सीबीआई ने रिया चक्रवर्ती की ओर से दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहनों पर लगाए गए आरोपों को काल्पनिक और अटकलबाजी पर आधारित बताया है। एजेंसी ने यह बात बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कही है। बीते महीने रिया चक्रवर्ती ने मुंबई के बांद्रा पुलिस थाने में दिवंगत अभिनेता की बहन प्रियंका और मीतू सिंह के खिलाफ सुशांत सिंह राजपूत की दवाइयों का नकली पर्चा बनाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवाई थी।
रिया चक्रवर्ती के आरोपों को सीबीआई ने बताया काल्पनिक, बोले- सुशांत की बहनों पर FIR गैरकानूनी है
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रिया चक्रवर्ती ने अपने वकील सतीश मानेशिंदे के जरिए बांद्रा पुलिस थाने में नकली मेडिकल पर्चा बनाने के आरोप में प्रियंका और मीतू सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। अब रिया चक्रवर्ती के इन आरोपों को सीबीआई ने पूरा तरह से काल्पनिक और अटकलबाजी पर आधारित बताया है। एजेंसी ने कहा कि ऐसी अटकलों के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। सीबीआई ने यह बात सुशांत सिंह राजपूत की बहन प्रियंका सिंह और मीतू सिंह की याचिका के जवाब में कही है।
रिया चक्रवर्ती दिवंगत अभिनेता की गर्लफ्रेंड थीं। उन पर सुशांत के परिवार ने आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया था। तो वहीं रिया चक्रवर्ती ने थाने में नकली मेडिकल पर्चा बनाने के आरोप में प्रियंका और मीतू सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। वहीं हाल ही में प्रियंका और मीतू ने बॉम्बे हाईकार्ट में याचिका दायर करते हुए मुंबई पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने का आग्रह किया है।
प्रियंका और मीतू की इस याचिका के खिलाफ रिया चक्रवर्ती ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि दिवंगत अभिनेता की बहन प्रियंका और मीतू सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने वाली याचिका को खारिज किया जाए। साथ ही कहा है कि उन पर गंभीर आरोप हैं और इस मामले की जांच किसकी एजेंसी द्वारा होनी बहुत जरूरी है।
रिया चक्रवर्ती ने अपनी याचिका में कहा था कि प्रियंका और मीतू सिंह ने एनडीपीएस एक्ट का उल्लघंन किया है। उन्होंने कहा, 'उक्त पर्चे की दवाइयों के पांच दिन बाद ही सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु हो गई, जिसमें उनकी बहन (प्रियंका) और डॉ. तरुण कुमार के इशारे पर उन्हें गैरकानूनी तरीके से दवाइयां दी गई थीं। इसलिए इसकी पूरी जांच होनी बहुत जरूरी है।' रिया चक्रवर्ती की यह याचिका जस्टिस एस के शिंदे और एम एस कर्णिक की खंडपीठ के समक्ष पेश हुई थी, जिसमें सीबीआई और मुंबई पुलिस दोनों को जांच चार नवंबर तक पूरी करने के लिए कहा गया है।
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