जैसाकि बीते कुछ साल में तमाम फिल्म निर्देशकों के साथ हुआ है, निर्देशक आनंद एल राय को भी अपने जमाने के सुपरस्टार शाहरुख खान जैसे ही मिले, उनका अपना सिनेमा रास्ते से भटक गया। फिल्म ‘जीरो’ के बाद वह उसी जगह पहुंच गए हैं जहां वह कुछ साल पहले फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ की रिलीज से पहले थे। उनकी पिछली फिल्म ‘अतरंगी रे’ को वितरकों की बेरुखी के चलते सीधे ओटीटी पर रिलीज करना पड़ा और अब 11 अगस्त को उनके करियर का बड़ा इम्तिहान फिल्म ‘रक्षाबंधन’ से होने वाला है। टेलीविजन के लोकप्रिय निर्देशक रवि राय के छोटे भाई आनंद मंगलवार को 51 साल के हो रहे हैं। आइए आपको बताते हैं उनकी फिल्म ‘तनु वेड्स मनु’ से जुड़ा वह दिलचस्प किस्सा, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
Anand L Rai B’Day: ‘तनु वेड्स मनु’ से पहले आनंद ने बनाईं ये फ्लॉप फिल्में, हिट की हैट्रिक के बाद फिर ‘जीरो
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फिल्म 'तनु वेड्स मनु' से पहले आनंद एल राय की पहचान सिर्फ रवि राय के छोटे भाई के रूप में थी। रवि राय का उन दिनों छोटे पर्दे पर बहुत बड़ा नाम था और इंजीनियरिंग करके सिनेमा में आए आनंद एल राय उनके साथ ही जुड़कर काम करने लगे। टेलीविजन से निकलकर आनंद ने सबसे पहले जिमी शेरगिल को लेकर साइको थ्रिलर फिल्म 'स्ट्रेंजर्स' बनाई लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से फ्लाप रही। इसके बाद जैकी श्रॉफ के साथ उनकी दूसरी फिल्म 'थोड़ी लाइफ थोड़ी मैजिक' भी ठीक से रिलीज नहीं हो पाई। लगातार दो फिल्में फ्लॉप होने के बाद भी आनंद ने हिम्मत नहीं हारी।
आनंद एल राय ने अपनी तीसरी फिल्म 'तनु वेड्स मनु' बनाने की तैयारी शुरू की तो उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा। कोई भी निर्माता उस कांसेप्ट पर फिल्म बनाने के लिए राजी नहीं था। ये उन दिनों की बात है जब बड़ी बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां हिंदी सिनेमा में अपना बाजार बना रही थीं लेकिन इसके बावजूद दो साल तक किसी कॉरपोरेट कंपनी ने आनंद एल राय की इस कहानी को तवज्जो नहीं दी। लगातार दो फ्लॉप फिल्में देने के बाद उन पर भरोसा करने को कोई निर्माता भी तैयार नहीं हो रहा था और इसी दरम्यान उनकी मुलाकात हुई रियल एस्टेट कारोबारी विनोद बच्चन से।
विनोद बच्चन का अंधेरी के रियल एस्टेट कारोबार में बड़ा नाम रहा है और वह उन दिनों फिल्म निर्माता के तौर पर अपनी पहली फिल्म 'सिक्सटीन' बनाने की प्लानिंग कर रहे थे। लेखक हिमांशु शर्मा ने इसी बीच एक दिन उन्हें अपनी कहानी 'तनु वेड्स मनु' सुनाई। विनोद बच्चन को फिल्म का कांसेप्ट बहुत अच्छा लगा । विनोद बच्चन कहते है, ‘इस फिल्म की कहानी मैंने तीन चार बार सुनी। जब यह फिल्म मेरे पास आई तो उस समय कंगना रणौत और आर माधवन फिल्म के लिए फाइनल थे। हिमांशु शर्मा ने ही मेरी मुलाकात आनंद एल राय कराई फिर इस तरह 'तनु वेड्स मनु' की शुरुआत हुई।’
लेकिन दिक्कतें आनंद एल राय का पीछा नहीं छोड़ रही थीं। विनोद बच्चन की मदद से फिल्म 'तनु वेड्स मनु' बनकर तैयार तो हो गई लेकिन अब कोई भी स्टूडियो इसे रिलीज करने को तैयार नहीं था। डेढ़ साल तक यह फिल्म अलग अलग कॉरपोरेट ऑफिस में घूमती रही। फिर विनोद ने इस फिल्म के बारे में उन दिनों बालाजी टेलीफिल्म्स के सीईओ विक्रम मल्होत्रा को बताया। संयोग ये रहा कि उन्हीं दिनों विक्रम बालाजी छोड़कर वायकॉम 18 में चले गए। वॉयकॉम 18 को फिल्म बाजार में स्थापित करने के लिए उन्हें ऐसे ही किसी विषय की जरूरत थी जो हिंदी सिनेमा की बंधी बंधाई लीक से अलग हो।