो पृथ्वी थिएटर में आपका नाटक देखकर इस फिल्म के लिए आपका नाम सुझाया था..
मेरा पूरा खानदान ही नाटकों से जुड़ा हुआ रहा है। मेरी मां (दीना पाठक) थिएटर बहुत करती थीं। मेरी बहन बहुत करती हैं। मेरा चहीता नाटक, जो आज भी मेरा सबसे चहीता है, वह है ‘मैनागुर्जरी’ जिससे मैंने शुरूआत की थी। जेनिफर ने मेरा नाटक ‘बीवियों का मदरसा’ देखा था। नाटक करने का जो जज्बा है वो अभी तक गया नहीं है और वह मेरे भीतर अब भी जीता है। अगर मौका मिले तो मैं तो अब भी रंगमंच पर काम करना चाहूंगी।
परदे पर आपकी मासूमियत के लोग दशकों से दीवाने रहे और फिर संजय लीला भंसाली ने आपको एक ऐसे किरदार में पेश कर दिया कि लोग डरने लगे..
मैं एक अभिनेत्री हूं। मुझे जितनी नई चुनौतियां मिलेंगी मुझे तो उनमें मजा ही आएगा। एक लंबे अरसे तक मैंने अच्छी अच्छी चीजें कीं तो जब मैंने धनकोर (फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम लीला’) किया तो लोगों को झटका लगा कि ये कैसे कर सकती हैं। लेकिन, मालिक की कुछ दया हो गई और लोगों ने उस रोल में मुझे पसंद किया।
और, चौंकाने वाला काम आपने ऑडिबल के पॉडकास्ट ‘बुरी नजर’ में भी किया है। अंधविश्वास को कितना मानती हैं आप?
ऑडियो शो ‘बुरी नजर’ एक विचार है। ये एक मां का डर है। हरेक मां को डर रहता है कि मेरे बच्चों को बुरी नजर ना लगे। हमने इस विचार को एक रोचक कहानी के जरिए ऑडिबल पर कहने की कोशिश की है। अंधविश्वास मैं तो मानती नहीं हूं पर हमारी परंपराएं हैं जो सदियों से चली आ रही हैं। मैं इसे नकारती भी नहीं हूं। हमारी नानी, दादी और मां के जमाने की बातें हैं ये।